loader

रिया की माँ बोलीं- परिवार ऐसी पीड़ा से गुजरा कि हम आत्महत्या के बारे में सोचने लगे थे

क़रीब एक महीने बाद रिया चक्रवर्ती जब जेल से रिहा होकर घर पहुँचीं तो उनकी माँ संध्या चक्रवर्ती की क्या प्रतिक्रिया थी? वह इन दिनों किन हालातों से गुज़रीं, उनकी उस प्रतिक्रिया में जाहिर होता है। रिया के जेल से छूटने के बारे में पूछे जाने पर संध्या ने मीडिया से बातचीत में कहा- 'भगवान मौजूद हैं।' उनके इन शब्दों में वह पीड़ा है जिससे वह गुजरी हैं। उन्हें ऐसा ख़तरा महसूस होने लगा था कि सुरक्षा के लिए दरवाजे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए। वह कहती हैं कि वह ऐसी स्थिति से गुजरीं कि उन्हें मन में जान देने के ख्याल तक आने लगे थे। वह हमेशा मानसिक तौर पर डरी हुई होती हैं कि पता नहीं आने वाले कल के दिन क्या हो जाएगा।

रिया की माँ की ये आशंकाएँ और डर वाजिब हैं। यह इसलिए कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में जिस तरह से रिया और उनके भाई शौविक चक्रवर्ती को कथित तौर पर अपुष्ट तथ्यों के आधार पर ख़बरें चलाई गईं, उनकी छवि ख़राब की गई, आचरण पर सवाल उठाए गए और कई सरकारी एजेंसियाँ जिस तरह से पूछताछ करती रहीं, वह स्थिति किसी भी परिवार के लिए बेहद कष्टदायक होंगी ही। मीडिया रिया का ऐसे पीछा करता रहा जैसे उन्होंने रिया को पहले ही दोषी मान लिया हो। एनसीबी में पेशी के दौरान तो ऐसी तसवीर आई जैसे रिया पर मीडिया की 'भीड़' ने चारों तरफ़ से हमला कर दिया हो। 

सम्बंधित खबरें

हालाँकि, अब जो रिपोर्टें आ रही हैं उनमें से कोई भी रिया को आरोपी साबित नहीं करती हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में तीन एजेंसियाँ- सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और एनसीबी यानी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो जाँच कर रही हैं। तीनों ही एजेंसियों को अब तक रिया के ख़िलाफ़ कुछ हाथ नहीं लगा है। ड्रग्स और एनसीबी से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जज ने रिया को ज़मानत देते हुए कहा है कि, 'मैं इस बात से सहमत नहीं हो पा रहा हूँ कि ड्रग्स का सेवन करने के लिए दूसरे को पैसे देने का मतलब वित्तपोषण या उसमें शामिल होना है।' इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा, 'मेरे पास यह विश्वास करने के लिए उचित आधार हैं कि आवेदक धारा 19 के तहत किसी भी अपराध के लिए दोषी नहीं है, 24 या 27ए या कोई अन्य अपराध जिसमें व्यावसायिक मात्रा शामिल है। उसके ख़िलाफ़ कोई अन्य अपराधिक मामला नहीं है। उसने ड्रग्स को आगे बेचकर मुनाफ़ा कमाने का काम नहीं किया। वह ड्रग्स डीलरों की कड़ी का हिस्सा भी नहीं है।'

एनसीबी को कोर्ट से ज़बरदस्त झटका लगा क्योंकि यही एनसीबी उछल-उछल कर मुख्य धारा के कुछ मीडिया को खुराक मुहैया करा रही थी और रिपोर्टें लीक कराकर रिया का सार्वजनिक तौर पर चरित्रहरण करा रही थी!

ऐसी ही रिपोर्ट मिशिगन यूनिवर्सिटी में एक एसोसिएट प्रोफ़ेसर के नेतृत्व में अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने दी है। अध्ययन में पता चला है कि जो कंटेंट निराधार हत्या की साज़िश को उछाल रहे थे, उन्हें आत्महत्या के कंटेंट से कहीं ज़्यादा लोगों ने देखा। अध्ययन में कहा गया है कि सुशांत सिंह राजपूत की 'आत्महत्या' ने कई महीनों तक चलने वाले प्राइम टाइम कवरेज के मीडिया उन्माद को भड़काया। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे मामले को कुछ राजनेताओं, पत्रकारों और मीडिया हाउस ने अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया हो सकता है। इसमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि इसके लिए ग़लत सूचनाओं का सहारा लिया गया। 

ग़लत सूचनाओं का ज़िक्र शायद इसलिए किया गया क्योंकि अधिकतर मीडिया रिपोर्टों या फिर नेताओं के बयानों में सुशांत की मौत को हत्या बताने के पीछे अधिकतर अपुष्ट बातें कही जा रही थीं।

अधिकतर बार तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया। यह बात एम्स की रिपोर्ट और सीबीआई के बयान से भी ज़ाहिर होती है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई की रिपोर्ट भी आत्महत्या की ओर ही इशारा कर रही है। एम्स ने हाल ही में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि सुशांत ने आत्महत्या की थी।

'द इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, सीबीआई की जाँच में भी कुछ ऐसे तथ्य आए हैं। सुशांत की मौत के सीन को रिक्रिएट किया गया यानी उस घटना को उसी तरह से पेश कर पड़ताल की गई। लेकिन इसमें भी कोई गड़बड़ी नहीं मिली। सुशांत के बैंक खाते के ऑडिट में भी कोई ऐसी गड़बड़ी नहीं पाई गई है जिससे कुछ संदेह पैदा हो। 

सुशांत के पिता के आरोप

जिस रिया चक्रवर्ती के बारे में सीबीआई और ईडी की रिपोर्ट किसी संदेह से इनकार कर रही है उन्हीं के ख़िलाफ़ सुशांत के पिता केके सिंह ने बिहार में एफ़आईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सुशांत के बैंक खाते से 15 करोड़ रुपये निकाले गए थे और उसके लिए उन्होंने रिया चक्रवर्ती पर आरोप लगाया था। 

पहले भी इन आरोपों की जाँच प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने की थी और उसे सुशांत के पिता के के सिंह के आरोप सही नहीं लगे। सुशांत के बैंक खाते से इतने रुपये रिया को ट्रांसफ़र किए जाने का ईडी को कोई भी सबूत नहीं मिला।

ऐसे हालात से गुजरने के बीच ही रिया जब जेल से घर लौटीं तो उनकी माँ ने उन हालातों का ज़िक्र किया जिससे वह गुजरीं। 

वीडियो में देखिए, बिना सबूत के ही रिया को बदनाम किसने किया?

'टीओआई' के अनुसार, रिया की माँ संध्या ने कहा कि जब एक विशेष एनडीपीएस अदालत ने मंगलवार को रिया और शौविक की हिरासत को दो सप्ताह तक बढ़ा दिया था तब 'रिया के पिता कल टूटने के कगार पर थे'। वह कहती हैं, 'वह (रिया) जिन हालातों से गुजरी है वह इससे कैसे बाहर निकलेगी?' फिर वह कहती हैं कि 'लेकिन वह एक फ़ाइटर है और वह मज़बूत ही है।'

संध्या चक्रवर्ती ने कहा कि उनकी बेटी कुछ दिन के लिए घर पर रहकर पर देश भर में 'बदनाम' और 'लिंच' किए जाने के दुःस्वप्न से उबर सकती है। उन्होंने कहा, 'मुझे इस आघात से उबरने में मदद करने और उसके जीवन को फिर से सामान्य करने के लिए उसे थैरेपी देनी होगी।' वह कहती हैं कि हालाँकि एक राहत है कि वह जेल से बाहर है, लेकिन यह अभी भी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'मेरा बेटा अभी भी सलाखों के पीछे है और डर लगा रहता है कि पता नहीं आने वाले समय में कब क्या होगा।'

कोरोना के डर और बाहर खड़े मीडिया द्वारा 'हमला' किए जाने के आतंक से वे अपने अपार्टमेंट से बाहर नहीं निकलते हैं।

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, रिया की माँ ने कहा, 'पिछली बार जब मेरे पति ईडी से मिलने के लिए बाहर निकले थे तो उन्हें रास्ते में रोक लिया गया था। और वह लड़ने वाले व्यक्ति नहीं हैं।' उन्होंने कहा, 'जब भी दरवाजे की घंटी बजती है हम हर बार घबरा जाते हैं। हम नहीं जानते कि यह कौन हो सकता है। सीबीआई या बिल्डिंग के पड़ोसी के तौर पर ख़ुद को बताकर पत्रकार हमारे परिसर में आ चुके हैं। हमने ख़ुद को सुरक्षित करने के लिए अपने दरवाजे के बाहर सीसीटीवी लगाए हैं।'

बता दें कि रिया के पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती सेना के अस्पताल में 24 साल तक सर्जन रहे हैं। रिया की माँ संध्या स्कूल की शिक्षिका रही हैं। इंद्रजीत बंगाल के रहने वाले हैं जबकि संध्या महाराष्ट्र की रहने वाली हैं। वे 12 साल से मुंबई में रह रहे हैं। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए


गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

महाराष्ट्र से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें