आज का लोकतंत्र कागजों और नियमों के जरिए सबसे ज्यादा खतरे में है। भारत में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान फॉर्म 7 को हथियार बनाकर लाखों असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं। यह कोई सामान्य सफाई नहीं है – यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी है, जिसका मकसद विपक्षी समर्थकों, अल्पसंख्यकों, दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों को वोट देने से रोकना है।

फॉर्म 7 क्या है? यह चुनाव आयोग का एक वैधानिक फॉर्म है, जिससे कोई भी मतदाता एक ही विधानसभा क्षेत्र में किसी अन्य मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कर सकता है – जैसे मौत, स्थानांतरण या डुप्लिकेट नाम। प्रक्रिया में सबूत, नोटिस और सुनवाई अनिवार्य है। लेकिन अब आरोप है कि भाजपा कार्यकर्ता और ब्लॉक लेवल एजेंट्स (BLAs) बल्क में प्रिंटेड, फर्जी फॉर्म 7 जमा कर रहे हैं – जाली हस्ताक्षर, फर्जी फोन नंबर, गलत EPIC डिटेल्स के साथ। कई मामलों में ऑब्जेक्टर खुद कह रहे हैं कि उन्होंने फॉर्म नहीं भरा।
कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने 29 जनवरी 2026 को ECI को पत्र लिखकर इसे “सिस्टेमैटिक और कोऑर्डिनेटेड” दुरुपयोग बताया। राजस्थान से शुरू होकर गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, केरल तक फैला। सूरत (गुजरात) में भाजपा कॉरपोरेटर ने सैकड़ों जीवित मुस्लिम वोटरों को “मृत” घोषित कर नाम कटवाए। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने कहा – भाजपा PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) के 1 करोड़ से ज्यादा वोटरों को फर्जी फॉर्म 7 से हटाने की साजिश रच रही है, खासकर मुस्लिमों को। असम में बंगाली भाषी मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। लाखों नाम बिना ठीक नोटिस के गायब हो रहे हैं, सुनवाई में परेशानी।

यह चुपके वोटर सप्रेशन है – चुनाव जीतने के लिए कुछ वोट कम करना। नाम कटने पर मतदाता को पता भी नहीं चलता, और चुनाव के दिन वोट नहीं डाल पाता। यह लोकतंत्र की जड़ों पर हमला है – कागजों के जरिए मताधिकार छीनना।

दुनिया भर में वोटर सप्रेशन

यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं। दुनिया भर में सत्ताधारी दल वोटर सप्रेशन के नए-नए तरीके अपना रहे हैं:
  • अमेरिका में सख्त वोटर आईडी कानून, वोटर लिस्ट से नाम कटवाना (पर्जिंग), और पोलिंग स्टेशन कम करना – खासकर ब्लैक, लैटिनो, गरीब और युवा वोटर टारगेट हैं। 2024-2025 में SAVE Act जैसे कानूनों से लाखों नागरिकों को वोटर रजिस्ट्रेशन से बाहर करने की कोशिश हुई। ट्रंप प्रशासन ने ओवरसीज वोटरों को भी टारगेट किया।
  • ब्राजील में 2022 चुनाव में पुलिस ने बोल्सोनारो समर्थक इलाकों में रोडब्लॉक लगाकर लुला समर्थकों को रोका।
  • हंगरी में विक्टर ओरबान ने जिलों की सीमाएं बदलकर (gerrymandering), मीडिया कंट्रोल और नियम बदलकर विपक्ष को कमजोर किया।
  • रूस में पुतिन के खिलाफ असली उम्मीदवार जेल में, धांधली से 87% वोट मिले।
  • तुर्की में एर्दोगन के खिलाफ विपक्ष को डराया-धमकाया जाता है, मीडिया पर कंट्रोल।
ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि तानाशाही और पॉपुलिस्ट नेता कैसे नियमों, कागजों और डर से वोटरों को दबाते हैं। भारत में भी यही पैटर्न दिख रहा है – फॉर्म 7 के नाम पर टारगेटेड डिलीशन।
ECI और भाजपा का दावा है कि SIR सिर्फ रूटीन सफाई है (2002-04 के बाद पहली बड़ी), डुप्लिकेट/मृत/माइग्रेंट नाम हटाने के लिए। वे आरोपों को राजनीतिक बताते हैं और कहते हैं कि हर आपत्ति पर जांच और नोटिस होती है। लेकिन विरोधी दलों की शिकायतें, मीडिया रिपोर्ट्स और पैटर्न इतने समान हैं कि सवाल उठते हैं – क्या यह सच में निष्पक्ष है?

तुरंत क्या करें?

  • अपना नाम चेक करें: voters.eci.gov.in या NVSP ऐप पर।
  • नाम गायब या आपत्ति लगी हो तो तुरंत फॉर्म 6/8 से क्लेम करें।
  • दस्तावेज़ (आधार, राशन कार्ड, पुराना वोटर आईडी) तैयार रखें।
  • फर्जी फॉर्म 7 का शिकार हुए तो पुलिस में शिकायत करें, ECI से जांच मांगें।
  • यह धोखा रोकने के लिए आवाज़ उठाएं – जागरूक करें, शेयर करें।
आपका वोट आपकी ताकत है। इसे कोई चोरी न कर ले। यह चुनाव नहीं, लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है। जागें, लड़ें, और अपने मताधिकार की रक्षा करें।