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राष्ट्रपति चुनाव: अकाली दल (बादल) भी आया द्रौपदी मुर्मू के साथ

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को लगातार विपक्षी दलों का समर्थन मिलता जा रहा है। अब बादलों की अगुवाई वाला शिरोमणि अकाली दल भी द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में उतर गया है। हालांकि पार्टी ने कहा है कि कुछ अहम मुद्दों पर अभी भी उसकी बीजेपी से दूरी बनी रहेगी। 

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए 18 जुलाई को मतदान होगा जबकि नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। 

अकाली दल ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर एनडीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था और हरसिमरत कौर बादल ने केंद्र सरकार से इस्तीफा दे दिया था। केंद्र सरकार ने पीछे हटते हुए कृषि कानूनों को वापस ले लिया था। 

उसके बाद दोनों दलों ने पंजाब में विधानसभा का चुनाव अलग-अलग लड़ा लेकिन दोनों के लिए ही यह अनुभव बेहद खराब रहा। 

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शिरोमणि अकाली दल ने कहा है कि द्रौपदी मुर्मू गरीब और आदिवासी वर्ग के प्रतीक के तौर पर उभरी हैं और उन्हें समर्थन देने के लिए पार्टी की कोर कमेटी में प्रस्ताव पास किया गया है। पार्टी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और कुछ बड़े नेताओं ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उन्हें पार्टी के फैसले से अवगत कराया। 

नड्डा ने मांगा था समर्थन

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को फोन कर राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करने की अपील की थी।

जेडीएस, जेएमएम क्या करेंगे?

जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडीएस भी एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के नाम का समर्थन कर सकता है। जेडीएस के अलावा झारखंड में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चला रहा झारखंड मुक्ति मोर्चा भी द्रौपदी मुर्मू के नाम का समर्थन कर सकता है। इस तरह के संकेत मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हालिया मुलाकात के बाद मिले हैं।

Draupadi Murmu support of Shiromani Akali Dal presidential election 2022  - Satya Hindi

हालांकि द्रौपदी मुर्मू की राष्ट्रपति चुनाव में जीत लगभग तय हो गई है क्योंकि एनडीए के पास अपने 49 फीसदी वोट हैं और बीते दिनों में कई विपक्षी दलों का समर्थन भी मुर्मू को मिल गया है। 

बीएसपी, बीजू जनता दल, वाईएसआर कांग्रेस द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में आगे आए हैं। महाराष्ट्र में हुए चुनावी घटनाक्रम के बाद मुर्मू को शिवसेना के बागी विधायकों का भी वोट मिलने की पूरी संभावना है। 

सिन्हा की उम्मीदवारी कमजोर?

इससे राष्ट्रपति चुनाव में कुछ विपक्षी दलों के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा की उम्मीदवारी कमजोर पड़ती जा रही है। सिन्हा के साथ कांग्रेस, एनसीपी, टीआरएस, आरजेडी, राष्ट्रीय लोकदल, सपा, नेशनल कॉन्फ्रेन्स, टीएमसी आदि दलों का समर्थन है। 

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