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प्रणय राॅय को विदेश जाने से रोकना क्या मीडिया के लिए चेतावनी है?

एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय राॅय और उनकी पत्नी राधिका राॅय को विदेश जाने से रोका जाना क्या मीडिया के लिए चेतावनी है कि या तो आप पीछे-पीछे चलें या नतीजे भुगतें? एनडीटीवी प्रबंधन ने ये आरोप क्यों लगाए?

दोनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के बाद एनडीटीवी ने ये आरोप तब लगाए जब प्रणय राॅय और उनकी पत्नी राधिका राॅय काे शुक्रवार काे मुंबई एयरपाेर्ट पर विदेश जाने से राेक दिया गया। एनडीटीवी प्रबंधन ने कहा, ‘बुनियादी अधिकारों का पूरी तरह उल्लंघन करते हुए एनडीटीवी के संस्थापकों राधिका और प्रणय रॉय को आज देश से बाहर जाने से रोक दिया गया। मीडिया को लगातार शर्मनाक ढंग से यह चेतावनी है कि पूरी तरह दंडवत होने से कम उन्हें कुछ भी मंज़ूर नहीं है। उन्हें एक सप्ताह बाहर रहना था और 15 तारीख़ को उनकी वापसी का टिकट था।’ हालाँकि सीबीआई अधिकारियों ने लुकआउट सर्कुलर के आधार पर रोके जाने की कार्रवाई बताई है। 

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‘द क्विंट’ के अनुसार, दिल्ली में सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि आईसीआईसीआई बैंक से जुड़े कथित धोखाधड़ी से संबंधित मामले में जून में दोनों के ख़िलाफ़ सावधानी के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि दोनों को इसी नोटिस के आधार पर देश छोड़ने से रोका गया है। बता दें कि कथित बैंक धोखाधड़़ी मामले में दो साल पहले एनडीटीवी के मालिक रॉय के ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की थी।

हाल के दिनों में लगातार ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि मीडिया को अलग-अलग तरीक़ों से दबाया जा रहा है। मीडिया को काम करने की वैसी आज़ादी नहीं है जैसी एक स्वस्थ लोकतंत्र में होनी चाहिए। यह बात कई आधार पर कही जाती रही है। हाल ही में ऐसी रिपोर्टें आई हैं कि मीडिया कर्मियों पर हमले की घटनाएँ बढ़ी हैं। इससे पहले ऐसी ही चर्चा वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी और अभिसार शर्मा के नौकरी से निकाले जाने के समय भी थी।

तो इस पूरे मामले में एनडीटीवी प्रबंधन के इन आरोपों में कितना दम है कि यह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है? चैनल ने यह आरोप क्यों लगाया कि या तो मीडिया पीछे चले या नतीजे भुगते? 

फ़र्ज़ी केस का आरोप

एनडीटीवी का कहना है कि ‘उनको एक ऐसे फ़र्ज़ी और बेबुनियाद भ्रष्टाचार के मामले को आधार बना कर रोका गया है जो सीबीआई ने दो साल पहले उनकी कंपनी आरआरपीआर द्वारा आईसीआईसीआई बैंक से लिए गए एक लोन को लेकर दर्ज किया था जो समय से पहले सूद समेत पूरी तरह वापस कर दिया गया था।’ 

हालाँकि, सीबीआई ने मामले में दो जून 2017 को प्राथमिकी दर्ज करने के बाद बयान में कहा था कि वह क़र्ज़ चुकाने की जाँच नहीं कर रही है बल्कि भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों, सेबी के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन और आईसीआईसीआई बैंक की ओर से कंपनी के क़र्ज़ पर ब्याज दर में कमी की जाँच कर रही है। सीबीआई के अनुसार, इसके कारण बैंक को कथित रूप से 48 करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ था।

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हाई कोर्ट में मामला लंबित

न्यूज़ चैनल ने बयान में कहा कि इस मामले को एनडीटीवी के संस्थापकों और उनकी कंपनी द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई जहाँ यह मामला दो साल से लंबित है। एनडीटीवी प्रबंधन ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने कार्रवाई के बारे में न तो अदालत को जानकारी दी जहाँ यह मामला लंबित है और न ही रॉय दंपति को। 

चैनल की ओर से दावा किया गया कि इस मामले में राधिका और प्रणय रॉय पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और वे लगातार देश से बाहर आते-जाते रहे हैं तो ये संकेत देना हास्यास्पद है कि उनका बाहर जाना ख़तरनाक हो सकता है। एनडीटीवी ने कहा कि दाेनाें काे एक सप्ताह बाहर रहना था। 15 अगस्त काे वापसी का टिकट बुक था।

बता दें कि इससे पहले जून महीने में सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) ने एनडीटीवी के तीन प्रोमोटर्स को सिक्योरिटीज मार्केट में दो साल के लिये प्रतिबंधित कर दिया था। इन प्रोमोटर्स में प्रणय रॉय, राधिका रॉय और इन दोनों की कंपनी आरआरपीआर होंल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल है। सेबी ने रॉय और राधिका रॉय को दो साल तक कंपनी के निदेशक मंडल या शीर्ष प्रबंधन में किसी भी तरह की भूमिका से भी प्रतिबंधित कर दिया। सेबी के फ़ैसले पर प्रणय और राधिका ने कहा था कि सेबी का आदेश ग़लत आकलन पर आधारित है। 

एनडीटीवी के ख़िलाफ़ मामला हाई कोर्ट में लंबित है, इसलिए जब तक फ़ैसला न आ जाए तब तक लगता है न तो ऐसी कार्रवाई रुकेगी और न ही आरोप-प्रत्यारोप लगना। स्थिति जो भी हो, नुक़सान मीडिया का तो हो ही रहा है।

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