राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी की 'गले मिलने वाली' विदेश नीति पर जमकर बरसे। उन्होंने 'रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन' के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमक्री की। राहुल गांधी मंच पर ही पार्टी नेता संदीप दीक्षित की ओर दौड़कर गए और उन्होंने उन्हें गले लगाया। अपने भाषण के दौरान उन्होंने विदेश नीति, चीन, पाकिस्तान, संसद, छात्र आंदोलन और केंद्र सरकार के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए।

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने इस पर हैरानी जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी नेताओं से गले मिलने की विदेश नीति का यह विचार कहां से आया। उन्होंने कहा, 'मुझे समझ नहीं आता कि उन्हें यह ख्याल कहां से आया कि विदेश नीति का मतलब जबरदस्ती गले मिलना है।' इतना कहने के बाद राहुल गांधी मंच पर मौजूद वरिष्ठ कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित की ओर तेजी से दौड़े और उन्हें गले लगा लिया। उनके इस अंदाज को प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी नेताओं से गले मिलने की शैली की मिमिक्री के रूप में देखा गया।
राहुल गांधी की इस मिमिक्री के बाद राजनीतिक हलकों में 2018 का वह चर्चित घटनाक्रम भी याद किया गया जब लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर भाषण खत्म करने के बाद राहुल गांधी अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास जाकर उन्हें गले लगे थे। उस समय भी यह घटना काफी चर्चा में रही थी।

ईरान-अमेरिका विवाद का किया ज़िक्र

राहुल गांधी ने अपने भाषण में हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक अवसर गंवा दिया है। उन्होंने कहा कि यदि आज इंदिरा गांधी जैसा नेतृत्व होता तो भारत अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता था।
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राहुल गांधी ने कहा, 'ईरान हमारा पुराना मित्र है। अमेरिका और रूस से भी हमारे अच्छे संबंध रहे हैं। ऐसे समय में भारत दोनों देशों के बीच संवाद की पहल कर सकता था, लेकिन हमारी जगह पाकिस्तान सक्रिय हो गया और नरेंद्र मोदी देखते रह गए।'

चीन को लेकर भी सरकार पर निशाना

राहुल गांधी ने चीन के साथ सीमा विवाद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चीन ने भारतीय सैनिकों को अपनी ही जमीन पर गश्त करने से रोका, लेकिन सरकार ने इस मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी की घटना के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत की एक इंच जमीन पर किसी का कब्जा नहीं है, जबकि सेना की स्थिति अलग थी।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब भारतीय सेना चीन से बातचीत करने गई तो चीनी पक्ष ने प्रधानमंत्री के बयान का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'सरकार ने इस मुद्दे पर देश का नुकसान किया। पूरी सरकार का ध्यान देश की सुरक्षा से ज्यादा अपनी राजनीतिक व्यवस्था मजबूत करने और चंद बड़े उद्योगपतियों से संबंध बनाए रखने पर है।'

पीएमओ से जानकारी मिलने का दावा

राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के अंदर से भी कई जानकारियां मिलती रहती हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें यह जानकारी किस माध्यम से मिलती है और न ही इस दावे के समर्थन में कोई प्रमाण पेश किया।

'इस्तीफ़ा देने तक मोदी-शाह को सोने नहीं देंगे'

राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष के आंदोलन और जनता के दबाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह परेशान हैं। उन्होंने कहा, 'हमारा काम बहुत आसान है। हम इन्हें पागल कर देंगे। मैं आपको बता रहा हूं कि आजकल नरेंद्र मोदी रात में सो नहीं पाते। इसके कई कारण हैं, कुछ सबको दिखाई देते हैं और कुछ छिपे हुए हैं।'

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब तक नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने पदों से इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष उनका राजनीतिक रूप से लगातार विरोध करता रहेगा।

अमित शाह पर भी साधा निशाना

राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा, 'अमित शाह को कभी चाणक्य कहा जाता था, कभी सरदार पटेल। लेकिन वे 20 दिनों तक संसद में दिखाई नहीं दिए।' उन्होंने आरोप लगाया कि पहली बार सरकार को महसूस हुआ है कि देश की जनता अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

राहुल गांधी ने अपने हालिया धरने का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे प्रधानमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन कर रहे थे, तब वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने उनसे कहा कि उन्हें वहां से हट जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई पत्रकार निजी तौर पर उनसे कहते हैं कि देश में जो कुछ हो रहा है वह सही नहीं है, लेकिन नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे खुलकर बोल नहीं पाते। राहुल गांधी ने कहा, 'नेशनल स्पिरिट नाम की भी कोई चीज होती है। हम कुछ लोगों को देश पर अपनी मनमर्जी नहीं थोपने देंगे।'
राहुल गांधी के इस भाषण को कांग्रेस ने सरकार की विदेश नीति और संसद में सरकार के रवैये पर तीखा राजनीतिक हमला बताया है। वहीं बीजेपी की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि माना जा रहा है कि राहुल गांधी की टिप्पणियों और मंच पर की गई मिमिक्री को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।