प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा के संबोधन के बाद सरकार ने जब सर्वदलीय बैठक की घोषणा की तो राहुल गांधी ने साफ़ कह दिया कि प्रधानमंत्री मोदी से नहीं हो पाएगा? राहुल ने देश की विदेश नीति को ‘मोदी की पर्सनल नीति’ क्यों बताया?
ईरान युद्ध से बिगड़े हालात को क्या पीएम मोदी संसद में भाषण देकर और सर्वदलीय बैठक बुलाकर दुरुस्त कर पाएँगे? लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तो साफ़ कह दिया है कि पीएम मोदी से ये नहीं हो पाएगा। उन्होंने इस पूरे मामले में मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति मोदी का व्यक्तिगत प्रोजेक्ट बन गयी है।
राहुल ने कहा कि 'देश की विदेश नीति आज कंप्रोमाइज्ड है, क्योंकि पीएम मोदी खुद कंप्रोमाइज्ड हैं। मोदी सिर्फ़ वही करते हैं जो अमेरिका और इसराइल उनसे करवाना चाहते हैं। मोदी कभी भी भारत के हित के फ़ैसले ले ही नहीं सकते - और ये साफ़ दिख रहा है।
संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हमारी विदेश नीति प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत विदेश नीति बन गई है। हर कोई इसे यूनिवर्सल जोक समझता है। डोनाल्ड ट्रंप को ठीक-ठीक पता है कि पीएम मोदी क्या कर सकते हैं और क्या नहीं।'
ऑल पार्टी मीटिंग के सवालों पर राहुल ने कहा, 'मैं शामिल नहीं हो पाऊँगा, मेरा केरल में पहले से कार्यक्रम तय है। ...ठीक है ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है। डिबेट होनी चाहिए। पर आपने पूरा ढाँचा उड़ा दिया है। अब उसको आप ठीक नहीं कर सकते। उसको ठीक करने में बहुत समय लगेगा। प्रधानमंत्री मोदी तो कर ही नहीं सकते हैं। जो अमेरिका और इसराइल कहेगा वही प्रधानमंत्री मोदी करेंगे।'
राहुल ने संसद में पीएम मोदी के भाषण को अप्रासंगिक बताया और कहा, 'ऐसा लगना चाहिए कि वे भारत के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन कोई पोजीशन नहीं दिख रही। लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।' राहुल गांधी ने आगे कहा कि एलपीजी और ईंधन की बढ़ती क़ीमतें सिर्फ शुरुआत हैं। उन्होंने कहा, 'मोदी जी कहते हैं कि स्थिति कोविड की तरह संभल जाएगी, लेकिन वह भूल गए कि कोविड में कितने लोग मरे और कितनी त्रासदियां हुईं।'
'ईरान युद्ध में पाक की मध्यस्थता भारत के लिए झटका'
इससे पहले मंगलवार सुबह ही कांग्रेस ने ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता की रिपोर्टों के बाद पीएम मोदी और बीजेपी सरकार की विदेश नीति पर बड़ा हमला किया था। इसने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्टें सही हैं तो ईरान युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता भारत के लिए बहुत बड़ा झटका और उपेक्षा है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 'स्वघोषित विश्वगुरु' क़रार दिया।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की फ़रवरी 2026 में इसराइल की यात्रा की आलोचना की। यह यात्रा 25 और 26 फरवरी को हुई थी, ठीक दो दिन पहले जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए। जयराम रमेश ने कहा, "मोदी की अविवेकपूर्ण इसराइल यात्रा हमारे राजनीतिक इतिहास में एक विनाशकारी फ़ैसला साबित होगी। इससे हम उस स्थिति से पीछे धकेल दिए गए जहां भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था और निभानी भी चाहिए थी। प्रधानमंत्री की 'हगलोमेसी' (झप्पी कूटनीति) की पोल पूरी तरह खुल चुकी है। अब देश को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।"
भारत के ईरान से संबंध पहले घनिष्ठ रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी की इसराइल नीति से ईरान दूर होता दिखा। और युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले की उनकी इसराइल यात्रा के बाद तो स्थिति और भी बदल गई।
युद्ध शुरू होने के 25 दिन बाद सर्वदलीय बैठक
बहरहाल, राहुल का प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर हमला तब हुआ है जब मंगलवार को ही प्रधानमंत्री मोदी के राज्यसभा को संबोधित करने के बाद सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर बुधवार शाम 5 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इतनी देरी से सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने और संसद को संबोधित करने के पीएम मोदी के फ़ैसले की भी आलोचना की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में मध्य पूर्व संकट पर विस्तार से बात की और चेतावनी दी कि यह युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला चुका है और इसका असर लंबे समय तक रह सकता है।
पीएम मोदी की चेतावनी
राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीन हफ्ते से ज्यादा से चल रहा यह युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर चुका है और रिकवर होने में लंबा समय लगेगा।
- युद्ध से दुनिया में गंभीर ईंधन संकट पैदा हो गया है। भारत के लिए भी यह चिंता की बात है।
- व्यापार मार्ग बाधित हो गए हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद की सामान्य सप्लाई प्रभावित हुई है।
- हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। सरकार हर बदलती स्थिति पर नजर रख रही है और गंभीरता से फैसले ले रही है।
- इस संकट का असर लंबे समय तक रह सकता है। हमें धैर्य, संयम और शांत दिमाग से सामना करना होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य की चिंता
पीएम ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाज फंस गए हैं और उनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू सदस्य हैं। भारत कूटनीति के जरिए अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। हमारा लक्ष्य डी-एस्केलेशन यानी तनाव कम करना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर खोलना है।
खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। पीएम ने कहा कि संकट के समय देश में और विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद 3 लाख 75000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित वापस आ चुके हैं, जिनमें ईरान से 1000 से ज्यादा शामिल हैं।
आत्मनिर्भरता पर जोर
मोदी ने कहा कि हम सभी संभावित स्रोतों से गैस और कच्चा तेल खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले 11 सालों में हमने 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व बनाया है और आगे 65 लाख टन बढ़ाने का काम चल रहा है। साथ ही 70 करोड़ रुपये का शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट भी है। उन्होंने जोर देकर कहा, 'भारत के पास आत्मनिर्भर बनने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'
पीएम ने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्यों को ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। गरीबों और प्रवासी मजदूरों के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि हमें 'टीम इंडिया' के रूप में मिलकर चुनौतियों का सामना करना होगा। लेकिन राहुल गांधी ने पीएम मोदी की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।