टीसीएस नासिक यौन उत्पीड़न केस में पुलिस आरोपी निदा खान के पति से पूछताछ कर रही है। नौ एफआईआर में से एक में नामजद आरोपी, गर्भवती निदा खान नासिक की स्थानीय अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर करने वाली हैं। निदा खान अपने पति के साथ मुंबई में अपने घर में है। लेकिन पुलिस उन्हें अभी भी फरार बता रही है। शुक्रवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने उनकी पति से मुंब्रा में पूछताछ की। पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि निदा खान को ढूंढने के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। परिवार का दावा है कि निदा खान पति के साथ घर पर हैं।
नासिक के सहायक पुलिस आयुक्त संदीप मिटके, जो एसआईटी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा, “हमने निदा खान के पति को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की। उन्होंने एक पता बताया कि निदा किसी रिश्तेदार के यहां गई हुई हैं। हमने तुरंत पुलिस टीम भेजी, लेकिन घर बंद मिला। उनकी फोन भी स्विच ऑफ है। उनके रिश्तेदारों के फोन भी स्विच ऑफ हैं। अगर उनके पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो वे पुलिस के सामने क्यों नहीं आ रही हैं?” इस बीच टीसीएस ने इस मामले में शुक्रवार की रात को अपना बयान जारी किया था, जिससे पुलिस की कई बातों का खंडन हो गया है।

टीसीएस का इस मामले में बयान

टीसीएस की सीईओ और एमडी के. कृतिवासन ने कहा, “विस्तृत समीक्षा अभी जारी है, लेकिन नासिक यूनिट के सिस्टम और रिकॉर्ड की समीक्षा से पता चलता है कि हमें अपने दफ्तर में इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है, जैसा कि आरोप लगाए जा रहे हैं।” कंपनी ने आगे कहा कि निदा खान, जिनका नाम प्रेस में बार-बार टीसीएस की एचआर मैनेजर के रूप में लिया जा रहा है, न तो एचआर मैनेजर हैं और न ही भर्ती के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने प्रोसेस एसोसिएट के रूप में काम किया और कोई नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारियां नहीं संभालीं। वो मूल रूप से टेलीकॉलर थी। टीसीएस ने कहा कि उसने अध्यक्ष और सीओओ आरती सुब्रमण्यम के नेतृत्व में एक आंतरिक जांच की जा रही है, जिसमें डिलॉयट और लॉ फर्म ट्राइलीगल शामिल है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “टीसीएस की घटना बहुत गंभीर है; हम इसकी जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।”

क्या है पूरा मामला, कैसे शुरुआत हुई

यह मामला फरवरी में शुरू हुआ, जब बजरंग दल के कार्यकर्ता ने नासिक सिटी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसकी शिकायत उत्पीड़न या रेप के बारे में नहीं थी। वह टीसीएस नासिक की एक हिंदू महिला कर्मचारी के बारे में थी, जिसने रमज़ान के रोज़े रखना शुरू कर दिया था। इस पर नासिक पुलिस ने दावा किया कि उसने कथित प्रारंभिक जांच के नाम पर महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ के रूप में भेष बदलकर टीसीएस कार्यालय के अंदर हफ्तों तक तैनात किया। जहां वे कर्मचारियों पर नजर रखती रहीं। लेकिन पीड़िता ने 26 मार्च को देवकाली पुलिस स्टेशन में पहली FIR दानिश शेख के खिलाफ दर्ज कराई। इससे तमाम सवाल उठ खड़े हो गए हैं। टीसीएस ने आज तक इस बात की पुष्टि नहीं कि पुलिस ने उसके दफ्तर में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया था।

शिकायतों को दबाने का अधिकार वास्तव में किसके पास था?

इस मामले में निदा खान को मास्टरमाइंड कहा गया। पुलिस ने उन्हें HR प्रमुख बताया। आरोप लगाया कि निदा ने शिकायतों को दबाया, आरोपियों को बचाया और बीजेपी नेता बंदी संजय कुमार के अनुसार (बिना किसी स्थापित सबूत के) “कॉरपोरेट जिहाद” को अंजाम दिया। 
मीडिया ट्रायल में में निदा खान को “दबंग मैडम” बताया गया। लेकिन टीसीएस ने खुद पुलिस के जांचकर्ताओं को बताया और बीती रात लिखित बयान भी दिया कि निदा खान एक टेली-कॉलर थीं, HR प्रमुख नहीं। वह सेल्स विभाग में थीं और उनके ऊपर कम से कम तीन स्तर का मैनेजमेंट था। टीसीएस ने पुष्टि की कि उनका HR विभाग से कोई संबंध नहीं था। 

  • पहली FIR में उनके खिलाफ जो विशेष आरोप हैं, जो इस पूरे मामले की नींव है। वह यह है कि उन्होंने एक हिंदू देवी-देवता के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। यही उस “मास्टरमाइंड” के खिलाफ सबूत है। 

निदा पर बुर्का को बढ़ावा देने का आरोप है

निदा खान के तमाम फोटो जो पुलिस के जरिए सोशल मीडिया में आए, किसी भी फोटो में निदा खान बुर्के में नहीं है।  उनके सार्वजनिक जीवन से यह स्पष्ट भी है जो शख्स खुद उस ड्रेस कोड का पालन नहीं करता, उसके द्वारा उसे लागू कराने का आरोप कमजोर है। यह आरोप सबूत से ज्यादा सुर्खियों के लिए बनाया गया लगता है।

निदा पर हिजाब बढ़ावा देने का आरोप है, इसका मतलब क्या है?

निदा खान पर पुलिस ने हिजाब को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। लेकिन यह ऐसा आरोप है जो जुबानी तौर पर लगाया जाता है। इसके बारे में कोई सबूत नहीं पेश किया जाता। आमतौर पर गैर मुस्लिम महिलाएं भी तमाम वजहों से अपने सिर पर चुन्नी या दुपट्टा डालती हैं। जिसमें उनका सिर ढंका रहता है, सिर्फ थोड़ा सा चेहरा दिखता है। सारी मुस्लिम महिलाएं हिजाब भी नहीं पहनतीं। यह उनका अपना फैसला होता है, कोई संगठन या दल नहीं है जो उन पर हिजाब के लिए दबाव बनाता है।

“लव जिहाद” कहां है?

इस मामले में दानिश शेख मुख्य आरोपी है। पहली FIR दर्ज कराने वाली गैर मुस्लिम महिला से उसके संबंध थे। दफ्तर में कई लोगों को इसकी जानकारी थी। दोनों एक-दूसरे की धार्मिक पहचान कॉलेज में पढ़ाई करने के दौर से जानते थे। यह आरोप है कि दानिश ने अपनी शादीशुदा स्थिति छिपाई। अगर यह सही है, तो यह धोखा है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इसे समझाने के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश की जरूरत नहीं। लेकिन पुलिस इसे अंतरराष्ट्रीय साजिश बता रही है।

2022 से यह रैकेट चल रहा था, पुलिस बताए कितने लोग धर्मांतरण हुए? 

पुलिस कहना है कि चार साल से इस कथित योजना पर काम हो रहा था। इसमें सीधे मलेशिया से संपर्क की बात कही गई थी। यह भी आरोप है कि महिलाओं को नौकरी के बहाने मलेशिया भेजने की योजना थी, और उनके दस्तावेज लिए गए। ये गंभीर आरोप हैं। जांच होनी चाहिए। लेकिन सवाल यह है कि चार साल में कितनी महिलाओं को मलेशिया भेजा गया? सार्वजनिक रिकॉर्ड तो शून्य है। कितनों का धर्मांतरण हुआ? सार्वजनिक रिकॉर्ड बता रहा है कि सिर्फ एक महिला खुद से रोज़ा रखती थी। क्या दानिश से उसने शादी कर ली थी। पुलिस को सबूत तलाशने चाहिए। लेकिन टीसीएस नासिक में कितने लोगों का धर्म परिवर्तन इस कथित ग्रुप ने कराया तो पुलिस को उस बात को सार्वजनिक करना चाहिए।
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इस मामले में सीधी कहानी ये है कि मुख्य आरोपी दानिश के एक गैर मुस्लिम महिला से संबंध थे। रोज़ा रखे जाने पर उस महिला के घर वालों को जानकारी मिली। उन्होंने दानिश खान के बारे में पता लगाया। फिर उन्होंने बजरंग दल को सूचना दी। बजरंग दल ने नासिक पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा। नासिक पुलिस ने इसे फिल्मी जासूसी कहानी बना दी। नासिक में हाल ही में एक बाबा के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था। उसके सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के साथ संबंध थे। पुलिस ने उसके यहां से पोर्नोग्राफी वाले वीडियो बरामद किए। फोटो मिले। उस मामले को अब दबा दिया गया और नासिक टीसीएस की कहानी को मसाला लगाकर पुलिस आए दिन पेश कर रही है।