बीजेपी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति भवन में नॉर्थ-ईस्ट का पटका नहीं पहनकर राहुल गांधी ने नॉर्थ-ईस्ट का अपमान किया है, जबकि कांग्रेस ने पलटवार करते हुए तंज कसा कि राजनाथ सिंह ने पटका नहीं पहनकर क्या किया? पढ़िए कैसे कैसे आरोप-प्रत्यारोप।
राहुल गांधी और राजनाथ सिंह पर विवाद।
गणतंत्र दिवस के मौक़े पर राष्ट्रपति भवन में 'एट होम' रिसेप्शन में उत्तर-पूर्वी पारंपरिक पटका यानी गमोसा नहीं पहनने पर बड़ा विवाद हो गया। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तर-पूर्वी पारंपरिक पटका यानी गमोसा नहीं पहनकर उत्तर पूर्व का अपमान किया है। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि राजनाथ सिंह ने भी नहीं पहना है तो क्या अपमान नहीं हुआ। इसके बाद राजनीतिक बवाल मच गया।
बीजेपी ने इसे उत्तर-पूर्व के लोगों के साथ अपमान और उनके प्रति असंवेदनशीलता बताया है। बाद में कांग्रेस ने पलटवार किया और पूछा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पटका क्यों नहीं पहना? कांग्रेस ने राजनाथ सिंह की तस्वीर शेयर करते हुए पूछा कि क्या हिमंता बिस्व सरमा और अमित मालवीय जैसे नेता राजनाथ सिंह के बारे में भी ऐसा ही कहेंगे और क्या माफी मांगेंगे?
बीजेपी का आरोप क्या
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राहुल गांधी से दो बार पटका पहनने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मालवीय ने तस्वीरें शेयर कीं जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, ईयू नेता और विदेशी मेहमान पटका पहने दिख रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी बिना पटका के खड़े हैं।
मालवीय ने लिखा, 'आज राष्ट्रपति भवन के 'एट होम' रिसेप्शन में उत्तर-पूर्व का थीम था। पीएम से लेकर ईयू नेता और विदेशी मेहमानों ने सम्मान और समावेश के प्रतीक के रूप में उत्तर-पूर्वी पटका पहना।'
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने भी राहुल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के डिफैक्टो सुप्रीमो राहुल गांधी का रवैया नहीं बदला। उन्होंने राष्ट्रपति के रिसेप्शन में पटका नहीं पहना, जो उत्तर-पूर्व की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए अपमानजनक और असंवेदनशील है।' हिमंता ने माफी की मांग की और कहा कि पीएम मोदी से लेकर विदेशी मेहमानों ने पटका पहना, लेकिन राहुल अकेले अलग खड़े रहे। इससे उत्तर-पूर्व के प्रति उनकी उपेक्षा की छवि मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि इसी असंवेदनशीलता की वजह से कांग्रेस उत्तर-पूर्व में पिछड़ गई है।
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार किया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने हिमंता सरमा को टैग करके पूछा, 'हे हिमंता बिस्व सरमा, क्या आप राजनाथ सिंह जी से भी माफी मांगेंगे? या आपकी पूरी रणनीति ऐसे छोटे-मोटे मुद्दों पर हमला करके एंटी-इनकंबेंसी से बचना है?' कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अमित मालवीय से पूछा, "ये चोमू, राजनाथ सिंह काहे नहीं पहने हैं?" कांग्रेस ने राजनाथ सिंह की एक तस्वीर शेयर की जिसमें वे रिसेप्शन में बिना पटका के दिख रहे हैं।पवन खेड़ा ने राहुल की पुरानी तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा है कि वह उत्तर पूर्व के लोगों से प्यार करते हैं।
पवन खेड़ा ने लिखा है, 'राहुल गांधी ने नॉर्थ-ईस्ट के हमारे भाइयों और बहनों के साथ खड़े होने का चरित्र और नैतिक साहस दिखाया है - मणिपुर के साथ, जो तब जल रहा था जब प्रधानमंत्री गायब और चुप थे; ज़ुबीन गर्ग के परिवार के साथ, जो अभी भी जवाब का इंतज़ार कर रहा है; और एंजेल चकमा के परिवार के साथ, जो अभी भी न्याय के लिए गुहार लगा रहा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'इसमें कोई हैरानी नहीं है कि हिमंता बिस्व सरमा फोटो-ऑप्स के पीछे छिपते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनके दिन गिने-चुने हैं। नॉर्थ-ईस्ट शांति, न्याय, रोज़गार और अपनी समृद्ध और जटिल संस्कृति के लिए सम्मान चाहता है - ऐसी चीज़ें जिन्हें बीजेपी-आरएसएस इकोसिस्टम ने जानबूझकर खत्म किया है। असम दिखावे के लिए वोट नहीं कर रहा है। वह जवाबदेही के लिए वोट कर रहा है। और यही बीजेपी की ध्यान भटकाने वाली चालों की वजह है।'
क्या है पटका?
पटका या गमोसा उत्तर-पूर्व और असम का पारंपरिक स्कार्फ है। यह सम्मान, संस्कृति और समावेश का प्रतीक है। रिसेप्शन का थीम उत्तर-पूर्व पर था, इसलिए सभी मेहमानों को इसे पहनने के लिए दिया गया था।
खड़गे, राहुल को तीसरी पंक्ति में बिठाया!
कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने कहा कि बीजेपी राहुल गांधी पर प्रोपगैंडा फैला रही है। उन्होंने कहा, 'बीजेपी हर बार किसी न किसी बहाने आरोप लगाती है। गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को जहां बैठाया गया, वह देखिए। इससे बीजेपी की सोच साफ दिखती है।' विवेक तन्खा ने भी यही मुद्दा उठाया। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, 'छोटे मन के लोग छोटे टुच्चे कामों में ही उलझे रहते हैं। वो कोई बड़ा काम कर ही नहीं सकते। तभी तो देश का यह हाल है। नरेंद्र मोदी खड़गे जी और राहुल जी को तीसरी नहीं तीसवीं पंक्ति में भी बिठा दें तो इससे उनका क़द नहीं छोटा होता बल्कि मोदी की टुच्चई साबित होती है। वह दोनों लोकतंत्र के सबसे मज़बूत प्रहरी हैं। कहीं उठने कहीं बैठने से थोड़े ही राहुल गांधी राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी वह शख्स हैं जो मोदी की आँख में आँख डाल कर उनकी कलई खोलते हैं। राहुल गांधी वह शख्स हैं जिनसे नरेंद्र मोदी की रूह काँपती है। क्या मोदी जी, कितने छोटे मन के आदमी हैं आप?!'
बहरहाल, यह विवाद राजनीतिक बयानबाजी का नया दौर शुरू कर चुका है। बीजेपी इसे राहुल की 'उत्तर-पूर्व विरोधी' सोच बताकर हमला कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे छोटा मुद्दा बताकर बीजेपी पर उल्टा इल्जाम लगा रही है।