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कांग्रेस के जवाब में बीजेपी क्या निकालेगी अपनी झोली से?

कांग्रेस के चुनाव घोषणापत्र जारी करने के लगभग एक हफ़्ते बाद भारतीय जनता पार्टी सोमवार को चुनाव घोषणापत्र जारी करेगी। पिछली बार 2014 में 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा देने वाली बीजेपी के अजेंडे पर क्या इस बार भी विकास का मुद्दा है, यह साफ़ हो जाएगा। कांग्रेस ने सबसे ग़रीब 20 प्रतिशत लोगों के लिए ख़ास योजना का एलान कर लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। बीजेपी ने उस प्रस्ताव की आलोचना तो की थी, पर उसके जवाब में वह अपनी झोली से क्या निकालती है, यह आज मालूम हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा बीजेपी के कई बड़े नेता घोषणापत्र जारी करते समय मौजूद रहेंगे। पार्टी ने इसे ‘संकल्प पत्र' का नाम दिया है।
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बीजेपी काफ़ी दिनों से इस संकल्प पत्र के लिए तैयारी कर रही है, इसके लिए पूरे देश से लोगों की राय भी ली गई है। इसकी पूरी संभावना है कि बीजेपी अपने संकल्प पत्र में राष्ट्रीयता और सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बना कर पेश करे। इसने इसी आधार पर चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। बीजेपी यह संदेश दे सकती है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। लोगों की निगाहें इस पर भी टिकी रहेंगी कि बीजेपी अपने घोषणा पत्र में राम मंदिर का जिक्र करती है या नहीं। 
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 पार्टी इस संकल्प पत्र में सरकार की 5 सालों की उपलब्धियों की चर्चा कर सकती है। इसमें सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की पहल पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में ग़रीबों को आर्थिक मदद देने से जुड़ी 'न्याय' योजना का एलान कर बीजेपी को सकते में डाल दिया था। बीजेपी अपने संकल्प पत्र को अधिक धारदार और लुभावना बनाकर पेश करने की कोशिश में ग़रीबों को मदद देने के लिए किसी दूसरी योजना की घोषणा कर सकती है। 
संकल्प पत्र में किसान और नौजवानों के हितों से जुड़े विषयों पर कोई आश्वासन हो सकता है। रोज़गार और स्वरोज़गार के व्यापक अवसर का खाका भी पेश किया जा सकता है।
घोषणापत्र में महिलाओं को कैबिनेट में 15 फ़ीसदी और विभिन्न आयोगों में 33 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान हो सकता है। उद्योग-व्यापार शुरू करने के लिए महिलाओं और युवाओं को विशेष कर रियायत की घोषणा भी की जा सकती है। 
बीजेपी अपने संकल्प पत्र में इन बातों को शामिल कर सकती है। 
  • राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर विशेष ज़ोर।  
  • किसानों के लिए मासिक पेंशन योजना और कृषक भविष्य निधि।
  • रोज़गार एवं स्वरोज़गार के व्यापक अवसर का खाका।
  • सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण। 
  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना को व्यापक बनाने का एलान।
  • मंत्रिपरिषद में महिलाओं के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि बीजेपी के पिछले पाँच साल के कामकाज का ऐसा रिकार्ड नहीं रहा है, जिस पर पार्टी गर्व कर सके। इसने योजनाओं की घोषणा तो की है, उसका व्यापक प्रचार भी किया है, पर ज़मीनी स्तर पर उसका लाभ किसी को नहीं दिखा है। इसके बाद सरकार ने लोगों का ध्यान बँटाने के लिए राष्ट्रवाद का मुद्दा उछाला और लोगों में इसका असर देखा जा रहा है। पार्टी ने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत भी इसी मुद्दे से की। ऐसे में विकास, रोज़गार, ग़रीब, किसान, महिला और वंचित तबकों के लिए पार्टी क्या सोचती है, यह जानना दिलचस्प है। 
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