कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि मामले में सावरकर के चचेरे प्रपौत्र सात्यकी सावरकर ने पुणे की एक अदालत में गवाही देते हुए दावा किया है कि सावरकर मुसलमानों के हितैषी थे और वह उनसे नफरत नहीं करते थे। सात्यकी ने अदालत में कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में सावरकर की गलत तस्वीर पेश की और उन्हें मुसलमानों से नफरत करने वाला तथा भीड़ हिंसा करने वाला व्यक्ति बताया, जबकि ऐसा नहीं था।

सात्यकी सावरकर ने अदालत में कहा कि विनायक दामोदर सावरकर मुसलमानों से नफरत नहीं करते थे, बल्कि उन्होंने अपनी रचनाओं में उनके विकास और प्रगति के रास्ते भी बताए थे। यह कहते हुए ही उन्होंने दावा किया राहुल गांधी ने सावरकर की छवि ख़राब की है।

यह मामला राहुल गांधी के वर्ष 2023 में लंदन में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है। आरोप है कि अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा था कि सावरकर ने अपनी एक किताब में एक ऐसी घटना का ज़िक्र किया है, जिसमें उन्होंने और उनके कुछ दोस्तों ने एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई की थी और उन्हें ऐसा करने में आनंद आया था।
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राहुल गांधी के इसी बयान को लेकर सात्यकी सावरकर ने पुणे की अदालत में राहुल गांधी के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। उनका कहना है कि इस बयान से सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचा और उनके बारे में लोगों के बीच गलत संदेश गया।

अदालत में क्या बोले सात्यकी?

न्यायिक मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे की अदालत में राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद डी. पवार ने सात्यकी सावरकर से पूछा कि राहुल गांधी ने ऐसा कौन-सा बयान दिया था जिसे वह मानहानिकारक मानते हैं। इस पर सात्यकी सावरकर ने अदालत को बताया कि राहुल गांधी ने दावा किया था कि सावरकर ने अपनी किताब में एक मुस्लिम व्यक्ति की पिटाई करने की घटना लिखी है और उसे सुखद बताया है। उन्होंने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान से सावरकर को मुसलमानों से नफरत करने वाला और भीड़ हिंसा करने वाला व्यक्ति दिखाने की कोशिश की गई। सात्यकी ने अदालत में कहा,
इन शब्दों के जरिए सावरकर को मुसलमानों से बेहद नफरत करने वाला और मॉब लिंचर के रूप में पेश किया गया। जबकि सावरकर ने कभी मुसलमानों से नफरत नहीं की। उन्होंने अपने लेखन में उनके विकास के उपाय भी बताए हैं।
सात्यकी सावरकर

ब्रिटिश शासन के मामलों पर भी हुई पूछताछ

सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील ने सावरकर के खिलाफ ब्रिटिश शासन के दौरान दर्ज मामलों को लेकर भी सवाल पूछे। इस पर सात्यकी सावरकर ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार अंग्रेज सरकार ने सावरकर पर ब्रिटिश शासन के खिलाफ युद्ध छेड़ने और नासिक के तत्कालीन कलेक्टर जैक्सन की हत्या के मामले में शामिल होने के आरोप लगाए थे।

सुनवाई के दौरान महात्मा गांधी की हत्या के बाद गठित कपूर आयोग को लेकर भी सात्यकी सावरकर से सवाल किए गए। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि कपूर आयोग का गठन विशेष रूप से सावरकर की भूमिका की जांच के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि आयोग का उद्देश्य यह पता लगाना था कि बालूकाका कानिटकर जैसे लोगों या सरकार को गांधी हत्या की साजिश की पहले से जानकारी थी या नहीं और उसके बाद प्रशासन ने क्या क़दम उठाए।

गोपाल गोडसे की किताबों का भी हुआ जिक्र

अदालत में सात्यकी सावरकर ने यह भी स्वीकार किया कि महात्मा गांधी की हत्या के बाद उनके नाना गोपाल गोडसे ने कई किताबें लिखीं। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ किताबें गांधी हत्या से जुड़े मुकदमे पर आधारित थीं। उन्होंने यह भी माना कि गोपाल गोडसे ने अपनी पुस्तक 'गांधी हत्या आणि मी' में इस मुकदमे का विस्तार से उल्लेख किया है।

आरएसएस और हिंदू महासभा पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील ने अदालत में गोपाल गोडसे के कुछ वीडियो इंटरव्यू भी पेश किए। इन वीडियो के प्रतिलेख अदालत में पढ़कर सुनाए गए, जिनमें गोपाल गोडसे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिंदू महासभा के बीच वैचारिक अंतर पर चर्चा की थी। वीडियो में यह भी कहा गया कि नाथूराम गोडसे आरएसएस के स्वयंसेवक थे।
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नाथूराम-गोपाल गोडसे थे संघ के सदस्य: सात्यकी

क़रीब एक पखवाड़े पहले पिछली सुनवाई में सात्यकी सावरकर ने अदालत को बताया था कि उनके नाना गोपाल गोडसे और बड़े नाना नाथूराम गोडसे दोनों आरएसएस से जुड़े हुए थे। जिरह के दौरान सबसे अहम सवाल आरएसएस की सदस्यता को लेकर पूछा गया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार इस पर सात्यकी सावरकर ने कहा, 'यह सही है कि मेरे नाना गोपाल गोडसे और नाथूराम गोडसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे।' इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नाथूराम गोडसे हिंदू महासभा के सदस्य भी थे।

पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट में दर्ज बयान के अनुसार सात्यकी सावरकर ने कहा था, 'यह सही है कि मेरे नाना गोपालराव गोडसे और विनायक दामोदर सावरकर इस हत्या के मामले में आरोपी थे। यह भी सही है कि मेरे बड़े नाना नाथूराम गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला भवन में प्रार्थना सभा के लिए जा रहे महात्मा गांधी को गोली मारकर उनकी हत्या की थी।'
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अदालत ने आपत्तियां फिलहाल सुरक्षित रखीं

बहरहाल, ताज़ा सुनवाई के दौरान राहुल गांधी के वकील द्वारा पूछे गए कुछ सवालों पर सात्यकी सावरकर की ओर से पेश अधिवक्ता संग्राम कोठलकर ने आपत्ति जताई। हालांकि अदालत ने कहा कि इन आपत्तियों पर अंतिम फैसला मामले के अंतिम निर्णय के समय किया जाएगा।

मामले में सात्यकी सावरकर की जिरह अभी पूरी नहीं हुई है। अदालत ने अगली सुनवाई 3 सितंबर तय की है, जब राहुल गांधी की ओर से उनके वकील सात्यकी सावरकर से आगे भी सवाल पूछेंगे। इस मानहानि मामले की सुनवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें राहुल गांधी के लंदन में दिए गए बयान, विनायक दामोदर सावरकर के विचारों और उनके ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जुड़े कई पहलुओं पर अदालत में विस्तार से बहस हो रही है।