शिवसेना यूबीटी में सांसदों की बगावत का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि अब विधायकों की बगावत के कयास लगने लगे हैं। इस कयास को तब और बल मिला जब पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक से 4 बड़े नेता गायब रहे। हालाँकि, पार्टी ने इन विधायकों की गैरमौजूदगी को असमान्य नहीं बताया है, लेकिन सांसदों की बगावत के दौरान एकनाथ शिंदे का दिया वह बयान अब सुर्खियों में आ गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 'यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। आगे क्या होता है, इंतजार कीजिए।' तो अब सवाल उठने लगा है कि क्या 6 सांसदों के बाद अब विधायकों की बारी है?

उद्धव के क़रीबी भी बैठक से अनुपस्थित!

विधायकों को लेकर यह कयास तब तेज हुआ जब सोमवार को मुंबई में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की बुलाई गई बैठक से चार विधायक गायब रहे। इनमें कई विधायक वो हैं जो क़रीब चार साल पहले हुई बगावत के दौरान भी उद्धव ठाकरे के साथ खड़े रहे। इनमें से एक हैं कालिना सीट से विधायक संजय पोतनीस। पोतनीस शिवसेना यूबीटी के पुराने और अनुभवी चेहरे हैं। 2022 के फूट के समय उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ दिया था। वह 2014, 2019 और 2024 में तीन बार कालिना से विधायक चुने गए। मुंबई में पार्टी के लिए यह सीट बेहद अहम है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बैठक में न आने का कारण बताया कि कुछ जरूरी काम था।
ताज़ा ख़बरें
बैठक में नहीं पहुँचने वालों में एक और विधायक राहुल पाटील हैं। वह परभानी सीट से विधायक हैं। परभानी जिले में अभी काफी चर्चा है क्योंकि वहां के सांसद संजय जाधव भी शिंदे गुट में चले गए हैं। राहुल पाटील 2014 से लगातार इस सीट से विधायक हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के आनंद भारोसे को हराया था। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बैठक में न आने की वजह के तौर पर MLC चुनाव के नतीजे और उद्धव ठाकरे के परभानी दौरे की तैयारी को बताया।

'ज़रूरी काम के कारण अनुपस्थित'

इनके अलावा मुंबई लोकल अथॉरिटीज क्षेत्र से एमएलसी सुनील शिंदे भी बैठक में नहीं पहुँचे। पहले वो वरली सीट से विधायक थे। यह सीट अब आदित्य ठाकरे के पास है। 2022 के विभाजन में उन्होंने उद्धव ठाकरे का साथ दिया था। बैठक में नहीं आने का कारण उन्होंने अपने गृहनगर में कुछ ज़रूरी काम बताया। बैठक में नहीं शामिल होने वालों में वानी के विधायक संजय डेरकर भी हैं। वह पार्टी के नए चेहरे माने जाते हैं। 2024 के चुनाव में उन्होंने बीजेपी के तत्कालीन विधायक संजीवरेड्डी बोडकुरवार को 15000 से ज्यादा वोटों से हराकर बड़ी जीत दिलाई थी। विदर्भ में पार्टी के लिए यह जीत काफी अहम थी।

यूबीटी ने क्या कहा?

शिवसेना यूबीटी के नेताओं ने विधायकों की अनुपस्थिति को ज़्यादा नहीं तूल देने की बात कहते हुए बताया कि इन चारों की अनुपस्थिति सामान्य बात है। 

शिवसेना यूबीटी नेताओं का कहना है कि इन विधायकों ने बैठक में न आने का कारण पहले ही बता दिया था। नेताओं ने साफ़ कहा कि इसे सांसदों के जाने से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

सांसदों की फूट पर शिंदे बोले थे- 'अभी ट्रेलर है'

शिवसेना यूबीटी की ओर से जो भी बयान आए हों, लेकिन पार्टी के 6 सांसदों की बगावत पर शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने कहा था, 'यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। आगे क्या होता है, इंतजार कीजिए।' शिवसेना यूबीटी के इन सांसदों को शामिल किए जाने को लेकर मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एकनाथ शिंदे ने नए सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि यह उनकी पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, 'आज मेरे साथ एक नहीं, बल्कि छह बाघ मौजूद हैं। इस बार हमने राजनीतिक मैदान में छक्का लगाया है।'
शिंदे ने कहा, "ये लोकसभा सदस्य अब उस असली शिवसेना में शामिल हो गए हैं जो स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की सीख को मानती है। चार साल पहले मैंने एक बड़ा कदम उठाया था और अब मैंने 'छक्का' मारा है।" शिंदे ने कहा, "मैंने पहले ऐसा स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों और शिवसेना को बचाने के लिए किया था। अब, यह कदम शिवसेना के विस्तार का दूसरा चरण है।" एकनाथ शिंदे ने 2022 में उनके साथ आए 40 विधायकों की बगावत की याद दिलाते हुए कहा कि अब सांसदों का समर्थन भी उनकी राजनीति को नई ताकत देगा।

यूबीटी की मज़बूती पर सवाल

शिवसेना यूबीटी के लिए मुंबई अभी भी सबसे मज़बूत आधार बचा हुआ है और परभानी और विदर्भ जैसी जगहों पर पार्टी की मज़बूत पकड़ है। लेकिन अब बैठक से चार नेताओं के गायब रहने से पार्टी में अंदरूनी असंतोष की अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि पार्टी इसे सामान्य बताकर टाल रही है। अभी यह साफ़ नहीं है कि ये अनुपस्थिति सिर्फ संयोग है या पार्टी में कुछ और बड़े बदलाव के संकेत हैं। उद्धव ठाकरे और उनकी टीम इन नेताओं से बातचीत कर स्थिति साफ करने की कोशिश कर रही है। सांसदों के जाने के बाद पार्टी की एकजुटता बनाए रखना शिवसेना यूबीटी के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है।