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प्रधानमंत्री मोदी का चीन को विस्तारवादी कहना सही, तारीफ हो! 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख में भाषण देते हुए नाम लिए बग़ैर चीन को विस्तारवादी क़रार दिया। क्या सचमुच चीन विस्तारवादी है? जस्टिस मार्केंडेय काटजू का क्या मानना है? पढें उनका यह लेख। 
जस्टिस मार्कंडेय काटजू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया लद्दाख यात्रा में चीन के संदर्भ में (हालांकि चीन का स्पष्ट रूप से नाम लिए बिना) कहा: ‘विस्तारवाद का युग ख़त्म हो चुका है। सदियों से चले आ रहे विस्तारवाद ने  मानवता को सबसे ज़्यादा चोट पहुँचाई है और इसे नष्ट करने की कोशिश की है। जो लोग विस्तारवाद से प्रेरित हैं, वे हमेशा दुनिया के लिए एक ख़तरा साबित हुए हैं। इतिहास इस तथ्य की गवाही देता है। विस्तारवादी ताक़तों को या तो नष्ट कर दिया गया है या उन्हें लौटने के लिए मजबूर किया गया है। इसी अनुभव के कारण आज दुनिया विस्तारवादी ताक़तों के ख़िलाफ़ एकजुट हो रही है।’ 

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इस भाषण के तुरंत बाद भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग ने इस बात से इनकार किया कि चीन विस्तारवादी है और कहा कि यह दावा 'अतिरंजित और मनगढ़ंत' है ।

क्या प्रधानमंत्री का बयान असत्य है?

अपने लेख 'द चाइनीज़ आर टूडेज़ नात्सीज़' जो  'theweek.in'  में प्रकाशित किया गया है, में मैंने चीनी विस्तारवाद का विवरण दिया है। जी रोंग और चीनी विदेश मंत्रालय को इन विवरणों का जवाब देना चाहिए, बजाय यह कहने के कि प्रधानमंत्री का बयान 'अतिरंजित और मनगढ़ंत' है।

जैसा कि मेरे लेख में कहा गया है, आज चीन एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, साथ ही कई और विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में गहराई से प्रवेश कर चुका है।
चीन आज निस्संदेह नात्सी जर्मनी की तरह एक साम्राज्यवादी विस्तारवादी ताक़त है, और 1930 और 1940 के दशक में नात्सियों की तरह विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा भी।

बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव

इसका बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव वास्तव में विस्तार करने का तरीका है। साम्राज्यवादियों की तरह, चीन सभी देशों के बाजारों और कच्चे माल पर कब्जा करना चाहता है। तिब्बत और लद्दाख जैसे पर्वतीय क्षेत्र साइबेरिया की तरह बंजर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन साइबेरिया की तरह ही, वे बहुमूल्य खनिजों और अन्य प्राकृतिक संपदा से भरे हुए हैं।

यही असली कारण है कि चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी, पैंगॉन्ग त्सो, हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक, फाइव फिंगर्स में घुसपैठ की और निस्संदेह लद्दाख में और घुसने की कोशिश करेंगे।

बलोचिस्तान पर चीन की नज़र?

चीन ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में गहराई से प्रवेश कर लिया है, और इस उद्देश्य के लिए वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा का उपयोग कर रहा है। बलोचिस्तान के गैस, सोना, कोयला, तांबा, सल्फर आदि के विशाल प्राकृतिक संसाधन पाकिस्तान के अधिकारियों ने चीनियों को सौंप दिए हैं जिससे बलोचियों के बीच गहरी नाराज़गी है जिन्हें ग़रीब और हाशिए पर रखा जाता है। पाकिस्तानी बाज़ार चीनी सामानों से भरे पड़े हैं।

पाकिस्तान के एक पत्रकार ने मुझे हाल ही में बताया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने मीडिया  से कहा है कि वे चीन के ख़िलाफ़ टीवी पर या अख़बारों में  कुछ भी न कहें या प्रकाशित करें।  इससे पता चलता है की चीनियों ने पाकिस्तानी सरकार पर किस तरह की अपनी पकड़ बना  ली है।

पूरी दुनिया को प्रधान मंत्री मोदी के चीनी विस्तारवाद की निंदा करने वाले भाषण को गहराई से समझकर अपनी आँखें खोलनी चाहिए और चीनी साम्राज्यवादी विस्तारवाद के ख़िलाफ़ एकजुट होना चाहिए।
हालाँकि मोदी द्वारा कही या की गईं अन्य चीज़ों को अस्वीकार किया जा सकता है पर इस मुद्दे पर सभी को एकजुट होना चाहिए। चीनी विस्तारवाद के ख़िलाफ़ बोलकर मोदी ने ठीक वैसे ही बात की है जैसे चर्चिल ने नात्सी विस्तारवाद के ख़िलाफ़ की थी।

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