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क्या महाराष्ट्र फ़ॉर्मूला राष्ट्रीय स्तर पर बनाने की जुगत में हैं पवार?

देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू है, देश की सीमा पर तनाव है, लेकिन इसके साथ-साथ क्या राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति भी कोई नयी करवट लेने जा रही? या इसे यूँ कहें कि क्या शरद पवार की तरफ़ से नरेंद्र मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कोई नयी रणनीति या नया समीकरण बनाने या ‘महाराष्ट्र फ़ॉर्मूला’ बनाने की कवायद तो नहीं चल रही है? वैसे महाराष्ट्र में सत्ता का नया समीकरण बनाने के बाद शरद पवार कई बार यह कह चुके हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नया समीकरण बनाने का वह प्रयास कर रहे हैं। तो क्या कोरोना और चीन सीमा पर तनाव को लेकर घिरी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ ग़ैर भाजपाई दलों को एक साथ लाने के किसी नए फ़ॉर्मूले पर पवार सक्रिय हैं?

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दिल्ली का तापमान गर्मी की वजह से भले ही बढ़ा हो लेकिन मुंबई में धुआंधार बारिश की वजह से सर्द होते मौसम में राजनीति गर्म होने की आहट सुनाई दे रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार एक सप्ताह में कल रात दूसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिले! उनकी इस मुलाक़ात को प्रदेश सरकार में चल रहे सामंजस्य बिठाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। मातोश्री में दोनों नेताओं के बीच क्या चर्चा हुई यह तो नहीं पता चला, लेकिन सोमवार रात को शिवसेना सांसद और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत के ट्वीट ने राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया। 

संजय राउत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार का इंटरव्यू किया है और उसके बाद उसको लेकर ट्वीट किया है। अभी यह इंटरव्यू न तो प्रकाशित हुआ है न ही किसी चैनल पर दिखाया गया, लेकिन इसको लेकर राउत ने जो संकेत दिए हैं उन्हीं को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राउत सामान्यतः मराठी भाषा में ही ट्वीट करते हैं लेकिन कल रात उन्होंने पहले हिंदी में और फिर मराठी में ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि ‘आप इंतज़ार कीजिये शरद पवार के साथ किये गए मैराथन इंटरव्यू का, इसमें महाराष्ट्र से लेकर चीन तक अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई है और देश की राजनीति में खलबली मचने वाली है’। इस ट्वीट में संजय राउत ने शरद पवार के साथ इंटरव्यू का फ़ोटो भी टैग किया है। शरद पवार सोमवार रात को ही मातोश्री गए और संजय राउत को इंटरव्यू भी दिया। 

महाराष्ट्र में विगत तीन-चार दिनों से कई बातों पर सरकार में शामिल तीनों दलों में कई बातों पर खटपट को लेकर विरोधी दल के नेता देवेंद्र फडणवीस आरोप लगा रहे हैं और मीडिया में उसे छापा भी जा रहा है। एक मुद्दा है- मुंबई में शीर्ष पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण का जिसे गृह मंत्री की मान्यता के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा दो दिन बाद निरस्त कर दिया गया। दूसरा मुद्दा है- मराठा आरक्षण और मराठा विद्यार्थियों को शोध तथा उच्च शिक्षण में मदद के लिए गठित संस्था ‘सारथी’ को बंद किये जाने की आशंकाओं तथा प्रस्तावित मराठा आरक्षण को लेकर ओबीसी समाज में बढ़ते रोष का। इसके अलावा बारामती के पारनेर में अजीत पवार द्वारा शिवसेना के पाँच नगरसेवकों को राष्ट्रवादी कांग्रेस में शामिल कराये जाने का। 

प्रदेश में गृह मंत्री राष्ट्रवादी कांग्रेस के हैं और भीमा कोरेगाँव प्रकरण के बाद यह दूसरी बार है जब मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा उनके विभाग के किसी आदेश में दखल दी गई है। इसलिए शरद पवार की उद्धव ठाकरे के मुलाक़ात को इन्हीं घटनाक्रम के तहत देखा जा रहा था, लेकिन संजय राउत ने जो ट्वीट किया उससे चर्चाओं का रुख बदल गया। 

क्या उद्धव ठाकरे ने यह ट्वीट चर्चाओं का रुख बदलने मात्र के लिए किया है या वाक़ई अब राष्ट्रीय स्तर पर भी कोई नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने के लिए किसी राजनीतिक समीकरण पर नए सिरे से कवायद चल रही है?

चीन के मुद्दे को लेकर विगत कई दिनों से शिवसेना भी अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से आक्रामक रुख दिखा रही है और वह राहुल गाँधी द्वारा पूछे जा रहे सवालों के साथ-साथ मोदी सरकार से यह सवाल कर रही है कि ‘चीन को सबक कब सिखलाया जाएगा? भारतीय सैनिकों की शहादत का बदला कैसे लिया जाएगा?’ तो क्या चीन के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोई बड़ी रणनीति तैयार हो रही है? 

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वैसे चीन के मुद्दे पर कुछ दिनों पहले शरद पवार के बयान को मीडिया ‘राहुल गाँधी को नसीहत’ के रूप दिखा रहा था। शरद पवार ने कहा था कि मुझे नहीं पता कि वर्तमान में चीन ने ज़मीन ली है या नहीं। उन्होंने कहा कि ‘जब वह रक्षा मंत्री थे तब चीन गए थे और वहाँ के रक्षा मंत्री की तरफ़ से यह चर्चा की गयी कि दोनों देश सीमा पर हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे और बाद में प्रधानमंत्री नरसिंह राव की उपस्थिति में यह समझौता भी हुआ। वर्तमान में इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए’। 

लेकिन चीन के मुद्दे पर मोदी का बयान कि ‘कोई सीमा में घुसा ही नहीं’ और इसके बाद घोषणा की चीन की सेना दो किलोमीटर पीछे हट गयी है। सरकार के अपने ही बयानों में विरोधाभास पैदा करती है। सीमा के तनाव को लेकर अब बहुत सी बातें स्पष्ट होती जा रही हैं तो क्या अब पवार भी राहुल गाँधी या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी द्वारा उठाये जा रहे सवालों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार को घेरने का मोर्चा बनाने की तैयारी कर रहे हैं, इस बात का खुलासा तो आने वाले दिनों में ही होगा। लेकिन एक बात जिसके संकेत दिखाई दे रहे हैं वह यह कि कोरोना और सीमा पर तनाव के बाद राजनीति में भी हलचल होने वाली है।

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संजय राय
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