मनोज जरांगे ने पिछले हफ्ते ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें बातचीत में कहा गया कि उन्हें एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे के ज़रिए 500 करोड़ दिए गए। जरांगे ने पैसे लेने से इनकार किया और साज़िश का दावा किया है। राउत इसी मुद्दे को उठा रहे हैं।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे-पाटिल से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपये के ऑडियो क्लिप विवाद में अब ईडी जाँच की मांग की गई है। शिवसेना यूबीटी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा है कि इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की जाए।
राउत ने कहा कि कथित ऑडियो क्लिप में 500 करोड़ रुपये के लेनदेन की चर्चा सामने आई है। इसलिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी रकम किसने दी, किसे दी गई, पैसा कहां से आया और अगर पैसा जरांगे तक नहीं पहुंचा तो आखिर कहां गया। उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस और ED से मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू करने की मांग भी की है। हालांकि, कथित ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पहले ही ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराने की घोषणा कर चुके हैं। हालांकि, एकनाथ शिंदे और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे ने आरोपों को खारिज किया है।
क्या है 500 करोड़ रुपये का पूरा विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मनोज जरांगे-पाटिल ने दावा किया कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीजेपी नेतृत्व के सामने कथित तौर पर कहा था कि उनके बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिए गए थे। जरांगे ने 20 अक्टूबर को कुछ कथित ऑडियो क्लिप जारी की थीं। उनके मुताबिक़ इन क्लिप में बीजेपी नेताओं के बीच ऐसी बातचीत सुनाई देती है जिसमें 2024 के चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने के लिए जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिए जाने की चर्चा है। जरांगे ने खुद पैसे लेने से इनकार किया है। उनका कहना है कि किसानों और आम लोगों के मुद्दे उठाने के कारण उन्हें बदनाम करने की साज़िश रची जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आरक्षण आंदोलन को कमजोर करने और उनकी छवि ख़राब करने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विवाद की तह तक जाने की मांग की है।
संजय राउत ने अमित शाह से क्या कहा?
अमित शाह को लिखे पत्र में संजय राउत ने सवाल उठाया कि यदि जरांगे को 500 करोड़ रुपये नहीं मिले तो इस रकम का क्या हुआ। राउत के मुताबिक़ मामले में यह पता लगाना ज़रूरी है कि इतनी बड़ी रक़म का स्रोत क्या था और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस और ED को जल्द से जल्द जांच शुरू करनी चाहिए, ताकि जनता के सामने सच्चाई लाई जा सके और यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई हो।
राउत ने अपने पत्र में लिखा कि कथित आरोपों की पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि 500 करोड़ रुपये किसने दिए, किसे दिए और अगर पैसा जरांगे तक नहीं पहुंचा तो वह कहां गायब हो गया। राउत ने इस मामले को संभावित मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए कहा कि इसकी जांच उसी नजरिये से की जानी चाहिए।
राउत ने ED की पिछली कार्रवाई का उदाहरण दिया
संजय राउत ने अमित शाह को लिखे पत्र में ED की पिछली कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जब कम रकम से जुड़े आरोपों में भी एजेंसी जांच करती रही है तो 500 करोड़ रुपये के इस कथित विवाद में जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मार्च 2021 में महाराष्ट्र के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख से जुड़े मामले का उदाहरण दिया।राउत के मुताबिक उस समय मुंबई के तत्कालीन पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने उनसे हर महीने 100 करोड़ रुपये इकट्ठा करके देने को कहा था। राउत ने कहा कि उन आरोपों के बाद ED ने मामले में तेजी से कार्रवाई की थी और देशमुख को गिरफ्तार भी किया गया था। देशमुख के मामले का हवाला देते हुए राउत ने अब सवाल उठाया है कि कथित 500 करोड़ रुपये के विवाद में भी जांच एजेंसियों को सक्रिय होना चाहिए। राउत ने कहा कि मौजूदा विवाद में रकम बहुत बड़ी है और कथित ऑडियो क्लिप के सामने आने के कारण मामले की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
एकनाथ, श्रीकांत शिंदे ने आरोपों को नकारा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे ने जरांगे को उनके माध्यम से 500 करोड़ रुपये दिए जाने के आरोपों को खारिज किया है। एकनाथ शिंदे ने इस मामले की जांच कराने की मांग भी की है। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित ऑडियो क्लिप कहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तो नहीं बनाई गई हैं। इस विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 23 अक्टूबर को ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराने की घोषणा की थी। इस जांच का उद्देश्य क्लिप की प्रामाणिकता और उससे जुड़े तथ्यों की पड़ताल करना है।
बीजेपी ने संजय राउत पर ही लगाया आरोप
500 करोड़ रुपये के विवाद ने बीजेपी और शिवसेना यूबीटी के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा दिया है। बीजेपी ने शनिवार को आरोप लगाया कि संजय राउत ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने और महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर दरार पैदा करने के लिए AI की मदद से फर्जी ऑडियो क्लिप तैयार की हैं।
इसके जवाब में राउत ने दावा किया कि ऑडियो क्लिप बीजेपी के ही एक विधान परिषद सदस्य ने लीक की थीं। राउत ने इसे बीजेपी के भीतर चल रही आपसी प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में एक-दूसरे को पीछे छोड़ने की होड़ के कारण ये क्लिप सामने आईं। इस तरह विवाद अब केवल कथित 500 करोड़ रुपये के भुगतान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता और उसे सामने लाने वाले व्यक्ति को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।
मनोज जरांगे ने क्या कहा?
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे-पाटिल ने आरोपों को अपने खिलाफ साजिश बताया है। उन्होंने साफ कहा है कि उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया। जरांगे के मुताबिक, वह किसानों और आम नागरिकों के मुद्दे उठा रहे हैं और इसी वजह से उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मराठा आरक्षण आंदोलन को नुकसान पहुंचाने के लिए पार्टी फंड का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से इस मामले की पूरी जांच कराने की मांग की है।
फिलहाल इस विवाद में तीन स्तरों पर जांच और कार्रवाई की मांग सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार ने कथित क्लिप की तकनीकी जांच कराने की घोषणा की है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि रिकॉर्डिंग में छेड़छाड़ हुई है या नहीं। संजय राउत चाहते हैं कि महाराष्ट्र पुलिस मामले में औपचारिक केस दर्ज करे और कथित लेनदेन की जांच करे। राउत ने अमित शाह से अनुरोध किया है कि कथित 500 करोड़ रुपये के स्रोत, लेनदेन और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच ED को सौंपी जाए।