यूपी के चुनावी आंकड़ों से स्पष्ट है कि मायावती की उदासीनता की वजह से बीएसपी को वोट देने वाला दलित मतदाता छिटक कर बीजेपी में चला गया। अगर वो दलित मतदाता बीजेपी में नहीं जाता तो बीएसपी आराम से फिर 20-22 सीटें निकाल सकती थीं। इससे पहले मुस्लिमों का भी बीएसपी को वोट मिलता रहा है। लेकिन इस बार मायावती के रवैए को देखकर बीएसपी को वोट देने वाला मुस्लिम सपा के साथ खड़ा हो गया। मायावती ने लगभग 90 मुस्लिमों को जिस रणनीति के तहत टिकट दिया था, मुस्लिम मतदाता उसे भी भांप गए। क्योंकि बीएसपी ने ऐसा पहले कभी नहीं कहा था।