ओडिशा के धेंकानाल जिले में एक पादरी के साथ मारपीट हुई है। पादरी बिपिन बिहारी नाइक पर हिंदुत्ववादी समूह के लोगों ने हमला किया। उन्हें पीटा गया, गोबर खाने पर मजबूर किया गया, चप्पलों की माला पहनायी गयी और 'जय श्री राम' का नारा लगवाने की कोशिश की गई। यह घटना 4 जनवरी को हुई थी, लेकिन अब यह ख़बर सामने आई है। रिपोर्ट है कि इस घटना के दो हफ्ते बाद भी इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। इतने बड़े सदमे से गुज़रने के बावजूद पादरी नाइक ने अब माफ़ी देने की बात कही है। कैथोलिक कनेक्ट से बातचीत में बुधवार को पादरी ने कहा कि उन्होंने उन लोगों को माफ़ कर दिया है जिन्होंने उन पर हमला किया और उन्हें अपमानित किया।

यह घटना धेंकानाल जिले के परजंग गांव में हुई। पादरी बिपिन बिहारी नाइक अपनी पत्नी और कुछ अन्य लोगों के साथ एक घर में प्रार्थना सभा कर रहे थे। वहाँ सात परिवारों के लोग प्रार्थना में शामिल थे। अचानक करीब 40 लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा हो गई और जबरदस्ती अंदर घुस गई।
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भीड़ ने घर में मौजूद सभी लोगों को पीटना शुरू कर दिया। मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार पादरी की पत्नी वंदना ने बताया, 'हमारे बच्चे और मैं किसी तरह घर से निकलकर एक संकरी गली से होते हुए नजदीकी पुलिस स्टेशन की तरफ भागे।' आरोप है कि गुहार लगाने के बावजूद पुलिस तुरंत मदद करने नहीं आई।

पादरी पर हमला

रिपोर्ट के अनुसार बजरंग दल के सदस्यों ने पादरी बिपिन को बाहर खींचकर लाठी-डंडों से पीटा। उनके चेहरे पर लाल सिंदूर मल दिया गया। उन्हें चप्पलों की माला पहनाई गई और पूरे गांव में घुमाया गया। फिर उन्हें गांव के हनुमान मंदिर में ले जाकर एक रॉड के पीछे दोनों हाथ बांध दिए गए। भीड़ ने उन्हें गोबर खाने पर मजबूर किया। वे खून से लथपथ हो गए थे। भीड़ ने उन्हें थप्पड़ मारे और बार-बार 'जय श्री राम' लगाने को कहा।

मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार वंदना ने कहा, 'मेरे पति बहुत बुरी तरह घायल थे। लोग उन्हें पीटते रहे और गोबर मुंह में ठूंसते रहे।' पुलिस के आने के बाद भी भीड़ तुरंत नहीं रुकी। काफ़ी देर बाद आखिरकार पादरी को बचाकर पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार एक सोशल एक्टिविस्ट ने आरोप लगाया कि पुलिस स्टेशन में पादरी को क़रीब एक घंटे तक बिना किसी मेडिकल मदद के बैठाया गया और उनकी चोटों का इलाज नहीं किया गया।

धर्मांतरण का आरोप

परजंग गांव में ज्यादातर लोग हिंदू हैं। यहां सिर्फ सात ईसाई परिवार रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार भीड़ का आरोप था कि पादरी जबरदस्ती धर्मांतरण करा रहे थे। पुलिस ने इस घटना पर शिकायत दर्ज की है, लेकिन पादरी के खिलाफ भी एक काउंटर एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें उन पर जबरदस्ती धर्मांतरण का आरोप लगाया गया है।

पादरी के भाई उदय नाइक ने 'कैथोलिक कनेक्ट' से कहा कि जब स्थानीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो उन्होंने करीब 45 ईसाई लगों को साथ लेकर पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत देने गए। लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला पहले से तय था, अगर पुलिस समय पर पहुंचती तो भाई को हमले से बचाया जा सकता था।
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पीड़ित पादरी ने दी माफ़ी!

इस बीच अब पादरी नाइक ने माफ़ी का रास्ता चुना है। नाइक ने 'कैथोलिक कनेक्ट' से बातचीत में कहा, 'ग्राहम स्टेन की शहादत की बरसी पर मैं माफ़ी चुनता हूं। जिन लोगों ने मुझे मारा, अपमानित किया और झूठे आरोप लगाए, मैं उन्हें माफ करता हूं। हमारा परमेश्वर हमें बिना शर्त माफ करता है और हमें भी माफ करने की सीख देता है। उसी भावना में मैं उन्हें माफ करता हूं और सब कुछ परमेश्वर पर छोड़ता हूँ।'

बहरहाल, इस हमले के बाद गाँव के सातों ईसाई परिवार डर के साये में हैं। उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। कई रिपोर्टों में कहा गया है कि देशभर में ईसाई समुदाय पर ऐसे हमले बढ़ रहे हैं।

यह घटना धार्मिक स्वतंत्रता, भीड़ के हिंसा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोग और संगठन न्याय की मांग कर रहे हैं। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी की खबर नहीं है।