विरोध-प्रदर्शन।
अनेक अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने जब आर्थिक कामकाज और प्रदर्शन पर भारत की रेटिंग गिरानी शुरू की तो इस बार संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण में बाजाप्ता इस बात की शिकायत की गई है कि हमारी आर्थिक स्थिति जैसी है वह बाहर की रेटिंग में क्यों प्रदर्शित नहीं होती। कई लोग मानते हैं कि सरकारी आँकड़े कुछ भी कहें दुनिया उसे मान ले यह ज़रूरी नहीं।
ख़ुद को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और नरेंद्र मोदी को सबसे लोकप्रिय नेता कहने वाले मुल्क की सरकार के लिए यह रेटिंग किसी तमाचे से कम नहीं है।
पिछले दिनों जब फ्रेजर इंस्टीट्यूट ने एक भारतीय एनजीओ के साथ मिलकर ग्लोबल इकोनॉमिक फ्रीडम की रैंकिंग की थी तब उसमें भी भारत 79वें स्थान से गिरकर 105वें पर पहुँच गया था।