2019 से ही उत्तर बंगाल के कुछ भाजपा सांसदों, मौजूदा सांसदों और पूर्व सांसदों ने बार-बार इस मुद्दे को उठाया है। इस पर राज्य के भाजपा नेताओं ने काफ़ी नाराज़गी भी दिखाई। लेकिन यह मांग रुक नहीं रही है। यह एक तरह से बीजेपी की रणनीति भी लग रही है। उसके सांसद और विधायक अलग राज्य की मांग कर रहे हैं जबकि प्रदेश बीजेपी नेता जनता के सामने इस मांग को अपनी तरफ से पेश नहीं कर रहे हैं।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी इस पर नजर रखे हुए हैं। ममता ने पिछले साल अगस्त में विधानसभा में राज्य के किसी भी विभाजन के खिलाफ टीएमसी का प्रस्ताव रखवाया था। इसे सभी बीजेपी विधायकों ने समर्थन भी दिया था। लेकिन अब अचानक बीजेपी विधायक अपने स्टैंड से पलट गये हैं। विधायक शिखा चटर्जी का अब ये कह रही हैं कि उन्होंने बस अपने क्षेत्र के लोगों की मांग को उजागर किया है। लोग यह कह रहे हैं और उनकी विधायक होने के नाते, इसे इस मंच (विधानसभा) पर रखना मेरी जिम्मेदारी है। अगर राज्य विकास नहीं कर सकता है, तो उसे उत्तर बंगाल को अलग कर देना चाहिए और इसे केंद्र शासित क्षेत्र बना देना चाहिए। ताकि विकास में तेजी आ सके।"