ओलंपिक का महासमर समाप्त हो चुका है। भारत ने 4 कांस्य, दो रजत और एक स्वर्ण सहित कुल सात पदक अपनी झोली में भरे हैं।
जाधव के दांव-पेच और उनके पराक्रम के बारे में जानकर गर्व से छाती चौड़ी हो गयी हो तो ये भी जान लीजिये उनका अंतिम समय तंगहाली और मुफ़लिसी में बीता और आज उनका परिवार गुमनामी में जी रहा है।
तो सवाल ये खड़ा होता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीने पर तिरंगा लगाये खिलाड़ियों का भविष्य क्या तभी सुरक्षित रहेगा जब वो ओलंपिक या राष्टमंडल मेडल लाएंगे? बिना ओलंपिक पदक जीते इन खिलाड़ियों के पास इतने पैसे भी नहीं होते कि वे एक सम्मानित जीवन जी सकें।