विधानपरिषद उपसभापति चुनाव के बीच शिवसेना यूबीटी को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाने वाले सचिन अहिर ने मंगलवार को विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ओर से नामांकन दाखिल कर दिया। उनके इस क़दम को यूबीटी से शिंदे खेमे में औपचारिक रूप से शामिल होने के तौर पर देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा राजनीतिक नुक़सान माना जा रहा है।

अब तक आदित्य ठाकरे के बेहद क़रीबी माने जाते रहे सचिन अहिर के नामांकन दाखिल करने के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद रहे। सचिन अहिर का अचानक पाला बदलना महाराष्ट्र की राजनीति में नए घटनाक्रम की शुरुआत माना जा रहा है।

आदित्य के सबसे भरोसेमंद थे अहिर

सचिन अहिर लंबे समय से आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे हैं। खासकर, मुंबई के वर्ली क्षेत्र में संगठन खड़ा करने और चुनावी रणनीति बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है। 2019 के विधानसभा चुनाव में जब आदित्य ठाकरे पहली बार चुनाव मैदान में उतरे थे तब सचिन अहिर को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी छोड़कर शिवसेना में शामिल कराया गया था। इसके बाद उन्हें वर्ली क्षेत्र की पूरी राजनीतिक ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
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माना जा रहा है कि शिंदे गुट ने आदित्य ठाकरे के सबसे क़रीबी सहयोगी को अपने साथ लाकर उद्धव गुट के मुंबई संगठन को कमजोर करने की कोशिश की है।

पार्टी ने सब कुछ दिया, फिर भी छोड़ गए: आदित्य

अपने सबसे करीबी सहयोगी के पार्टी छोड़ने पर आदित्य ठाकरे ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, 'जीवन में कुछ सिद्धांत होने चाहिए। अगर पार्टी ने आपको सब कुछ दिया है तो मुश्किल समय में पार्टी के साथ भी खड़ा रहना चाहिए।' आदित्य ठाकरे ने नाराज़गी जताते हुए यह भी कहा, 'उन्हें मेरे सामने लाओ, मैं पूछूंगा कि पार्टी ने उन्हें आखिर क्या नहीं दिया?'

एमवीए ने भी उम्मीदवार उतारा

महाविकास आघाड़ी यानी एमवीए ने विधान परिषद सदस्य जगन्नाथ अभ्यंकर को अपना उम्मीदवार बनाया है। इसकी पुष्टि शिवसेना यूबीटी नेता अंबादास दानवे ने की। दूसरी ओर, सचिन अहिर ने महायुति की ओर से विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया। इसके साथ ही यह साफ हो गया कि अब वे आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट का हिस्सा बन चुके हैं। दिलचस्प बात यह रही कि महायुति के भीतर शिवसेना की वरिष्ठ नेता नीलम गोरहे और कृपाल तुमाने जैसे नेता भी उपसभापति पद की दावेदारी कर रहे थे। इसके बावजूद एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के नेताओं की बजाय विपक्ष के नेता सचिन अहिर को उम्मीदवार बनाया। इसे विपक्ष में बड़ी सेंध लगाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

शिंदे गुट के विधायक महेंद्र दलवी ने दावा किया कि सचिन अहिर का पार्टी में आना आदित्य ठाकरे के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका है।

शिंदे ने सचिन अहिर को बताया 'राजनीति का तेंदुलकर'

एकनाथ शिंदे ने सचिन अहिर का स्वागत करते हुए उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'सचिन अहिर राजनीति के तेंदुलकर हैं। उन्होंने छक्का मारा है। वे जमीनी नेता हैं और जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ है।' शिंदे ने आगे कहा, 'वह हमारे ऐसे खिलाड़ी हैं जो बल्लेबाजी भी करेंगे, गेंदबाजी भी करेंगे और फील्डिंग भी करेंगे।'

कांग्रेस भी हुई हैरान

महाविकास अघाड़ी की सहयोगी कांग्रेस भी सचिन अहिर के इस फैसले से हैरान दिखाई दी। कांग्रेस नेता अमीन पटेल ने कहा, 'कुछ दिन पहले ही मैं महाविकास अघाड़ी की बैठक में सचिन अहिर के साथ बैठा था। मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वे ऐसा कदम उठाएंगे।'

महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल

सचिन अहिर के शिंदे गुट में जाने के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी पर दबाव और बढ़ गया है। पहले छह सांसदों के जाने और अब आदित्य ठाकरे के सबसे क़रीबी नेता के पाला बदलने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले दिनों में शिवसेना यूबीटी के और विधायक व नेता भी शिंदे गुट का रुख करेंगे।

'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा तेज

सचिन अहिर के शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा तेज हो गई है। कुछ दिन पहले शिंदे की शिवसेना के मंत्री गुलाबराव पाटिल ने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायक जल्द ही शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे की पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसद भी शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं।

उद्धव के क़रीबी भी बैठक से रहे थे अनुपस्थित!

विधायकों के पाला बदलने को लेकर कयास तब तेज हुआ जब हाल ही में मुंबई में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की बुलाई गई बैठक से चार विधायक गायब रहे। इनमें कई विधायक वो हैं जो क़रीब चार साल पहले हुई बगावत के दौरान भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहे। इनमें से एक हैं कालिना सीट से विधायक संजय पोतनीस। पोतनीस शिवसेना यूबीटी के पुराने और अनुभवी चेहरे हैं। 2022 के फूट के समय उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ दिया था। वह 2014, 2019 और 2024 में तीन बार कालिना से विधायक चुने गए। मुंबई में पार्टी के लिए यह सीट बेहद अहम है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बैठक में न आने का कारण बताया कि कुछ जरूरी काम था।
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सांसदों की फूट पर शिंदे बोले थे- 'अभी ट्रेलर है'

शिवसेना यूबीटी की ओर से जो भी बयान आए हों, लेकिन पार्टी के 6 सांसदों की बगावत पर शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा था, 'यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। आगे क्या होता है, इंतजार कीजिए।' शिवसेना यूबीटी के इन सांसदों को शामिल किए जाने को लेकर मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकनाथ शिंदे ने नए सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनकी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, 'आज मेरे साथ एक नहीं, बल्कि छह बाघ मौजूद हैं। इस बार हमने राजनीतिक मैदान में छक्का लगाया है।'

इसी बीच, उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी के बागी सांसदों के क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर, शिंदे गुट लगातार दावा कर रहा है कि आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे के कई और नेता उनके साथ जुड़ सकते हैं।