टीएमसी सहित कई क्षेत्रीय पार्टियों के कांग्रेस में विलय के कयास की हाल में जो ख़बरें आई थीं, अब शिवसेना यूबीटी के बागी सांसदों ने उसी लाइन पर उद्धव गुट के कांग्रेस में विलय की आशंका का हवाला देते हुए अलग होने की दलील रखी है। शिवसेना यूबीटी के 6 लोकसभा सांसदों का कहना है कि उनकी मुख्य चिंता यह थी कि उद्धव ठाकरे की पार्टी का कांग्रेस में विलय हो सकता है और इसी डर ने उन्हें अलग रास्ता चुनने को मजबूर किया। एक रिपोर्ट के अनुसार बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को जो ख़त सौंपा है उसमें इसका ज़िक्र किया गया है।

टूट-फूट की वजह क्या बताई गई?

शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कई सांसदों ने अरविंद सावंत के ज़रिए उद्धव ठाकरे से मुलाकात की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत कांग्रेस के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं और पार्टी की दिशा कांग्रेस की ओर मोड़ रहे हैं। बागियों का कहना है कि संजय राउत ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस को कांग्रेस में विलय करने का सुझाव दिया था। इससे उनके मन में आशंका और मजबूत हो गई कि शिवसेना यूबीटी के साथ भी ऐसा ही कुछ हो सकता है। इसलिए उन्होंने शिंदे गुट वाली शिवसेना से विलय का रास्ता चुना।
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नरेश म्हस्के का यह बयान उस संदर्भ में है जिसमें संजय राउत ने टीएमसी में टूट-फूट का हवाला देते हुए हाल ही में कहा था कि बीजेपी को रोकने के लिए सभी अलग हुए दल मूल कांग्रेस में वापस आ जाएँ।

इस बीच ख़बर है कि 17 जून को सुबह करीब 7 बजे श्रीकांत और निंबालकर ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से मुलाकात की। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उसी दिन सुबह ही कुछ घंटे बाद करीब 10.20 बजे बाकी सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने बताया कि पार्टी का नेतृत्व पार्टी की विचारधारा से भटक गया है और वरिष्ठ नेता शिवसेना यूबीटी का कांग्रेस में विलय करने की योजना बना रहे हैं।

इसके साथ ही अपने पत्र में बागी सांसदों ने कहा कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय कर रहे हैं और उन्होंने सदन में अपनी बैठने की जगह बदलने का अनुरोध किया।

शिंदे ने भी 2022 में दी थी ऐसी ही दलील

चार साल पहले 2022 में जब शिवसेना एक थी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बगावत हुई थी तो शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से अलग होते समय यही मुख्य दलील दी थी। उन्होंने कहा था कि, 'बाल ठाकरे हमेशा कांग्रेस के विरोधी रहे थे। उद्धव ठाकरे ने सत्ता के लालच में कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन करके शिवसेना के हिंदुत्व और इसकी मूल विचारधारा से समझौता कर लिया। इसलिए वे 'असली शिवसेना' और बालासाहेब की विचारधारा बचाने के लिए बीजेपी के साथ जा रहे हैं।'
यह दलील शिंदे ने कई बार दोहराई है। ठीक वैसे ही जैसे अब शिवसेना यूबीटी के बागी सांसद शिंदे गुट में विलय के लिए कह रहे हैं कि उद्धव अब कांग्रेस के साथ और आगे बढ़ रहे हैं। यानी दोनों मामलों में विचारधारा से समझौते वाली दलील एक जैसी है।

अहम बात यह है कि शिवसेना यूबीटी बागी गुट के पास नौ में से छह सांसद हैं, जिससे उनके पास दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए ज़रूरी दो-तिहाई बहुमत है।

माना जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के ये छह बागी सांसद 20 जून को शिंदे से मिलेंगे, जो शिवसेना के स्थापना दिवस के अगले दिन होगा। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि वहां सांसद लोकसभा स्पीकर के साथ हुई अपनी बैठक की जानकारी दे सकते हैं और वह पत्र जारी कर सकते हैं जिसमें कथित तौर पर बताया गया है कि उन्होंने उद्धव गुट से अलग होने का फैसला क्यों किया।

6 सांसदों ने मीटिंग का बहिष्कार किया

दिल्ली में शिवसेना यूबीटी की संसदीय दल की गुरुवार को बैठक बुलाई गई थी। इसमें उद्धव ठाकरे को समर्थन जताने और पार्टी टूटने से बचाने पर चर्चा होनी थी। लेकिन 9 में से 6 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। ऐसा तब हुआ जब पार्टी ने व्हिप जारी किया था। बैठक में शामिल नहीं होने वालों में संजय दिना पाटिल, नागेश पाटिल आष्टिकर, ओम राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव शामिल हैं।

संजय राउत का बड़ा हमला

संजय राउत ने बागियों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने उन्हें 'देशद्रोही, बेईमान और फ्रॉड' बताया। राउत ने चेतावनी दी कि वे अभी भी पार्टी के सदस्य हैं और पार्टी के नाम पर चुनाव लड़े हैं। व्हिप का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। राउत ने कहा, 'आपके क्षेत्रों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इस बार धोखा महंगा पड़ेगा।'

बागियों को चेताया- 'चेहरे पर गोबर पोत देंगे'

ओमप्रकाश राजे निंबालकर की बगावत की अटकलें तेज होने के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जो भी पार्टी छोड़ेगा उसके चेहरे पर गोबर पोत दिया जाएगा। धाराशिव में कार्यकर्ताओं ने कहा, 'उद्धव ठाकरे की पार्टी छोड़ने वालों को धाराशिव में घूमने भी नहीं दिया जाएगा।' ईटी की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी के उपजिला प्रमुख बंदू आदरकर और सुरेश गवई ने कहा कि अगर निंबालकर ने पार्टी छोड़ी तो उन्हें कभी चुनाव नहीं जीतने देंगे। एक कार्यकर्ता ने साफ कहा, 'एक भी कार्यकर्ता अगर छोड़ेगा तो उसके चेहरे पर गोबर पोत दूंगा, यह मेरा पक्का रुख है।'

बागी सांसदों को सुरक्षा बढ़ाई

महाराष्ट्र सरकार ने विद्रोह के बीच 6 सांसदों को Y-plus सुरक्षा कवर दे दिया है। राज्य इंटेलिजेंस विभाग के कमिश्नर ने 17 जून को इस आदेश पर दस्तखत किए। संजय राउत ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो बिना सुरक्षा के घूमें।
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TMC का कांग्रेस में विलय की अटकलें क्यों?

शिवसेना यूबीटी में ये घटनाक्रम तब चल रहा है जब क्षेत्रीय विपक्षी दलों में विलय की चर्चा तेज है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से हुई मुलाकातों ने नई अटकलों को जन्म दिया। तब मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से ख़बर दी गई कि ममता बनर्जी को कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने की पेशकश की गई और अभिषेक बनर्जी ने ममता को राज्यसभा भेजने की मांग रखी। तब राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच करीब 90 मिनट की लंबी बैठक हुई थी।

इंडिया गठबंधन मजबूत होगा या कमजोर?

यह शिवसेना यूबीटी में दूसरा बड़ा राजनीतिक विभाजन है। इससे पहले 2022 में शिवसेना में विभाजन हुआ था। 2023 में एनसीपी में बड़ी टूट हुई थी। अब टीएमसी के 20 सांसदों द्वारा एनडीए में जाने की खबर के साथ विपक्षी इंडिया गठबंधन में अस्थिरता दिख रही है।

बहरहाल, INDIA गठबंधन में दरारें साफ नजर आ रही हैं। एक तरफ कांग्रेस में विलय की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ सहयोगी दलों में बगावत हो रही है। आने वाले दिनों में इन घटनाक्रमों से महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर पड़ने वाला है। आगे और बड़े बदलाव हो सकते हैं।