धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर प्रोटेस्ट भले ही ख़त्म हो गया हो, लेकिन 'छात्रों पर बर्बरता' को लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं। राहुल गांधी ने इसको लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। राहुल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर जवाब मांगा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने पूछा कि इस कार्रवाई का आदेश किसने दिया और इसके लिए ज़िम्मेदार कौन है।

राहुल ने दो टूक कहा, "दिल्ली में शांति से प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स पर पैलेट गन, लाठियां और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। मैं 19 साल के साहिल लोचब से मिला। उसे पैलेट लगे, उसकी एक आंख जा सकती है। उसका 'क्राइम' क्या है? पेपर लीक खत्म करने और हमारे स्टूडेंट्स के लिए एक सही भविष्य की मांग करना।" इसके साथ ही राहुल ने अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा- "मेरे दो सवाल हैं-
  1. क्या आपने स्टूडेंट्स के खिलाफ पैलेट गन समेत जानलेवा बल के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी? अगर नहीं, तो किसने दी?
  2. क्या सादे कपड़ों में जो लोग स्टूडेंट्स को लाठियों से पीट रहे थे, वे पुलिस वाले थे या वॉलंटियर? उन्हें तैनात करने की इजाज़त किसने दी?
देश जवाब मांग रहा है।"

'छात्रों पर बर्बर हमला हुआ'

अमित शाह को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली में छात्र निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय सुरक्षा बलों ने उनके ख़िलाफ़ अत्यधिक बल प्रयोग किया। राहुल गांधी ने लिखा कि वह छात्रों पर हुए 'बर्बर हमले' के लिए जवाबदेही तय करने की मांग करते हैं।

उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध बल प्रयोग किया गया, जिसमें पैलेट गन और आंसू गैस जैसे हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल था। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई में सैकड़ों छात्र घायल हुए।
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छात्राओं के साथ बदसलूकी का भी आरोप

राहुल गांधी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ भी पुलिसकर्मियों ने मारपीट की और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर मामला पैलेट गन के इस्तेमाल का है, जिसने कई छात्रों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।

घायल छात्र साहिल का ज़िक्र

राहुल गांधी ने पत्र में 19 वर्षीय छात्र साहिल लोछाब का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने साहिल से मुलाकात की है, जिसकी आंख में कथित तौर पर पैलेट लगने से गंभीर चोट आई है। राहुल गांधी के मुताबिक डॉक्टरों का कहना है कि साहिल की एक आंख की रोशनी जाने की आशंका है।

उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई अन्य छात्रों और एक पत्रकार के गंभीर रूप से घायल होने की बातें सामने आई हैं।

राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल और सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से पीटने के मामलों में सवालों के जवाब मांगे हैं।

एक दिन पहले अमित शाह को ठहराया था जिम्मेदार

इससे पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी गृह मंत्री अमित शाह को छात्रों के खिलाफ हुई कथित हिंसा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों पर गोली चलाने, पैलेट गन और अन्य घातक हथियारों के इस्तेमाल की जिम्मेदारी अमित शाह पर है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग किया। राहुल गांधी लगातार छात्र आंदोलन का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की मुख्य मांगें साफ़ हैं। इनमें शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करना, छात्रों पर बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना और छात्रों को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लाना शामिल है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक मंत्री तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल है।

पहले भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे राहुल गांधी

जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन शुरू होने के बाद राहुल गांधी ने खुलकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था। वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर भी बैठे थे, जहां दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।

हाल के दिनों में राहुल गांधी ने बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर भी केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोला है। उनका कहना है कि देश में रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं में गहरा असंतोष है।

बहरहाल, राहुल गांधी के पत्र पर अभी तक केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद जारी है। विपक्ष पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगा रहा है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़रूरी क़दम उठाए गए थे।