महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भायंदर स्थित बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता के परिवार से जुड़ी सेवन स्क्वायर स्कूल में जैन धर्म के पर्युषण पर्व के दौरान छात्रों के लंच बॉक्स में नॉनवेज, प्याज, लहसुन, आलू, चुकंदर और दूसरी जमीन के अंदर उगने वाली सब्जियां नहीं लाने के निर्देश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने आरोप लगाया है कि स्कूल के जरिए छात्रों पर धार्मिक आहार संबंधी मान्यताएं थोपी जा रही हैं।

आठ दिनों के लिए जारी किया गया सर्कुलर

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवन स्क्वायर स्कूल, मीरा रोड ईस्ट ने जैन समुदाय के आठ दिवसीय पर्युषण पर्व की शुरुआत के बाद अपने पोर्टल पर एक सर्कुलर जारी किया। इसमें विद्यार्थियों से कहा गया कि वे आठ दिनों तक अपने लंच बॉक्स में नॉनवेज, प्याज, लहसुन, आलू, चुकंदर और अन्य कंद-मूल वाली सब्जियां न लाएं।
स्कूल Seven Eleven Education Society द्वारा संचालित है। इसके संचालन से बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता का परिवार जुड़ा हुआ है और उनकी पत्नी इस सोसाइटी की चेयरपर्सन हैं। स्कूल CBSE से संबद्ध है।
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संजय राउत का कड़ा बयान, कहा- लव जिहाद से भी ज्यादा भयावह

शिवसेना यूबीटी के सीनियर नेता संजय राउत ने इसकी कड़ी निन्दा की है। उन्होंने आज गुरुवार को एक्स पर पूरी जानकारी देते हुए लिखा है- यह स्कूल बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता का है। फडणवीस मंत्रिमंडल में जो लोग हिंदू धर्म के तथाकथित रक्षक हैं, क्या महाराष्ट्र में धर्म के नाम पर यह हमला आपको मंजूर है? यह घटना लव जिहाद से भी ज्यादा भयावह है! क्या यही लोग तय करेंगे कि मुंबई के मराठी लोग रह सकते हैं या नहीं? क्या यही लोग तय करेंगे कि क्या खाना है और क्या नहीं? क्या वे मुंबई में गणपति उत्सव पर भी कब्जा कर लेंगे? क्या 106 मराठी लोगों के बलिदान से हासिल किया गया यह महाराष्ट्र नीलाम होने वाला है या क्या?

MNS ने लगाया धार्मिक मान्यता थोपने का आरोप

स्कूल के निर्देश के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इसका विरोध किया। MNS नेता सचिन पोकेले ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मेहता के जैन होने के कारण स्कूल में विद्यार्थियों पर जैन धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप खान-पान की पाबंदियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने इस मामले में सिविक एजुकेशन ऑफिसर से शिकायत कर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत दिए जाने की बात सामने आई है। MNS का सवाल है कि जब स्कूल में अलग-अलग समुदायों और धार्मिक पृष्ठभूमि के बच्चे पढ़ते हैं, तो किसी एक धर्म की आहार संबंधी मान्यताओं को सभी विद्यार्थियों पर क्यों लागू किया जाए।

शिक्षा विभाग करेगा स्कूल का निरीक्षणः विवाद बढ़ने के बाद मीरा-भायंदर की शिक्षा अधिकारी सुलभा वटारे ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि वह स्कूल का निरीक्षण करेंगी और उसके बाद ही इस मामले पर कोई टिप्पणी करेंगी। यानी फिलहाल शिक्षा विभाग ने स्कूल के सर्कुलर को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने किया बचाव

बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने स्कूल के फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य किसी धर्म की मान्यता बच्चों पर थोपना नहीं है, बल्कि बच्चों को पौष्टिक भोजन खाने के लिए प्रोत्साहित करना है। मेहता ने कहा कि जैन धर्म में पर्युषण के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है और स्कूल ने इसी अवधि में इन चीजों से बचने की सलाह दी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस तरह परिवार गणेशोत्सव या नवरात्रि जैसे धार्मिक अवसरों पर कुछ लोग अपनी इच्छा से नॉनवेज खाना छोड़ देते हैं, उसी तरह पर्युषण के दौरान स्कूल में इन खाद्य पदार्थों को नहीं लाने में क्या गलत है।

‘प्रतिबंध’ या सिर्फ अपील? यही है विवाद

इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्कूल और विधायक की ओर से इसे धार्मिक प्रतिबंध के बजाय अनुरोध/अपील बताया जा रहा है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि स्कूल का आधिकारिक सर्कुलर छात्रों और अभिभावकों पर व्यावहारिक दबाव पैदा करता है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, अभिभावकों के व्हाट्सऐप समूह में भी संदेश भेजकर प्याज, लहसुन, आलू और बीट जैसे कंद-मूल पदार्थों को टिफिन में न भेजने की अपील की गई थी। स्कूल की कैंटीन में भी इस अवधि में इन चीजों का इस्तेमाल नहीं करने की बात कही गई। 

जैनियों का पर्युषण पर्व क्या है?

जैन धर्म में पर्युषण महापर्व आत्मसंयम, उपवास, आत्मचिंतन और क्षमा का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस वर्ष मुंबई में जैन समुदाय ने 8 सितंबर से पर्युषण की शुरुआत की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास और विशेष खान-पान संबंधी नियमों का पालन करते हैं। जैन परंपरा में पर्युषण के दौरान कंद-मूल वाली सब्जियों और कई अन्य खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है। लेकिन विवाद इस बात पर है कि क्या किसी धार्मिक पर्व के दौरान अपनाए जाने वाले व्यक्तिगत आहार नियमों को स्कूल के सभी बच्चों के लिए लागू किया जा सकता है?

स्कूल पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

सेवन स्क्वायर स्कूल इससे पहले भी विवादों में रहा है। Times Of India के अनुसार, स्कूल जिस जमीन पर संचालित हो रहा है, उसके संबंध में भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मीरा-भायंदर नगर निगम के विकास योजना में तकनीकी स्कूल के लिए आरक्षित जमीन पर सेवन स्क्वायर अकादमी शुरू की गई। कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं। संपत्ति के कथित हस्तांतरण और सरकारी राजस्व के नुकसान से जुड़े आरोपों का मामला अदालत में लंबित बताया गया है।

असली सवाल: स्कूल में धर्म और खान-पान की सीमा क्या हो?

इस विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- भारत जैसे बहुधार्मिक समाज में स्कूलों को विद्यार्थियों के खान-पान से जुड़े मामलों में धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाना चाहिए? पर्युषण मनाने वाले विद्यार्थियों और परिवारों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन चुनने की पूरी स्वतंत्रता हो सकती है, लेकिन दूसरे धर्मों या अलग खान-पान की आदतों वाले बच्चों पर वही नियम लागू करने को लेकर विवाद होना स्वाभाविक है। इस मामले में अब शिक्षा विभाग का निरीक्षण महत्वपूर्ण होगा। यह स्पष्ट करेगा कि स्कूल का सर्कुलर स्वैच्छिक अपील था या विद्यार्थियों के लिए प्रभावी रूप से अनिवार्य निर्देश।