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मोदी कैबिनेट में आएँगे करिश्माई ‘शाह’, कौन होगा नया अध्यक्ष?

बीजेपी के नेतृत्व में बनने वाली एनडीए की नई केंद्र सरकार 30 मई को शपथ लेने जा रही है। तय माना जा रहा है कि इस सरकार में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शामिल होंगे और उन्हें कोई अहम मंत्रालय दिए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। लेकिन पार्टी के सामने अब चुनौती यह है कि वह शाह की जगह पर किसे नया अध्यक्ष बनाए। क्योंकि पिछले पाँच सालों में शाह ने जिस तरह पार्टी संगठन को देश के कोने-कोने तक खड़ा किया है, उनके मुक़ाबले का अध्यक्ष चुनना निश्चित रूप से पार्टी के लिए बेहद मुश्किल होगा।
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आपके मन में यह सवाल ज़रूर उठ रहा होगा कि आख़िर कैबिनेट मंत्री रहते हुए अमित शाह पार्टी के अध्यक्ष क्यों नहीं हो सकते हैं। इसके लिए आपको बता दें कि बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का सिद्धांत लागू है। पहले हम अमित शाह के अध्यक्ष के कार्यकाल के तौर पर हासिल उपलब्धियों पर बात करेंगे और फिर हम जानेंगे कि शाह के कैबिनेट में आ जाने पर वे कौन से चेहरे हैं जो बीजेपी के अध्यक्ष बन सकते हैं।

सबसे सफल अध्यक्ष रहे हैं शाह

राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के रास्ते राजनीति में क़दम रखने वाले अमित शाह पार्टी के आम कार्यकर्ता से राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद तक पहुँचे हैं। शाह को राजनीति का चाणक्य यूँ ही नहीं कहा जाता है, उन्होंने कई मौक़ों पर अपने रणनीतिक कौशल से दिखाया है कि विपरीत परिस्थितियों में पार्टी को कैसे जीत दिलाई जाती है। ख़ुद नरेंद्र मोदी, शाह को पार्टी का सबसे सफल राष्ट्रीय अध्यक्ष बता चुके हैं।
गुजरात की मोदी सरकार में गृह मंत्री रह चुके शाह ने 2019 का चुनाव जीतने के लिए 300 से ज़्यादा लोकसभा क्षेत्रों का दौरा किया और 160 से ज़्यादा रैलियाँ कीं। शाह को क़रीब से जानने वालों का कहना है कि वह अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए जी-जान से जुट जाते हैं।
शाह राष्ट्रीय राजनीति में तब चर्चा में आए थे जब 2014 में बीजेपी ने उन्हें बेहद अहम उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि लंबे समय से उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर बीजेपी अपने दम पर राज्य की 80 में से 71 सीटें जीत सकती है। लेकिन शाह के नेतृत्व में पार्टी को बंपर जीत मिली और उन्हें 2014 के चुनाव के बाद पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
पार्टी अध्यक्ष बनते ही अमित शाह ने अपना चुनावी कौशल दिखाना शुरू कर दिया। उसी साल यानी 2014 में बीजेपी ने पाँच में चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। शाह के नेतृत्व में पार्टी ने महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा में सरकार बनाई और जम्मू-कश्मीर में उपमुख्यमंत्री का पद हासिल किया। 
2015 में दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद शाह चुप नहीं बैठे और 2017 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में पार्टी को बड़ी जीत दिलवाई। शाह ने असम, त्रिपुरा में भी पार्टी को जीत दिलाई। पार्टी को हिंदी भाषी राज्यों से बाहर ले जाने में शाह का योगदान अहम है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक़, यह शाह की लगातार मेहनत का ही नतीजा था कि बीजेपी को कर्नाटक और पश्‍चिम बंगाल में भी अच्छी सफलता मिली है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना में शाह ने पार्टी को खड़ा किया। देश के राजनीतिक नक्शे में आज अधिकांश राज्यों में बीजेपी की मौजूदगी नजर आती है तो इसके पीछे शाह का बेजोड़ चुनावी प्रबंधन बताया जाता है। दिसंबर 2018 में तीन राज्यों में मिली हार के बाद शाह ने कमर कसी और ‘अबकी बार 300 पार’ का नारा दिया और जब चुनाव नतीजे आए और पार्टी को 303 सीटें मिलीं तो जीत का सेहरा नरेंद्र मोदी के साथ अमित शाह के सिर पर भी बंधा। रामलाल, कैलाश विजयवर्गीय, अनिल जैन, भूपेंद्र यादव, राम माधव, सुनील बंसल, अमित मालवीय और अनिल बलूनी को शाह का क़रीबी माना जाता है।
अमित शाह गुजरात में चार बार विधायक और राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं। इस बार उन्होंने गाँधीनगर संसदीय सीट से पाँच लाख से अधिक मतों के अंतर से जीत हासिल की है। शाह के बारे में कहा जाता है कि वह आज तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं।
अब बात करते हैं उन चेहरों के बारे में जो शाह की जगह पर बीजेपी अध्यक्ष बन सकते हैं। इनमें पहला नाम है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का और दूसरा नाम है मोदी सरकार में पेट्रोलियम मंत्री रह चुके धर्मेंद्र प्रधान का। जेपी नड्डा ने देश भर में 'आयुष्मान भारत योजना' लागू की थी। मोदी सरकार ने इसे विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना बताया था। बता दें कि जेपी नड्डा का नाम 2014 में उस वक्त भी चर्चा में आया था, जब राजनाथ सिंह की जगह पार्टी विकल्प खोज रही थी। जानकारों के मुताबिक़, हिमाचल प्रदेश से आने वाले नड्डा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
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दूसरे दावेदार धर्मेंद्र प्रधान के पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए ही मोदी सरकार ने गाँव-गाँव तक नि:शुल्क रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्जवला योजना शुरू की। बताया जाता है कि इस योजना से ग़रीब परिवारों को काफ़ी लाभ मिला।

नड्डा और प्रधान के अलावा पार्टी के संगठन महासचिव रामलाल भी शाह के बेहद क़रीबी हैं और उन्हें भी पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी मिल सकती है। बहरहाल, देखना यह होगा कि शाह को केंद्र में कौन सा मंत्रालय मिलता है और बीजेपी का अगला अध्यक्ष कौन होगा। 

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