एआई समिट में प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार किसी भी विरोध और असहमति को बर्दाश्त नहीं कर रही है। उन्होंने मोदी सरकार की तुलना नॉर्थ कोरिया की तानाशाही से क्यों की?
राहुल गांधी ने अब मोदी सरकार की तुलना उत्तर कोरिया की तानाशाही से कर दी है! उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा, 'मोदी जी, ये नॉर्थ कोरिया नहीं, भारत है। जब सत्ता खुद को राष्ट्र समझने लगे और असहमति को दुश्मन, तब लोकतंत्र मर जाता है।'
दरअसल, यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के विरोध में राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी पर हमला किया। उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि देश में असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साज़िश बताया जा रहा है। राहुल ने कहा कि आज भारत में कंप्रोमाइज्ड पीएम के राज में शांतिपूर्ण विरोध करना ही सबसे बड़ा अपराध बना दिया गया है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस मामले में आई है जिसमें यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। यह कार्रवाई इंडिया एआई समिट में यूथ कांग्रेस के 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' के मामले में हुई है। राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस के इस प्रदर्शन का बचाव किया है। राहुल गांधी ने कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र की आत्मा है, अपराध नहीं।
राहुल गांधी ने एक्स पर लंबा पोस्ट लिखा,
आज भारत में कंप्रोमाइज्ड पीएम के राज में शांतिपूर्ण विरोध करना ही सबसे बड़ा अपराध बना दिया गया है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को धीरे-धीरे ऐसी दिशा में धकेला जा रहा है, जहां असहमति को देशद्रोह और सवाल पूछने को साजिश बताया जाता है। राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता
राहुल ने दीं विरोध की आवाज़ दबाने की मिसालें
राहुल ने कई उदाहरण दिए कि कैसे सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को लाठी, मुकदमा और जेल मिल रही है।
- पेपर लीक से परेशान युवाओं ने अपने भविष्य के लिए आवाज़ उठाई तो लाठियों से जवाब मिला।
- महिला पहलवानों ने बीजेपी के प्रभावशाली नेता पर गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जाँच की मांग की, उनकी आवाज़ को बदनाम किया गया, आंदोलन कुचल दिया गया और उन्हें सड़कों से जबरन हटाया गया।
- बलात्कार पीड़िता के समर्थन में इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ तो न्याय की मांग को व्यवस्था के लिए असुविधा मानकर हटा दिया गया।
- युवा कांग्रेस ने देश के ख़िलाफ़ होने वाले यूएस ट्रेड डील का विरोध किया तो उन्हें 'देशविरोधी' बताकर गिरफ्तार कर लिया गया।
- जहरीली हवा के ख़िलाफ़ लोग खड़े हुए तो पर्यावरण की चिंता को भी राजनीति कहकर दबा दिया गया।
- किसानों ने अपने अधिकारों के लिए आंदोलन किया तो उन्हें देशविरोधी कहा गया। आंसू गैस, रबर बुलेट्स, पानी की बौछारें और लाठियाँ ही संवाद का तरीका बन गईं।
- आदिवासियों ने जल, जंगल, जमीन के हक के लिए आवाज उठाई, तो उन पर भी शक किया गया।
'पीएम सवालों से डरते हैं'
राहुल गांधी ने कहा, 'यह कैसा लोकतंत्र है जहां कंप्रोमाइज़्ड पीएम सवालों से डरते हैं? असहमति को कुचलना शासन का स्वभाव बनता जा रहा है। सवाल पूछना लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, उसकी ताकत है। लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब सरकार आलोचना सुनती है, जवाब देती है और जवाबदेह रहती है।'
यूथ कांग्रेस पर कार्रवाई
राहुल का यह बयान दिल्ली में हुए 'शर्टलेस प्रोटेस्ट' के मामले के बाद आया है। 20 फरवरी 2026 को भारत एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत मंडपम में युवा कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने बिना शर्ट के विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ नारे लगाए और टी-शर्ट पर राजनीतिक संदेश दिखाए। पुलिस ने इसे सुरक्षा भंग मानकर कार्रवाई की।
इस मामले में अब तक यूथ कांग्रेस के 11 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। इसमें भारतीय यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब और पूर्व प्रवक्ता भूदेव शर्मा भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने दंगा और दुश्मनी फैलाने जैसे आरोप लगाए हैं।गिरफ्तारियों के बाद बड़ा ड्रामा हुआ। कुछ कार्यकर्ता हिमाचल प्रदेश के शिमला भाग गए। दिल्ली पुलिस ने वहाँ जाकर उन्हें गिरफ्तार किया, लेकिन हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस पर अपहरण का केस दर्ज किया और उनकी गाड़ियाँ रोकीं। 24 घंटे तक दोनों पुलिस बलों के बीच तनाव रहा। आख़िरकार गुरुवार सुबह दिल्ली पुलिस को कार्यकर्ताओं के साथ वापस जाने की इज़ाज़त मिली।
यह घटना राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि यह उच्च सुरक्षा वाले कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करने की साजिश थी। राहुल गांधी के इस हमले से साफ़ है कि कांग्रेस अब विरोध प्रदर्शनों पर पुलिस कार्रवाई को लोकतंत्र के खिलाफ बताकर मोदी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।