राहुल गांधी ने अब नीट पेपर लीक को लेकर जेन ज़ी के लिए नयी मुहिम छेड़ दी है। उन्होंने ऑनलाइन पिटिशन अभियान शुरू किया है। संदेश छात्रों के लिए है। राहुल ने पेपर लीक, परीक्षा से जुड़ी दूसरी दिक्कतें, महंगी फीस और एजुकेशन सिस्टम को सपने तोड़ने वाला क़रार देते हुए छात्रों से ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान में जुड़ने को कहा है। तो क्या राहुल गांधी छात्रों का बड़ा आंदोलन खड़ा करने जा रहे हैं? या फिर हाल में ऑनलाइन बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' को जेन ज़ी का ऑनलाइन समर्थन मिलने पर कांग्रेस ने यह रणनीति बनाई है? इस सवाल का जवाब बाद में, पहले बात राहुल के नये अभियान और नये तेवर की।

राहुल दो दिन से नये तेवर में दिख रहे हैं। बिल्कुल वो पुराने और पारंपरिक नेता वाले अंदाज़ से अलग। नेता वाला भाषण नहीं। आकर्षक प्रजेंटेशन। एक टीचर, छात्र और एक्टिविस्ट की तरह। बुधवार को कोटा के उनके कार्यक्रम में यही सब दिखा। और अब उसी कड़ी में उन्होंने ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया।
जेन ज़ी को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा है, "अगर पेपर लीक, परीक्षा से जुड़ी समस्याओं या ज़्यादा फ़ीस की वजह से आपको परेशानी हुई है; अगर इस शिक्षा व्यवस्था ने आपके सपने तोड़ दिए हैं; अगर आपके परिवार ने आपकी पढ़ाई में अपनी ज़िंदगी भर की बचत लगा दी है, तो 'छात्रों की गूँज' आपकी आवाज़ है। यह सिर्फ़ एक कैंपेन नहीं है - यह आपकी माँगों को सीधे सरकार तक पहुँचाने का एक प्लेटफ़ॉर्म है। सस्ती शिक्षा। निष्पक्ष परीक्षाएँ। सम्मानजनक रोज़गार। इस आंदोलन से जुड़ें, अपने विचार साझा करें। पिटीशन पर साइन करें।"

कोटा में भव्य कार्यक्रम

इससे पहले बुधवार रात को राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में दशहरा ग्राउंड पर इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की। उन्होंने इस अभियान का नाम 'छात्रों की गूंज' नाम दिया है। कोटा देश का कोचिंग हब माना जाता है, जहां हर साल लाखों छात्र IIT, NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कार्यक्रम में हजारों छात्र-छात्राएं शामिल हुए। माहौल उत्सव जैसा था- बड़े स्टेज पर रैप गाने बज रहे थे, छात्र हेडबैंड और प्लेकार्ड लेकर पहुंचे थे। राहुल गांधी ने कहा, 
भारत की शिक्षा व्यवस्था सिलेक्शन सिस्टम नहीं, बल्कि रिजेक्शन सिस्टम बन गई है। यह छात्रों को कुचल रही है, दबा रही है। बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों पर बहुत दबाव पड़ रहा है, जो पूरे देश के भविष्य के लिए ख़तरनाक़ है।
राहुल गांधी

आगे की क्या योजना है?

कांग्रेस का कहना है कि 'छात्रों की गूंज' अभियान पूरे देश में चलेगा। एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के सहयोग से अगले महीने बड़े कार्यक्रम होने वाले हैं। देश के तीन बड़े शहरों में कोटा जैसे बड़े और युवाओं को जोड़ने वाले कार्यक्रम रखे गए हैं-
  • 10 जुलाई – इलाहाबाद
  • 11 जुलाई – पटना
  • 14 जुलाई – दिल्ली
राहुल गांधी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दे रहे हैं।

जेन ज़ी पर कॉकरोच पार्टी बनाम राहुल

तो राहुल गांधी का अब पूरा जोर जेन ज़ी पर है। इसी जेन ज़ी की वजह से कॉकरोच जनता पार्टी अचानक से अस्तित्व में आ गई। सोशल मीडिया पर इसका अकाउंट बना और दो-तीन दिन के अंदर लाखों फॉलोअर्स हो गए। दुनिया भर में कॉकरोच जनता पार्टी सुर्खियों में रही। कॉकरोच जनता पार्टी भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रही है।

कॉकरोच पार्टी को प्रदर्शन की इजाजत क्यों मिली?

राहुल गांधी के इस जेन ज़ी को जोड़ने की मुहिम को कॉकरोच जनता पार्टी के जेन ज़ी से जुड़ाव के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि कॉकरोच जनता पार्टी के जुड़ाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ सामने आ रही हैं। ये चर्चाएँ तब शुरू हुईं जब कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत दे दी। देश की महिला पहलवानों जैसी खिलाड़ियों और किसानों तक को प्रदर्शन की इजाजत नहीं देने वाली सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक के अमेरिका से दिल्ली के एयरपोर्ट पहुँचते ही प्रदर्शन करने की इजाज़त दे दी थी। ऐसा तब हुआ जब प्रदर्शन की इजाजत के लिए नियमानुसार कम से कम सात दिन पहले आवेदन देना होता है।

अब जब 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी फिर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रही है तो इसको फिर से इजाजत मिलने का वैसा ही भरोसा है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, 'हमने दिल्ली पुलिस को औपचारिक रूप से 20 जून को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और धरने के बारे में जानकारी दे दी है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि वे कल सुबह हमें जवाब देंगे। हमें भरोसा है कि पुलिस इजाजत दे देगी।'

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी सीजेआई सूर्यकांत के बेरोजगार युवाओं को 'कॉकरोच' कहे जाने वाले बयान पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ यह अभियान तेजी से वायरल हो गया। फिर यह आंदोलन के रूप में युवाओं की आवाज बनकर उभरा। यह अब जेन ज़ी का सबसे बड़ा डिजिटल राजनीतिक प्लेटफॉर्म बन गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके

और अब राहुल का ज़ेन ज़ी अभियान

राहुल गांधी ने कुछ दिनों पहले ही कोटा में युवाओं के लिए कार्यक्रम की घोषणा की थी। इस कार्यक्रम को नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दों से जोड़कर तैयार किया गया। कार्यक्रम में राहुल का पूरा जोर भी छात्रों के मुद्दों पर रहा। उन्होंने परीक्षा के नाम पर वसूले गए रुपये को 'लूट' क़रार दिया। राहुल गांधी ने आँकड़े देते हुए बताया कि सिर्फ NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB जैसी 5 बड़ी परीक्षाओं की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल 3.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं। यह राशि भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
 
राहुल ने कहा, 'शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास- इन पांच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर पैसा परिवार खुद उठा रहे हैं। बदले में मिलता है तनाव, बेरोजगारी और टूटते सपने।' उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को 'वसूली तंत्र' बताया और कहा कि यह अन्याय है।

पेपर लीक माफिया पर हमला

राहुल गांधी ने मांग की कि मोदी सरकार छात्रों पर नहीं, पेपर लीक करने वाले माफिया पर कार्रवाई करे। उन्होंने टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगाने की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार नाटक बंद करके असली समस्या हल करे।

छात्रों से सीधी बात

कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मंच पर पांच छात्रों से बात की। ये छात्र NEET, JEE और सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई, कोचिंग खर्च, सपनों और दबाव की कहानी सुनाई। राहुल ने कोटा में हुई छात्र आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए आकांक्षा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "आकांक्षा अब हमारे बीच नहीं है। वह डॉक्टर बनना चाहती थी। पेपर लीक होने के बाद उसने आत्महत्या कर ली। उसकी चिट्ठी में लिखा था- 'सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया।' लेकिन असली गलती शिक्षा व्यवस्था की है। हमें यह तय करना होगा कि कोई भी छात्र कभी अपनी जान देने की सोच तक न पहुंचे।"

अब राहुल ने कोटा के कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। यह जेन जी को आकर्षित करने वाला है। तो सवाल वही है कि क्या राहुल ने जेन ज़ी की ताक़त को पहचान लिया है और अब वह उनके सहारे छात्र आंदोलन शुरू करने वाले हैं?