महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का निधन राज्य की राजनीति के लिए बहुत बड़ा झटका तो है ही, अब बड़ा सवाल भी खड़ा कर रहा है कि एनसीपी का क्या होगा? पार्टी को कौन संभाल सकता है? एनसीपी के दोनों गुट क्या अब मर्ज होंगे या फिर अजित खेमे की एनसीपी में ही टूट फूट की कोशिश भी होगी?

इन सवालों के जवाब ढूंढने से पहले यह जान लें कि अजित पवार कितने बड़े नेता थे। अजित एनसीपी के सबसे मज़बूत नेता थे और पार्टी उनके इर्द-गिर्द ही घूमती थी। वह 66 साल के थे। वे महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक डिप्टी चीफ मिनिस्टर रहे। उन्होंने कई सरकारों में काम किया। चाहे वह कांग्रेस-एनसीपी की सरकार हो या फिर उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की। 2023 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर एनसीपी का बड़ा हिस्सा अपने साथ ले लिया और बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) के साथ महायुति सरकार में शामिल हुए। चुनाव आयोग ने उनके धड़े को आधिकारिक एनसीपी का नाम और सिंबल दिया।

पवार परिवार का एकजुट होना कितना आसान?

अभी हाल ही में संकेत मिल रहे थे कि अजित पवार और शरद पवार के धड़े एक हो सकते हैं। लोकल बॉडी चुनावों में दोनों ने कुछ जगहों पर साथ मिलकर लड़ा। दिसंबर में अजित पवार ने कहा था कि 'परिवार एक हो गया है'। लेकिन अब उनकी मौत से यह सब ठप हो गया लगता है। एनसीपी के भविष्य पर कई सवाल उठ रहे हैं। एनसीपी के दो धड़े एक होंगे या नहीं? अजित पवार के धड़े में 41 विधायक हैं, जो महायुति सरकार का मजबूत सहारा हैं। अगर धड़े टूटे तो सरकार पर असर पड़ सकता है, लेकिन महायुति के पास बहुमत है। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) मजबूत हैं, लेकिन एनसीपी के विधायकों में बगावत या टूट की आशंका से राजनीति में हलचल मच सकती है।

विपक्षी एनसीपी (एसपी) में शरद पवार, सुप्रिया सुले और रोहित पवार जैसे नेता हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि अजित पवार के निधन से परिवार एक हो सकता है, लेकिन यह आसान नहीं होगा।

कौन संभालेगा एनसीपी को?

अजित पवार की पार्टी उनके व्यक्तित्व पर टिकी थी। अब कोई स्पष्ट दूसरा नेता नहीं दिखता। अब उनके जाने के बाद उनकी पार्टी और परिवार में कई चेहरे हैं। उकी पत्नी और बेटे के अलावा पार्टी में कई नेता भी मुख्य दावेदार हैं।

सुनेत्रा पवार

उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार राज्यसभा सांसद हैं। बारामती में सामाजिक काम करती हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ीं लेकिन हार गईं। उनके पास परिवार का भावनात्मक समर्थन है और बारामती का गढ़ भी है। लेकिन राजनीतिक अनुभव कम है। वे सिंबॉलिक लीडर बन सकती हैं।

पार्थ पवार

अजित के बड़े बेटे पार्थ पवार 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए। राजनीति से दूर हो गए थे। नाम से फायदा है लेकिन अभी मजबूत बेस नहीं। लंबे समय में संभावना हो सकती है। उनका छोटा बेटा जय पवार राजनीति से दूर हैं और बिजनेस में ज्यादा सक्रिय है। वह सार्वजनिक जीवन में कम ही सक्रिय रहे हैं।

प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल

प्रफुल पटेल एनसीपी के पुराने और अनुभवी नेता हैं। दिल्ली में उनके अच्छे संबंध हैं। पार्टी को एक साथ रखने में मदद कर सकते हैं। लेकिन माना जाता है कि वह मास लीडर नहीं हैं। अंतरिम लीडर बन सकते हैं।

सुनील तटकरे महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष हैं। उनका कोंकण में मजबूत बेस है और संगठन संभालने में वह अच्छे हैं। लेकिन पूरे राज्य में उनका प्रभाव कम ही है। छगन भुजबल और धनंजय मुंडे ओबीसी नेता हैं। दोनों राज्य में लोकप्रिय हैं, लेकिन वे विवादों में रहे। वे सपोर्टिंग रोल में रह सकते हैं।

एनसीपी में परिवार, पुराने दोस्त और क्षेत्रीय नेता के बीच संघर्ष हो सकता है। कई विधायक अजित पवार के वफादार थे, अब कोई उन्हें एकजुट रख पाएगा या नहीं, यह बड़ा सवाल है।

क्या एनसीपी के दोनों गुट मिलेंगे?

अभी तक अजित पवार गुट ज़्यादा मजबूत है। उनके पास 41 विधायक और 1 लोकसभा सांसद हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में दोनों गुटों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। दिसंबर में अजित पवार ने कहा था कि पिंपरी-चिंचवड़ में दोनों गुट साथ लड़ेंगे और 'परिवार फिर से एक हो गया है'। यानी उन्होंने दोनों गुटों के एकजुट होने का संकेत दिया था।
शरद पवार अपनी राज्यसभा की अवधि खत्म होने के बाद रिटायर होने की बात कह चुके हैं। शरद पवार के अलावा एनसीपी के दो मुख्य चेहरे थे- अजित पवार और सुप्रिया सुले। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को दिल्ली में एनसीपी का चेहरा माना जाता है। अगर दोनों गुट मिल जाते हैं तो सुप्रिया सुले पार्टी का मुख्य चेहरा बनतीं। हालाँकि, रोहित पवार भी एक चेहरा हैं जो पवार के परिवार से ही हैं। लेकिन अब अजित पवार नहीं हैं। तो अब नये सिरे से सवाल उठने लगे हैं कि क्या अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा और उनके बेटे पार्थ सुप्रिया सुले को नेता स्वीकार करेंगे? क्या सुप्रिया सुले और रोहित उन दोनों में से किसी को नेता स्वीकार करेंगे?

अजित पवार की मौत से महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। एनसीपी का भविष्य अनिश्चित है। पार्टी टूट सकती है, एक हो सकती है या नया चेहरा उभर सकता है। आने वाले दिनों में ही यह साफ़ हो पाएगा।