क्या लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'दिमागी नक्सल' वाला बयान उन पर ही भारी पड़ गया है, ठीक वैसे ही जैसे सीजेआई सूर्यकांत अपने 'काकरोच' वाले बयान पर बुरी तरह घिर गए थे? क्या पीएम मोदी के करीबियों और दरबारियों ने इस विवाद को शांत करने के बजाय सरकार की फजीहत और बढ़ा दी है?
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