loader
फ़ोटो साभार: पुष्कर राजन व्यास

न्यूनतम समर्थन मूल्य क्यों किसानों के लिये ज़रूरी है!

भारत सरकार ने कहा है कि वह एमएसपी को बनाए रखेगी। लेकिन मौखिक या लिखित आश्वासन का मतलब कुछ भी नहीं है, क्योंकि वे बाध्यकारी नहीं हैं। एमएसपी को एक क़ानूनी जामा पहनाना चाहिये, जिसमें एमएसपी से नीचे खरीदने वाले व्यापारियों के लिए दंड का प्रावधान होI
जस्टिस मार्कंडेय काटजू

भारत में आंदोलनकारी किसान अपने कृषि उत्पादों के लिए एमएसपी की माँग कर रहे हैं। इस माँग पर विचार करने की आवश्यकता है।

दुनिया के लगभग हर देश में कृषि पर सब्सिडी दी जाती है। 

ऐसा क्यों है कि कृषि को सब्सिडी देने की आवश्यकता होती है और सामान्य उद्योगों की तरह इसे बाज़ार के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता?

इसका उत्तर यह है कि कृषि अन्य उद्योगों की तरह नहीं है। यह भोजन का उत्पादन करता है, जो हवा और पानी की तरह, अस्तित्व के लिए बिल्कुल अनिवार्य है। एक टीवी सेट, कार या रेफ्रिजरेटर की कमी के बिना, ज़िंदगी असुविधाजनक तो हो सकती है, असंभव नहीं। लेकिन कोई भी भोजन के बिना नहीं जी सकता। स्टील, सीमेंट आदि का उपयोग अन्य उद्योगों द्वारा किया जाता है, लेकिन भोजन का सेवन मानव शरीर द्वारा किया जाता है, और इसके बग़ैर ज़िंदगी निर्वाह करना लगभग नामुमकिन हो जायेगा।

ख़ास ख़बरें

आधुनिक उद्योग के आने के बाद जनसंख्या में बहुत वृद्धि हुई। इसके साथ खाद्य उत्पादन में भारी वृद्धि की आवश्यकता महसूस हुई। किसानों के लिए समस्या यह थी कि वे स्वयं अपने उत्पादों की तो ख़रीद नहीं कर सकते थे, उन्हें व्यापारियों पर निर्भर रहना पड़ता था। ये व्यापारी खेतों में पैदा हुई चीज़ों को बेचने के लिए गाँव से शहरों तक ले जाते थे, जो इन्हें थोक व्यापारियों को बेच देते थे और ये थोक व्यापारी इन्हें फुटकर व्यापारियों को बेचते थे और तब आम ग्राहक इन्हें खरीदते थेI 

किसान अक्सर इन व्यापारियों की दया पर निर्भर था, और जो भी क़ीमत की पेशकश की गई थी उसे स्वीकार करना पड़ता था, अन्यथा उनकी उपज को बेचा नहीं जा सकता था। इस वजह से खेती ग़ैरलाभकारी बना दी गयी। इसीलिए किसानों और किसानी के लिए सरकार का सहयोग आवश्यक हो गया था, अन्यथा किसान खेती छोड़ देते, और फिर देश के बड़े हिस्से के भूखे रह जाने का संकट खड़ा हो जाता।
अतः 135 करोड़ की हमारी विशाल जनसंख्या को खिलाने के लिए कृषि उत्पादन के लिए एमएसपी अत्यंत आवश्यक है।
वीडियो में देखिए, किसानों को कम आँकना क्यों ख़तरनाक?

भारत सरकार ने कहा है कि वह एमएसपी को बनाए रखेगी। लेकिन मौखिक या लिखित आश्वासन का मतलब कुछ भी नहीं है, क्योंकि वे बाध्यकारी नहीं हैं। एमएसपी को एक क़ानूनी जामा पहनाना चाहिये, जिसमें एमएसपी से नीचे खरीदने वाले व्यापारियों के लिए दंड का प्रावधान होI  

3 किसान क़ानून हाल ही में संसद द्वारा पास किए गए हैं, जिसमें  महत्वपूर्ण दोष यह है कि जहाँ किसान अपनी उपज को कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उसे क़ानूनन एमएसपी का संरक्षण नहीं है। 

सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए


गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

विचार से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें