फ्रांस में G7 समिट से अलग मोदी-ट्रंप मुलाकात से ठीक पहले कांग्रेस ने पूछा है कि अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नागरिकों के मारे जाने के बाद भी क्या डोनाल्ड ट्रंप से नरेंद्र मोदी हाथ मिलाएंगे? क्या मोदी पूछेंगे कि हमें धमकाने की हिम्मत मार्को रुबियो में कैसे हुई?
सुप्रिया श्रीनेत और नरेंद्र मोदी
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत को लेकर कांग्रेस ने अब प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी पर बड़ा हमला किया है। फ्रांस में G7 समिट से अलग मोदी-ट्रंप मुलाकात से ठीक पहले कांग्रेस ने पूछा है कि अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नागरिकों के मारे जाने के बाद भी क्या डोनाल्ड ट्रंप से नरेंद्र मोदी हाथ मिलाएंगे? क्या मोदी पूछेंगे कि हमें धमकाने की हिम्मत मार्को रुबियो में कैसे हुई? पार्टी ने कहा है कि क्या मोदी पूछेंगे कि भारतीयों को मारने की हिम्मत USA की कैसे हुई?
डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली मुलाक़ात से पहले कांग्रेस ने पीएम मोदी से चार कड़े सवाल पूछे हैं। पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मोदी सरकार अमेरिका के सामने कमजोर रवैया अपना रही है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि राहुल गांधी सही कहते हैं- 'मोदी जी भारत की संप्रभुता और स्वतंत्रता के बजाय अमेरिका के सामने आज्ञाकारी नौकर की तरह व्यवहार कर रहे हैं'।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि आज़ाद हिंदुस्तान में पहली बार हमारी संप्रभुता और स्वतंत्रता पर इस तरह का हमला हो रहा है जब अमेरिका मनमानी कर रहा है, लेकिन नरेंद्र मोदी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यदि नरेंद्र मोदी हिम्मत कर अमेरिका को याद दिलाते कि "आप हिंदुस्तान से डील कर रहे हैं और हम एक संप्रभु गणराज्य हैं, तो अमेरिका ऐसा कुछ करने से पहले दस बार सोचता। लेकिन Compromised PM ने न सिर्फ देश की सुरक्षा बल्कि हमारी संप्रभुता के साथ भी खिलवाड़ किया है।"
कांग्रेस के 4 बड़े सवाल
- नरेंद्र मोदी की ऐसी कौन सी नस है, जिसे अमेरिका ने दबा रखा है?
- जब मोदी ट्रंप से मिलेंगे तो क्या इस मुद्दे को उठाएंगे?
- क्या मोदी पूछेंगे कि भारतीयों को मारने की हिम्मत अमेरिका में कैसे हुई?
- क्या मोदी पूछेंगे कि हमें धमकाने की हिम्मत मार्को रुबियो में कैसे हुई?
कांग्रेस ने ये सवाल इसलिए उठाए हैं क्योंकि 11 जून को अमेरिका ने MT Settebello नाम के जहाज पर हमला किया। इस हमले में तीन भारतीय नाविक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश की मौत हो गई।
कांग्रेस का आरोप है कि अमेरिका को पता था कि जहाज पर भारतीय नाविक हैं, फिर भी हमला किया गया। इसने कहा कि भारत का इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन हमारे लोग मारे गए।
'पाक खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था'
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "जब पहलगाम में नरसंहार हुआ था तब भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया क्योंकि पाकिस्तान हत्यारा था। आज अमेरिका हत्यारा बन गया है, लेकिन मोदी जी ट्रंप से 'माई फ्रेंड ट्रंप' कहेंगे और हाथ मिलाएंगे?"
कांग्रेस के आरोप
- मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी जांच की मांग नहीं की।
- सार्वजनिक रूप से अमेरिका की कड़ी निंदा नहीं की।
- अमेरिका के नियमों के उल्लंघन की बात नहीं उठाई।
- नाविकों के परिवारों को भरोसा नहीं दिलाया कि आगे ऐसा नहीं होगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा अमेरिकी अधिकारी को तलब किया गया, लेकिन कांग्रेस ने इसे 'रूटीन डिप्लोमैटिक एक्सरसाइज' क़रार दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात की और हमले की निंदा की गई। लेकिन कुछ घंटे बाद ही अमेरिकी नेता मार्को रुबियो का बयान आया जिसमें माफी तो मांगी ही नहीं गई, उल्टे भारत को धमकाया गया। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने रुबियो के बयान का खंडन तक नहीं किया।
मार्को रुबियो ने दी थी 'चेतावनी'?
बता दें कि अमेरिकी हमलों की निंदा करने वाले एस जयशंकर के बयान के कुछ घंटे बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया। डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि मार्को रुबियो ने जयशंकर से बात की और जोर दिया कि सभी व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। टॉमी पिगॉट ने शनिवार को कहा था, 'विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने ज़ोर दिया कि सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वे इस जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'मोदी की चुप्पी पर सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री फ्रांस में व्यस्त हैं, लेकिन अपने देश के नाविकों की मौत पर एक शब्द भी नहीं बोले। दिल्ली में ऑटो वाले भाई अमेरिका के झंडे वाले पोस्टर फाड़ रहे हैं, लेकिन पीएम चुप हैं। उन्होंने इसे 'कायराना रवैया' और 'विफल विदेश नीति' बताया।
कांग्रेस की मांगें
- प्रधानमंत्री तुरंत राष्ट्र को संबोधित करें, शोक व्यक्त करें और परिवारों से बात करें।
- अमेरिका से माफी मांगने की मांग करें और कड़ी आपत्ति दर्ज कराएं।
- समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा की समीक्षा हो और जहां संभव हो उन्हें वापस बुलाया जाए।
नरेंद्र सरेंडर से तंज
कांग्रेस ने कहा कि पहले के प्रधानमंत्रियों ने देश का सम्मान हमेशा ऊपर रखा। इसने कहा कि पंडित नेहरू ने अपना रास्ता खुद चुना। इंदिरा गांधी ने अमेरिका की धमकियों को नजरअंदाज कर पाकिस्तान को दो टुकड़े किए। मनमोहन सिंह ने देवयानी खोबरागड़े मामले में सख्ती दिखाई और अमेरिका को माफी मांगनी पड़ी। पूर्व प्रधानमंत्रियों का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस ने तंज कसा, "मोदी जी का नाम नरेंद्र है लेकिन काम 'सरेंडर' वाला है।" पार्टी ने कहा कि जब तक मोदी इस मुद्दे पर चुप रहेंगे, देश की संप्रभुता और गौरव को ठेस पहुंचती रहेगी।
ट्रेड डील पर सवाल
कांग्रेस ने कहा है कि अब ख़बर है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमीसन ग्रीर भारत आ रहे हैं। इसने कहा, 'सभी को याद होगा कि मार्को रुबियो ने कहा था कि भारत, अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर का सामान खरीदेगा, लेकिन मोदी सरकार ने चूँ तक नहीं की थी, जबकि मलेशिया जैसे छोटे देश ने अमेरिकी डील को अमान्य घोषित कर दिया था।' सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, 'हमारा मानना है कि जिस अमेरिका ने हमारे लोगों को मारा और खेद जताने के बजाए लगातार हमारी बेइज्जती की और धमकाया, उसके ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव का भारत में आने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।'राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी
'पीएम आज्ञाकारी नौकर जैसा...: राहुल
भारतीय नाविकों की मौत के मामले में एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने पीएम मोदी को 'आज्ञाकारी नौकर जैसा' क़रार दिया था। उन्होंने कहा कि एक आजाद देश कभी भी ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन हमारे 'कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री' चुप हैं।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा था, "अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए: 'अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।' कोई उल्लंघन 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे Compromised PM? चुप। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं। Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।'