मुख्य चुनाव आयुक्त के मामले में बवाल के बीच बीजेपी ने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर जोरदार जवाब दिया है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव में जिन 20 सीटों पर सबसे ज़्यादा मतदाता सूची से नाम काटे गए उनमें से 13 पर तृणमूल कांग्रेस जीती, जबकि बीजेपी सिर्फ 6 सीटों पर ही जीत सकी। उन्होंने सवाल किया कि अगर वोटर डिलीशन से बीजेपी को फायदा हुआ होता तो आधे से ज़्यादा सीटें कैसे हार जाती?

बीजेपी की यह सफाई तब आई है जब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की आपत्तियों का ज़िक्र हुआ। रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वोट चोरी करने वाले बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग और बीजेपी पर हमला बोला। केजरीवाल, ममता जैसे नेताओं ने तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ़्तार करने की मांग भी की।
ताज़ा ख़बरें

संबित पात्रा ने क्या कहा?

संबित पात्रा ने कहा, 'विपक्ष का पूरा आरोप इस पर टिका है कि वोटर लिस्ट से नाम काटने के कारण बीजेपी बंगाल में जीती। लेकिन हकीकत ये है कि जहाँ सबसे ज्यादा नाम कटे, वहां टीएमसी ही आगे रही।' उन्होंने मुर्शिदाबाद की समसेरगंज सीट का उदाहरण दिया। यहां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के बाद 91,712 मतदाताओं के नाम काट दिए गए। यह पूरे बंगाल में किसी एक सीट से सबसे ज्यादा डिलीशन था। यानी तीन में से एक से ज्यादा नाम हट गए। इस सीट पर टीएमसी के मोहम्मद नूर आलम 61,918 वोटों से जीते। कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही, जबकि बीजेपी कहीं नज़र नहीं आई। पात्रा ने पूछा, 'अगर वोट चोरी से हम जीते होते तो सबसे ज्यादा डिलीशन वाली सीट पर हम हार कैसे गए?'

ममता बोलीं- दुबारा चुनाव हो

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फेसबुक लाइव में हमला बोला और बंगाल में नए चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी तक की बात कही। 

ममता ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग को ‘स्कैंडल’ बताया और कहा, 'बीजेपी और ज्ञानेश कुमार एक जॉइंट वेंचर कंपनी हैं। दोनों ने मिलकर बंगाल का चुनाव लूट लिया। अगर थोड़ी भी नैतिक ताकत है तो हमें चुनाव वापस दो।'

बंगाल में ईआरओनेट सॉफ्टवेयर का विवाद

बंगाल में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की अपीलों का फैसला सिर्फ चुनाव आयोग पर नहीं छोड़ा था। करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को ये मामले सौंपे गए। न्यायिक अधिकारियों ने 27 लाख मतदाताओं के नाम काटने और 33 लाख को रखने का फैसला किया।

जिन मतदाताओं को जजों ने लिस्ट में रखने का फैसला किया, उनके खिलाफ चुनाव आयोग ने अपील की। ये अपीलें ईआरओनेट सॉफ्टवेयर के जरिए दाखिल की गईं। ज्यादातर अपीलें एक ही अधिकारी के नाम से और उसी अधिकारी के जरिए फाइल हुईं। ईआरओनेट चुनाव आयोग के बड़े प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट का हिस्सा है, जिससे एक क्लिक पर काम हो जाता है। जब सुप्रीम कोर्ट ने इन अपीलों का हिसाब मांगा, तो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने अधिकारियों से पूछा कि इन अपीलों को किसने अधिकृत किया और किसने फाइल किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें खुद इसकी जानकारी नहीं थी।

पात्रा का कांग्रेस पर हमला

संबित पात्रा ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से विपक्षी दल जनता से खारिज हो चुके हैं। जब कांग्रेस को लगा कि वह जनता का दिल नहीं जीत सकती, तो उसने संवैधानिक संस्थाओं पर हमला शुरू कर दिया। पात्रा ने यह आरोप तब लगाया है जब राहुल गांधी ने गुरुवार को कहा कि वह पहले से ही कह रहे हैं कि चुनाव आयोग वोट चोरी करा रहा है। राहुल ने बुधवार को एक वीडियो बयान जारी कर कहा, 'वोट की चोरी भारत के लोगों के ख़िलाफ़ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ़ ज़रूर होगा।'

राहुल के इस आरोप के बीच संबित पात्रा ने कहा, 'वे चुनाव आयोग पर लगातार हमला कर रहे हैं। लेकिन अब आयोग ने विस्तृत नोट जारी किया है। इसमें साफ है कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच आधिकारिक चर्चा हुई। लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि सहमति-असहमति होती है। आखिर में सभी एक पेज पर आ गए।'
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें
पात्रा ने कहा, 'चुनाव आयोग ने अपने सबसे पहले पैराग्राफ में साफ़ तौर पर लिखा था कि सभी आधिकारिक और लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद SIR को लेकर फ़ैसला सर्वसम्मति से लिया गया था। इसमें कोई मतभेद नहीं था और सभी की राय एक ही थी। भारत का चुनाव आयोग या भारत की कोई भी संवैधानिक संस्था किसी तानाशाही शासन के अधीन नहीं है। वे लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहे हैं और भारत के लोकतंत्र को बनाए हुए हैं।'

पात्रा ने जोर देकर कहा कि बीजेपी किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र को बचा रही है। वे विपक्ष के ‘दुष्प्रचार’ का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी, 'महाभियोग का खाली पन्ना लाओ, मैं उस पर साइन कर दूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि शीतकालीन सत्र शुरू होते ही विपक्ष संसद नहीं चलने देगा। वे बाहर खड़े होकर हंगामा करेंगे और नारेबाजी करेंगे। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष के आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते। वहीं विपक्ष चुनाव आयोग की आंतरिक असहमति को लेकर हमलावर है और बंगाल चुनाव पर सवाल उठा रहा है। दोनों पक्षों के बीच यह विवाद आगे भी जारी रहने के आसार हैं।