बीएमसी चुनाव में बेशक बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। उसे शिवसेना (शिंदे) का समर्थन भी है, लेकिन इस गठबंधन को सत्ता में आने से रोका जा सकता है। इसी वजह से एकनाथ शिंदे ने अपने पार्षदों को तीन दिन तक बांद्रा के होटल में ठहरने को कहा है।
मुंबई में ब्रिहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिंदे गुट की शिवसेना) ने 227 सदस्यीय सदन में 118 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा (114) पार कर लिया है, लेकिन एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने डिफेक्शन या 'दलबदल' की आशंका के चलते अपने सभी 29 नवनिर्वाचित पार्षदों (नगर सेवक) को बांद्रा स्थित एक पांच सितारा होटल में शिफ्ट कर दिया है। हालांकि शिंदे के निर्देश और इस घटनाक्रम के दो मतलब निकाले जा रहे हैं। एक तो यही है कि वे शिवसेना यूबीटी को अपने पार्षदों को तोड़ने का मौका नहीं देना चाहते। दूसरा मतलब यह भी निकाला जा रहा है कि बीएमसी में शिंदे चूंकि किंगमेकर बन गए हैं तो वे बीजेपी से मोलभाव का इस्तेमाल इस मौके पर करना चाहेंगे।
यह कदम विपक्षी खेमे से 'पोचिंग' (लुभाने) की कोशिशों को रोकने के लिए उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, कई नवनिर्वाचित नगर सेवक पहले उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना यूबीटी) से जुड़े हुए थे, जिसके कारण पार्टी में असंतोष या वापसी की आशंका बनी हुई है। शिंदे गुट इसे 'धोखाधड़ी' से बचाव के तौर पर देखा जा रहा है।
बीएमसी में खेल पलटने का गणित क्या है
बीजेपी ने सबसे ज्यादा 89 सीटें जीती हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। शिंदे गुट की 29 सीटें महायुति के लिए किंगमेकर साबित हुई हैं, क्योंकि इनके बिना बहुमत नहीं बन सकता। दूसरी ओर, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) और सहयोगियों को करीब 96 सीटें मिली हैं- शिवसेना (यूबीटी) को 65, कांग्रेस को 24, एमएनएस को 6 और एनसीपी (एसपी) को 1। विपक्ष बहुमत से 18 सीटें दूर है, लेकिन अगर वे निर्दलीयों को साथ मिला लें या शिंदे गुट से किसी को तोड़ लें तो स्थिति पलट सकती है।
शिंदे गुट ने अपने नगरसेवकों को ताज लैंड्स एंड होटल (बांद्रा) में आने को कहा है, जहां वे पोस्ट-पोल मीटिंग्स, रणनीति और मेयर-डिप्टी मेयर जैसे पदों पर चर्चा करेंगे। यह कदम महाराष्ट्र की पुरानी 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' या 'हॉटल पॉलिटिक्स' की याद दिलाता है, जब पार्टियां विधायकों/पार्षदों को होटलों में रखकर उन्हें सुरक्षित रखती हैं। बांद्रा के होटल में शिंदे सेना के पार्षद तीन दिनों तक रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बीएमसी का नियंत्रण देश की सबसे अमीर म्युनिसिपल बॉडी होने के कारण काफी महत्वपूर्ण है। महायुति की जीत के बावजूद गठबंधन में नाजुक संतुलन है, और उद्धव ठाकरे गुट अब भी मुंबई में ठाकरे ब्रांड के जरिए मजबूत स्थिति में है। मेयर चुनाव अगले हफ्ते होने की संभावना है, ऐसे में होटल में ठहरे पार्षदों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
संजय राउत का संकेत
शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने एक बयान देकर इस तरफ इशारा किया है। राउत ने कहा- हमारे पास एक ऐसा फॉर्मूला है जिससे हम बीजेपी को बीएमसी में सत्ता में आने से रोक सकते हैं, लेकिन हम अभी ऐसा नहीं कर रहे हैं। राउत ने कहा- "भाजपा 'जयचंद' बनाकर चुनाव जीतती है। वरना भाजपा की ताकत क्या है? हर राज्य में, हर शहर में, वे हर पार्टी को तोड़कर 'जयचंद' खड़ा करते हैं और चुनाव जीतते हैं। उनकी ताकत शून्य है। उपमुख्यमंत्री (एकनाथ शिंदे) की ताकत क्या है? जब तक वे सत्ता में हैं, लोग उन्हें सलाम करेंगे; वरना लोग उनकी गाड़ियों पर जूते फेंकेंगे।"
बीएमसी के नतीजों पर राउत ने कहा, "मुख्यमंत्री के तौर पर उनके पास असीमित शक्ति है; उनके पास पुलिस है, कई अन्य लोग और संसाधन हैं, पैसा है, सब कुछ है। अगर कोई और मुख्यमंत्री होता, तो भी नतीजे वही होते। सबसे बड़ी लड़ाई मुंबई में थी। हमें यह नहीं मान लेना चाहिए कि मुंबई में भाजपा जीत गई। मुकाबला बराबरी का है। एमएनएस को कम सीटें मिलीं; मेरे हिसाब से उन्हें करीब 15 सीटें मिलनी चाहिए थीं। हम बहुत कम अंतर से 10 से 15 सीटें हार गए। लेकिन बीएमसी में विपक्ष की ताकत सत्ताधारी दल के बराबर है। हमारे 105 लोग अंदर हैं। ये लोग क्या करेंगे? ये मुंबई को बेच नहीं सकते। हम वहां डटे हुए हैं। चाहे हमें अपनी जान ही क्यों न देनी पड़े, हम इन ठेकेदारों के शासन को खत्म कर देंगे।"
शिवसेना यूबीटी प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस घटनाक्रम पर अपनी टिप्पणी में कहा कि आप जो बोते हैं, वही काटना पड़ता है। कभी एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को तोड़ा था, आज उन्हें अपने पार्षदों को होटल में रखकर संभालना पड़ रहा है।