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फ़ोटो साभार: ट्विटर/@iamAhmadshahzad

साइमंड्स ने फर्स्ट क्लास मैच में जड़ दिए थे रिकॉर्ड 20 छक्के!

2007 में टी-20 वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल मुकाबला। भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया। रॉबिन उथप्पा बल्लेबाज़ी कर रहे थे और कवर प्वाइंट में वो एक शॉट खेलते हैं, साइमंड्स उस पर झपट्टा मारते हैं लेकिन गेंद उनके हाथ से फिसल जाती है। उथप्पा एक रन चुराने का दुस्साहस करते हैं, दुस्साहस शब्द का इस्तेमाल यहाँ इसलिए किया जा रहा है कि आधुनिक दौर में जोंटी रोड्स, हर्शेल गिब्स, रिकी और रिकी पोटिंग की ही तरह साइमंड्स भी चीते की फुर्ती से रन आउट और वो भी सीधे हिट से करने में महारथ हासिल कर चुके थे।

उथप्पा को पलक झपकते ही अपनी ग़लती का एहसास होता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और साइमंड्स ने कवर प्वाइंट से ऐसा निशाना साधा कि मिडल स्टंप उड़ चुका था। विशालकाय शारीरिक कद-काठी वाले इस ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने इससे पहले के मौकों पर रोड्स के अंदाज़ में हवा में गोता लगाते हुए कितने दिग्गजों को पवेलियन की राह दिखा दी थी। यक़ीन नहीं आता है तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के इस वीडियो पर नज़र डाल लें।

लेकिन, क्रिकेट की दुनिया साइमंड्स को याद करने के समय उनकी फील्डिंग या फिर उनकी गेंदबाज़ी को य़ाद नहीं करेगी। हमें नहीं भूलना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 165 विकेट हासिल करना भी अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। लेकिन, महज आंकड़ों से भला साइमंड्स जैसे खिलाड़ियों का सही आकलन कैसे हो पायेगा? अगर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोटिंग सिर्फ आंकड़ों को ही आधार मानते तो वो भला साइमंड्स को 2003 की वर्ल्ड कप टीम में अपनी ज़िद पर क्यों ले जाते? उस टूर्नामेंट से पहले तक पिछले 5 सालों के दौरान साइमंड्स ने क़रीब 50 वन-डे खेले थे और उनका औसत 25 के पास भी नहीं पहुंचा था। ऐसे आँकड़ों से आप बांग्लादेश और ज़िम्बाब्वे जैसी टीमों के साथ कई मौके हासिल कर सकते हैं लेकिन महा-पराक्रमी ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथ तो आपको दोबारा मौक़े भी नहीं मिलते।  

लेकिन, कंगारु भी जानते थे कि साइमंड्स ख़ास थे। आख़िर यूँ ही कोई खिलाड़ी सिर्फ़ 20 साल की उम्र में किसी फर्स्ट क्लास मैच में वर्ल्ड रिकॉर्ड 20 छक्के तो नहीं लगा देता!  काउंटी क्रिकेट में ग्लोस्टरशॉर के साथ खेलते हुए ग्लोमरगन के खिलाफ 254 रनों की पारी ने आने वाले वक्त के दिग्गज की झलक दे दी थी। बावजूद इसके साइमंड्स के लिए आगे का सफर आसान नहीं होकर काफी मुश्किल वाला रहा।

साइमंड्स की समस्या ये रही कि वो बहुत ईमानदार थे। ईमानदार का मतलब है कि वो जो मन में होता, उसको वो साफ साफ सबके सामने कह देते। उनके सोच और रवैये में कबीलाई संस्कृति की स्वच्छंदता थी जो आधुनिक ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति वाले ड्रेसिंग रुम में कई मौके पर बेमेल हो जाती। शायद यही वजह रही हो कि एक समय घनिष्ठ मित्र रह चुके पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क के साथ साइमंड्स की दोस्ती टूट गयी। 
साइमंड्स के अहम को उस वक्त भी बहुत ठेस लगी जब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने हरभजन सिंह के साथ मंकी-कांड के दौरान उनका भरपूर साथ नहीं दिया और भारत के आगे घुटने टेक दिये।

मामले को जैसे तैसे रफा-दफा करने वाली बात ने साइमंड्स का दिल दुखाया और भारत के प्रति उनकी नाराज़गी भी बढ़ी।

लेकिन, वक्त ने ऐसा मोड़ लिया कि उसी भारत ने आईपीएल 2008 में साइमंड्स की एंट्री करवाई और सिर्फ कुछ हफ्ते क्रिकेट खेलने के लिए उन्हें करोड़ों रुपये भी मिले। वो हरभजन के साथ न्यूज़ चैनल में एक्सपर्ट की भूमिका में दिखने लगे तो बिग बॉस में भी आने से वो नहीं हिचकिचाये। लेकिन, साइमंड्स हकीकत में शांत रहने वाले और अपनी ही दुनिया में मस्त रहने वाले एक बिंदास शख्सियत थे। उन्हें पूराने तरीके से क्रिकेट खेलना और उसके बाद बिना सुपर स्टार छवि वाली ज़िंदगी जीना ज़्यादा पसंद था। लेकिन, वो ऐसा कर नहीं सकते थे क्योंकि उनके बोर्ड ने साइमंड्स को समाज के एक खास लोगों के लिए हीरो के तौर पर उभारने की कोशिश की थी। साइमंड्स हमेशा ही इस बात से सहज नहीं दिखते थे और कई मौकों पर उन्होंने पूर्व कोच जॉन बुकानन ने इस बात को साझा किया था कि उन्होंने आधुनिक क्रिकेट के तौर-तरीके को देखते हुए घुटन सी महसूस होती है।

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ऐसा लगा कि रिटायरमेंट के बाद साइमंड्स एक नई पारी की शुरुआत कर चुके हैं। उनकी शादी हो चुकी थी और वैवाहिक जीवन में उनके साथ एक बेटे और बेटी भी उनके जीवन में खुशियां बिखेर रहे थे। सोशल मीडिया पर साइमंड्स की आख़िरी पोस्ट उनके इंस्टाग्राम एकाउंट पर था जहां पर उन्होंने अपने साथी शेन वार्न के निधन पर शोक व्यक्त किया था। भला ये कौन सोच सकता था कि कुछ ही हफ्ते बाद पूरी दुनिया उनके असामयिक निधन पर सोशल मीडिया में अपनी संवेदनाओं का इज़हार करेगी। वेस्टइंडीज़ के पूर्व दिग्गज ब्रायन लारा के लिए ये बेहद हैरान करने वाली बात रही क्योंकि कुछ ही घंटों पहले उनकी साइमंड्स से मैसेज पर बात-चीत हुई थी।

साइमंड्स का अचानक दुनिया को छोड़कर जाना एक बार फिर से महान क्रिकेट लेखक पीटर रॉबक के एक वाक्य को कानों में फिर से दोहरा रहा है। मानव जीवन की अनिश्चितताओं पर टिप्पणी करते हुए रोबक ने एक बार लिखा था कि ‘जिंदगी में हर बात सिर्फ एक धागे की मज़बूती से ही टिकी रहती है। कोई नहीं जानता है कि वो धागा कब टूट जाए।’ क्रिकेट और दुनिया के साथ साइमंड्स के प्यार और दुलार का बंधन शायद वैसे ही धागे से जुड़ा था जो शनिवार रात को कार दुर्घटना में टूट गया और इसके चलते पूरी दुनिया इस मायूस ख़बर से टूटती दिख रही है।

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क़मर वहीद नक़वी
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