इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में अव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर क्यों लिया? आख़िर प्रधानमंत्री को पूरी अव्यवस्था के लिए क्यों ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है?
कांग्रेस ने पीएम मोदी पर साधा निशाना। (फोटो साभार: एक्स/@INCIndia)
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में सोमवार को हुई भारी अव्यवस्था के लिए कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज़िम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने कहा कि यह AI इम्पैक्ट समिट नहीं, 'मोदी का फोटो समिट' है।
दरअसल, दिल्ली में चल रहे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के पहले दिन काफ़ी विवाद हुआ। यह समिट भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की ताक़त दुनिया को दिखाने के लिए था, लेकिन यहां मैनेजमेंट में इतनी गड़बड़ी हुई कि कांग्रेस ने इसे 'मोदी की फोटो समिट' कहकर तीखी आलोचना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के कारण एग्जिबिटर्स और स्टार्टअप फाउंडर्स को बड़ी परेशानी हुई। कुछ एग्जिबिटरों ने सामान चोरी होने की शिकायत की, कुछ ने शिकायत की कि भोजन-पानी नहीं मिला और घंटों लाइन में इंतज़ार करना पड़ा।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने इसे भयानक अराजकता और शर्मनाक बताया। पार्टी ने एक्स पर पोस्ट किया कि यह एआई समिट नहीं, बल्कि पीएम मोदी की फोटो और रील बनाने का मौका बन गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "यह दुनिया के लिए भारत की एआई क्षमता दिखाने का मौक़ा था, लेकिन 'पीआर की भूखी' सरकार की वजह से यह पूरी तरह अराजकता और गड़बड़झाला बन गया। फाउंडर्स, एग्जिबिटर्स और विजिटर्स को बहुत तकलीफ हुई। प्रोडक्ट चोरी हुए, भोजन-पानी नहीं मिला, लैपटॉप-डिवाइस बैन, सिर्फ कैश पेमेंट। यह देश के लिए वैश्विक शर्मिंदगी है। मोदी सरकार को बेंगलुरु टेक समिट से सीखना चाहिए, जो बड़े इवेंट अच्छे से मैनेज करता है।"
कांग्रेस ने कहा कि पीएम मोदी खुद फोटो ऑपर्च्युनिटी के लिए आए और पूरे इवेंट को बिगाड़ दिया। इसने कहा, 'ये सब इसलिए हुआ क्योंकि एआई समिट के पहले ही दिन नरेंद्र मोदी अपने लाव-लश्कर के साथ वहां फोटो खिंचवाने और रील बनवाने पहुंच गए। ये दिखाता है कि नरेंद्र मोदी को सिर्फ अपनी छवि चमकाने से मतलब है। विश्व स्तर पर देश की इमेज बर्बाद होने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। शर्मनाक!'क्या हुआ समिट में?
समिट 16 फरवरी को भारत मंडपम में शुरू हुआ। यह दुनिया का बड़ा एआई इवेंट है, जहां हजारों लोग, स्टार्टअप, ग्लोबल कंपनियां और लीडर्स आए हैं। लेकिन पहले दिन पीएम मोदी के दौरे के कारण सुरक्षा के नाम पर बहुत सख्ती हुई। मुख्य हॉल को पीएम के आने के लिए खाली करा दिया गया। आरोप हैं कि एग्जिबिटरों को उनके पैसे देकर बुक किए स्टॉल्स से बाहर निकाल दिया गया।
बेंगलुरु के NeoSapien कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ धनंजय यादव ने बताया कि उनके पेटेंटेड एआई वेयरेबल (पहनने वाले डिवाइस) स्टॉल से गायब हो गए। दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक गेट बंद रहे। उन्होंने सुरक्षा पर भरोसा करके सामान छोड़ दिया था, लेकिन लौटकर देखा तो डिवाइस गायब थे। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'हमने फ्लाइट, होटल, लॉजिस्टिक्स और बूथ के पैसे दिए, लेकिन प्रोडक्ट चोरी हो गए। इतनी हाई-सिक्योरिटी जोन में ऐसा कैसे हुआ?' कांग्रेस ने YuVerse कंपनी के सेल्स हेड रोमिल रुंगटा के एक इंटरव्यू को एक्स पर साझा किया है जिसमें उन्होंने कहा है, 'हमें एग्जिबिशन से निकाल दिया गया। हमें भोजन और पानी भी नहीं मिला। हम जेल में जैसे महसूस कर रहे थे।'
क्या-क्या दिक्कतें आईं?
- इंटरनेट कनेक्शन खराब होने से कई डेमो (प्रदर्शन) फेल हो गए।
- टेक इवेंट में लैपटॉप, कैमरा, बैग, पानी की बॉटल तक बैन कर दी गई।
- सिर्फ कैश पेमेंट चल रहा था, यूपीआई या डिजिटल पेमेंट नहीं। कई एग्जिबिटर्स भूखे रहे।
- विजिटर्स को घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ा। बाइक या कार से आए लोगों को चाबियां अंदर नहीं ले जाने दी गईं।
- एंट्री में कन्फ्यूजन, कोई क्लियर कम्युनिकेशन नहीं।
सरकार का जवाब
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने माफी मांगी। उन्होंने कहा, 'अगर एग्जिबिटर्स को कोई तकलीफ हुई तो हम माफी मांगते हैं। सभी मुद्दों को ठीक किया जाएगा।' उन्होंने बताया कि दूसरे दिन अब सब कुछ सुचारू चल रहा है और बहुत बड़ी भीड़ आई है।
यह घटना भारत की एआई महत्वाकांक्षा पर सवाल उठा रही है। एक तरफ़ सरकार एआई में बड़ा क़दम बता रही है, दूसरी तरफ़ मैनेजमेंट की कमी से स्टार्टअप्स निराश हैं। सोशल मीडिया पर लोग बहस कर रहे हैं कि क्या बड़े इवेंट में सुरक्षा और सुविधा का बैलेंस होना चाहिए।