बीजेपी के समर्थक क्या अब 'अपने' लोगों को भी नहीं छोड़ेंगे? बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना के विधायक के मंदिर जाने के बाद कथित ‘गौमूत्र शुद्धिकरण’ को लेकर विवाद गहराया। एकनाथ शिंदे नाराज़ क्यों?
महाराष्ट्र में बीजेपी की ही सहयोगी शिवसेना के एक विधायक के मंदिर जाने पर बड़ा विवाद हो गया। दक्षिणपंथी समूह के लोगों ने विधायक के लौटने के बाद मंदिर को कथित तौर पर गौमूत्र से शुद्धिकरण किया। इसके बाद बीजेपी सरकार में शामिल और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस व्यवहार पर नाराज़गी जताई है। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और इसकी निंदा की है।
यह घटना छत्रपति संभाजीनगर जिले के सिल्लोड तहसील में हुई। रहीमाबाद गांव के नागेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन शिवसेना का शिंदे गुट के विधायक अब्दुल सत्तार ने भगवान शिव के मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और भगवान शिव को प्रणाम किया। लेकिन उनके जाने के तुरंत बाद कुछ स्थानीय युवकों ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सत्तार मांसाहारी हैं और गैर-शाकाहारी भोजन खाते हैं, इसलिए उनका मंदिर में जाना मंदिर को अपवित्र कर गया है।
इसके बाद इन युवकों ने मंदिर परिसर में गौमूत्र छिड़ककर मंदिर को फिर से 'शुद्ध' करने का दावा किया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इससे काफी बवाल मचा। राजनीतिक पार्टियों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
एकनाथ शिंदे ने क्या कहा?
राज्य के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख एकनाथ शिंदे ने इस घटना पर बात की। उन्होंने कहा, 'यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अब्दुल सत्तार एक चुने हुए विधायक हैं। वे देशभक्त हैं और इस देश से बहुत प्यार करते हैं। लोगों का ऐसा करना ठीक नहीं है।'
शिंदे ने साफ़ कहा कि सत्तार उनके विधायक हैं और पार्टी के साथ हैं। उन्होंने इस तरह के काम की निंदा की और कहा कि यह ठीक नहीं है।
बीजेपी ने क्या कहा
सिल्लोड भाजपा इकाई के प्रमुख मनोज मोरेल्लू ने कहा कि उनके कार्यकर्ताओं ने गौमूत्र छिड़ककर मंदिर की पवित्रता बहाल की। उनका दावा है कि सत्तार के आने से धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं, इसलिए ऐसा करना ज़रूरी था। दक्षिणपंथी समूहों ने भी सत्तार के मंदिर में प्रवेश का विरोध किया था।
अब्दुल सत्तार कौन हैं?
अब्दुल सत्तार सिल्लोड से चार बार के विधायक हैं। वे 2009 से महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य हैं। राजनीति की शुरुआत उन्होंने 1980 के दशक में जमीनी स्तर पर की थी। पहले वे कांग्रेस में थे, लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवसेना में आ गए। उद्धव ठाकरे सरकार में वे राज्य मंत्री रहे। 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद वे एकनाथ शिंदे के साथ आ गए और महायुति सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बने थे।वे मराठवाड़ा क्षेत्र में काफ़ी चर्चित और विवादास्पद नेता हैं। उनकी खुलकर बोलने की आदत के कारण भाजपा नेताओं और दक्षिणपंथी समूहों से अक्सर टकराव होता रहता है, भले ही वे सत्ताधारी गठबंधन में हों।
बहरहाल, इस घटना पर अब्दुल सत्तार की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ धार्मिक भावनाएं, दूसरी तरफ राजनीतिक गठबंधन और एकता की बातें। लोग सोशल मीडिया पर अपनी राय दे रहे हैं।