मणि शंकर अय्यर के हालिया बयान ने कांग्रेस के भीतर की खींचतान को फिर सुर्खियों में ला दिया। क्या यह आत्मालोचना है या आंतरिक संकट का संकेत? कांग्रेस के लिए मुसीबत हैं तो पार्टी उन्हें निकालती क्यों नहीं?
मणिशंकर अय्यर ने फिर से कांग्रेस में बवाल मचा दिया है। उन्होंने पहले केरल में वामपंथी सरकार लौटने की बात कही और अब वह कांग्रेस के नेताओं पर ही टूट पड़े। जब कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि पिछले कुछ सालों से अय्यर का कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है और वह अपनी क्षमता में बोलते या लिखते हैं तो अय्यर ने उन्हें टट्टू, पपेट कह डाला। उन्होंने शशि थरूर से लेकर जयराम रमेश तक पर हमला किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री मणि शंकर ने पार्टी के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा पर तीखा हमला किया। अय्यर ने कहा कि अगर पवन खेड़ा उन्हें पार्टी से निकालेंगे तो वे खुशी-खुशी पार्टी छोड़कर बाहर जाएंगे और उनको मुंहतोड़ जवाब देंगे। उन्होंने एएनआई से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी में हूं, मैंने अभी तक नहीं छोड़ी है। अगर पवन खेड़ा मुझे निकालने वाले हैं, तो मैं खुशी से बाहर जाकर मुंहतोड़ जवाब दूंगा।'
विवाद की शुरुआत
तिरुवनंतपुरम में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार 'विज़न 2031: डेवलमपेंट एंड डेमोक्रेसी' में अय्यर ने रविवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि विजयन अगले मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अय्यर ने पंचायती राज पर बात करते हुए कहा कि केरल गांधीजी के सपने को सबसे अच्छे तरीके से पूरा कर रहा है, जबकि यह राज्य मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट पार्टी द्वारा शासित है।
उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री के सामने मैं फिर से अपील करता हूं कि केरल को देश का सबसे अच्छा पंचायती राज राज्य बनाने के लिए कानून में बदलाव करें।' अय्यर ने कहा कि देश में पंचायती राज का कोई चैंपियन नहीं बचा है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा कि पार्टी ने इस मुद्दे को छोड़ दिया है।यह बयान इसलिए आया क्योंकि केरल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस वहां यूडीएफ़ गठबंधन के साथ एलडीएफ़ यानी वाम मोर्चा को चुनौती दे रही है। अय्यर का विजयन को अगला सीएम बताना कांग्रेस के लिए मुश्किल पैदा कर गया।
पवन खेड़ा की प्रतिक्रिया
इस पर पवन खेड़ा ने रविवार को एक्स पर लिखा, 'श्री मणि शंकर अय्यर पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं रखते। वे सिर्फ अपनी निजी क्षमता में बोलते और लिखते हैं।'
कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपाल ने भी सोमवार को अय्यर की भविष्यवाणी को उनकी व्यक्तिगत राय बताया और कहा कि यह पार्टी की ऑफिशियल पोजीशन को नहीं दिखाता। उन्होंने कहा कि अय्यर अब पार्टी में नहीं हैं।
इसके बाद अय्यर ने एएनआई से कहा, 'क्या आप सोच सकते हैं कि उस पार्टी की क्या हालत होगी जो केसी वेणुगोपाल जैसे राउडी को सरदार पटेल, राहुल गांधी के लेवल तक ले जाती है? जवाब में मुझे बस इतना ही कहना है।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमारी पार्टी इतनी बेवकूफ है कि उन्होंने केसी वेणुगोपाल जैसे लोगों को सरदार पटेल के पदों पर बिठा दिया है और पवन खेड़ा जैसे लोगों को प्रवक्ता बना दिया है।' उन्होंने पवन खेड़ा को पपेट यानी कठपुतली कहा। उन्होंने कहा कि खेड़ा सिर्फ जयराम रमेश की बात दोहराते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं गांधीवादी हूं, नेहरूवादी हूं, राजीववादी हूं, लेकिन राहुलवादी नहीं हूं।'
अय्यर ने यह भी कहा कि कांग्रेस में असहमति को कैसे हैंडल किया जाता है। पहले नेहरू और सुभाष बोस गांधी के खिलाफ थे, लेकिन गांधी ने उन्हें आगे बढ़ाया। आज कांग्रेस में असहमति पर पवन खेड़ा जैसे को प्रवक्ता बनाया जाता है। उनके लिए मेरे मन में कोई सम्मान नहीं, पूरा तिरस्कार है।
अय्यर ने शशि थरूर पर भी तंज कसा कि वे विदेश मंत्री बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं शशि थरूर से ज़्यादा बेमतलब के करियरिस्ट से कभी नहीं मिला। वह अब मोदी के विदेश मंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं।'
मणि शंकर अय्यर कौन?
मणि शंकर अय्यर यूपीए सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। 2017 में पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी के लिए पार्टी से निलंबित हुए थे, लेकिन 2018 में उन्हें वापस ले लिया गया। वे अक्सर विवादास्पद बयान देते हैं। एक विवादित टिप्पणी में अय्यर ने पहले कहा था, 'नरसिम्हा राव बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री थे क्योंकि उस मामले में बाबरी नहीं गिराई गई होती।' उन्होंने यह भी कहा था, 'वाजपेयी की सरकार भारत में आखिरी कांग्रेस सरकार थी।'
क्या होगा राजनीतिक असर
केरल चुनाव नजदीक हैं। अय्यर के बयान से कांग्रेस को नुक़सान हो सकता है, क्योंकि यह एलडीएफ़ को मजबूती देता दिख रहा है। पार्टी ने खुद को उनके बयान से अलग किया, लेकिन अय्यर ने पलटवार किया। कांग्रेस में आंतरिक कलह साफ दिख रही है। अब देखना है कि पार्टी क्या कदम उठाती है। अय्यर ने साफ कहा कि वे पार्टी में हैं और बाहर नहीं जाएंगे, जब तक निकाला न जाए।