महाराष्ट्र में एमवीए में क्या दरार बड़ी होने वाली है? शिवसेना यूबीटी की ओर से एनसीपी-एसपी पर भरोसे को लेकर सवाल उठे हैं, वहीं शरद पवार के राज्यसभा पहुँचने की प्रक्रिया चर्चा में क्यों है?
क्या महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी गठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं है और गठबंधन के साथियों में ही एक दूसरे पर भरोसा नहीं है? राज्यसभा चुनाव में शरद पवार की दावेदारी पर ही यह खुलकर सामने आ गया। हालांकि, शरद पवार राज्यसभा में तो पहुँच गए लेकिन उनकी वापसी आसान नहीं थी और इसके पीछे काफ़ी ड्रामा हुआ। उनके गठबंधन साथी कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के बीच इस पर पूरी तरह से सहमति नहीं थी। खासकर शिवसेना-यूबीटी के नेताओं ने एनसीपी-एसपी को 'भरोसेमंद साथी' नहीं बताया है। माना जा रहा है कि महा विकास अघाड़ी यानी एमवीए में दरारें बढ़ रही हैं।
शिवसेना-यूबीटी के कई नेताओं ने बताया कि उनकी पार्टी का मानना है कि एनसीपी-एसपी अब एमवीए में भरोसा करने लायक नहीं रही। वजह यह है कि एनसीपी-एसपी ने यह बात मानी थी कि वे अजित पवार गुट की एनसीपी के साथ मिलने की कोशिश कर रहे थे और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने की बात चल रही थी। इससे ठाकरे परिवार बहुत नाराज़ हो गया। उन्होंने फ़ैसला किया कि शरद पवार की राज्यसभा उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करेंगे।
यह बात शिवसेना यूबीटी के नेता लगातार कह रहे हैं। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना-यूबीटी के एक नेता ने कहा, 'सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल पिछले मंगलवार को उद्धव ठाकरे से मिलने आए थे। दो घंटे तक बातचीत हुई, लेकिन उद्धव ने शरद पवार का समर्थन करने से मना कर दिया। उद्धव ने कहा कि हम शरद पवार का सम्मान करते हैं, लेकिन राज्यसभा की यह सीट हमारी बारी है, इसलिए सेना अपना उम्मीदवार उतारेगी।'
आदित्य ठाकरे क्या मानते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार एक अन्य नेता ने बताया कि शुरू से ही हमने एनसीपी-एसपी और कांग्रेस को साफ़ कहा था कि यह सिर्फ़ एक राज्यसभा सीट की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे ने कई बार कहा है कि बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ सिर्फ़ शिवसेना-यूबीटी और कांग्रेस ही लड़ रही हैं। इंडिया गठबंधन में कौन-कौन शामिल है, इसकी साफ़ तस्वीर नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार नेता ने कहा, 'हम कांग्रेस को बता रहे थे कि जो पार्टियां गुपचुप मीटिंग करके सरकार में शामिल होने की बात करती हैं, उन्हें गठबंधन में जगह नहीं मिलनी चाहिए'।
इसके बाद एनसीपी-एसपी ने अपना रुख बदला और दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व को मनाने की पूरी कोशिश की। सुप्रिया सुले ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य बड़े नेताओं से बात की।
कांग्रेस को भी एनसीपी-एसपी की मिलने वाली बातों से नाराजगी थी और वे खुद भी इस सीट पर दावा कर रहे थे। लेकिन शरद पवार को नाराज नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने उनका समर्थन करने का ऐलान कर दिया।
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार शिवसेना-यूबीटी नेता ने कहा, 'तीनों पार्टियों के पास इतने वोट थे कि सिर्फ एक व्यक्ति को राज्यसभा भेज सकते थे। शिवसेना-यूबीटी को लगा था कि कांग्रेस उनका साथ देगी, खासकर जब आदित्य ने कहा था कि सिर्फ हम दोनों ही बीजेपी से लड़ रहे हैं। लेकिन जब कांग्रेस ने शरद पवार का समर्थन किया तो हम मुश्किल में पड़ गए। न अपने उम्मीदवार को अकेले जिता सकते थे, न कांग्रेस से अलग रुख ले सकते थे।'
ठाकरे परिवार में इस बात से बहुत ग़ुस्सा है कि शरद पवार को कैसे समर्थन मिला। जब नामांकन का मामला शरद पवार के पक्ष में तय हो गया तो आदित्य ठाकरे ने कहा, "मैं फिर से कहना चाहता हूं कि हम अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे थे। अफसोस है कि अब हमें 2028 तक अपना उम्मीदवार उतारने का मौका नहीं मिलेगा।'
एमवीए में दरार?
महाराष्ट्र में यह घटना एमवीए में बढ़ती दरारों को दिखाती है। राज्यसभा चुनाव में महाराष्ट्र से 7 सीटें थीं, लेकिन विपक्षी गठबंधन को सिर्फ़ एक सीट मिलने वाली थी। 9 मार्च को राज्यसभा की कई सीटों के लिए नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद देश भर से 26 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं। इनमें सात महाराष्ट्र से हैं। इन सातों में महा विकास अघाड़ी की ओर से शरद पवार और महायुति गठबंधन की ओर से रामदास आठवले सहित सात नाम हैं। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि यह गठबंधन की एकता के लिए चुनौती है।