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आज़ाद को पार्टी महासचिव पद से हटाया, कांग्रेस का घमासान सड़कों पर

इस बात की आशंका काफी दिनों से जताई जा रही थी कि कांग्रेस अपने पुराने नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकती है और शुक्रवार को यह आशंका सच हो गई। क्योंकि आज़ाद कांग्रेस आलाकमान को चिट्ठी लिखने वाले नेताओं में शामिल थे। पार्टी ने उन्हें कांग्रेस महासचिव के पद से हटा दिया है। इससे कांग्रेस के अंदर चल रहा घमासान खुलकर सड़कों पर आ गया है। 

ग़ुलाम नबी आज़ाद को हरियाणा के प्रभारी पद से भी हटा दिया गया है। उनकी जगह विवेक बंसल को प्रभारी बनाया गया है। 

जितिन प्रसाद को मिली माफी

हालांकि पत्र लिखने वालों में शामिल एक और नेता जितिन प्रसाद को प्रमोशन मिला है और उन्हें पश्चिम बंगाल और अंडमान और निकोबार का प्रभारी बनाया गया है। पश्चिम बंगाल में कुछ ही महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और जितिन प्रसाद को इस राज्य का प्रभारी बनाने से पता चलता है कि पार्टी आलाकमान ने उन्हें माफ़ कर दिया है और उन पर भरोसा भी जताया है। 

रणदीप सुरजेवाला का क़द बढ़ा 

कांग्रेस आलाकमान ने पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला का क़द बढ़ाया है। सुरजेवाला को कांग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने वाले छह सदस्यीय पैनल में शामिल किया गया है। 

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प्रियंका गांधी के पास उत्तर प्रदेश के प्रभारी का पद बरकरार है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को महासचिव बनाए रखने के साथ ही पंजाब का प्रभारी बनाया गया है, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छोड़कर कांग्रेस मे आए तारिक़ अनवर को केरल और लक्षदीप का प्रभारी बनाया गया है। 

आज़ाद के अलावा, अंबिका सोनी, मोतीलाल वोरा और मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया गया है।
कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा पार्टी आलाकमान को लिखा पत्र लीक हो जाने के बाद चल रहा बवाल ग़ुलाम नबी आज़ाद के ख़िलाफ़ की गई इस कार्रवाई के बाद और बढ़ सकता है। इंदिरा से लेकर राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के साथ काम कर चुके आज़ाद ने हाल ही में न्यूज़ एजेंसी एएनआई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बेलाग होकर कई बातें कही थी। उसके बाद से उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की मांग पुरजोर ढंग से उठ रही थी। 
आज़ाद ने इंटरव्यू के दौरान कहा था, ‘23 साल से पार्टी में चुनाव नहीं हुए हैं। सत्ताधारी पार्टी बहुत मजबूत है। अगर मेरी पार्टी को 50 साल विपक्ष में बैठना है तो फिर चुनाव की कोई ज़रूरत नहीं है। मुझे अब कुछ नहीं बनना है। मैं 15 दफ़ा महासचिव रहने के साथ ही 5 प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुका हूं।’
कई राज्यों में प्रभारी रहते हुए कांग्रेस को जीत दिला चुके आज़ाद ने संगठन में चुनाव का पुरजोर समर्थन करते हुए एएनआई से कहा था, ‘इसका फ़ायदा कांग्रेस को ही होगा। जिन लोगों को प्रधानमंत्री, पार्टी अध्यक्ष बनना है, उन्हें ही इसका फ़ायदा मिलेगा। मैं 5-7 साल और एक्टिव राजनीति में रहूंगा। मुझे पार्टी अध्यक्ष या प्रधानमंत्री नहीं बनना है।’ 

आज़ाद पर बोला था हमला

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री और दो बार एमएलसी रह चुके नसीब पठान ने आज़ाद को बुरी तरह निशाने पर ले लिया था। खत्री ने कहा था, ‘आज़ाद ने अपने इंटरव्यू में कुछ राज्यों का जिक्र किया जिसमें यह दावा किया कि उन्हीं के दम पर उन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनी। लेकिन आप उत्तर प्रदेश को भूल गये जहां पर जब-जब आप प्रभारी बन कर आये कांग्रेस का सत्यानाश किया।’ 

‘आज़ाद को बाहर करे पार्टी’

इसके अलावा नसीब पठान ने चिट्ठी विवाद के बाद कहा था कि पार्टी को आज़ाद को बाहर कर देना चाहिए। पठान ने कहा था, ‘कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि यह विवाद ख़त्म हो चुका है। लेकिन आज़ाद ने इसके बाद भी मीडिया से बात की और इसे अपने फ़ेसबुक पेज पर डाला।’ नसीब पठान ने कहा था कि ऐसा करके आज़ाद ने पार्टी के अनुशासन को तोड़ा है और अब उन्हें पार्टी से आज़ाद कर दिया जाना चाहिए। 

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