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घर का पता 'लोक कल्याण मार्ग' रखने से लोगों का कल्याण नहीं: राहुल

कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर में कटौती को मंजूरी देने के फ़ैसले के लिए राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर हमला किया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री ने साढ़े छह करोड़ कर्मचारियों का भविष्य बर्बाद करने वाला काम किया है।

राहुल ने मोदी सरकार के दौरान कर्मचारियों के पीएफ़ पर मिलने वाले ब्याज में कटौती किए जाने की एक रिपोर्ट को ट्वीट करते हुए कहा है कि घर का पता लोक कल्याण मार्ग रख लेने भर से लोगों का कल्याण नहीं हो जाता है।

कांग्रेस नेता ने अपने ट्वीट में मोदी सरकार पर देश में महंगाई बढ़ाने और कमाई घटाने वाला मॉडल लागू का आरोप लगाया है। राहुल ने यह हमला तब किया है जब देश में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है।

खुदरा महंगाई 8 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है तो थोक महंगाई भी क़रीब तीन दशक में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गयी है। अप्रैल में थोक महंगाई 15.08% हो गई है। 

थोक महंगाई सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति अब लगातार तेरहवें महीने दोहरे अंकों में रही है। वास्तव में थोक मूल्य मुद्रास्फीति एक साल में दोगुनी हो गई है। मार्च 2021 में यह सिर्फ़ 7.89 प्रतिशत थी। पिछले हफ्ते जारी आँकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई भी अप्रैल में 8 साल के उच्च स्तर 7.79 फीसदी पर पहुंच गई है। 

यह लगातार चौथा महीना है जब महंगाई दर रिजर्व बैंक द्वारा तय सीमा से ऊपर है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने इस महंगाई को 6 प्रतिशत की सीमा के अंदर रखने का लक्ष्य रखा है। यानी मौजूदा महंगाई की दर लगातार चौथे महीने ख़तरे के निशान के पार है।

अब इस महंगाई का असर देश के विकास पर भी पड़ना स्वाभाविक है। जानकारों का कहना है कि अभी जो जीडीपी के आँकड़े आए हैं उनमें भी महंगाई का असर देखा जा सकता है। 31 मई को ही सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारत की जीडीपी दर के आँकड़े जारी किए हैं। इसने कहा है कि बीते वित्त वर्ष में जीडीपी 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जबकि जनवरी-मार्च तिमाही यानी चौथी तिमाही के लिए जीडीपी दर 4.1 प्रतिशत रही। चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर कम होती हुई दिखती है क्योंकि इससे पहले वाली यानी दिसंबर 2021 में समाप्त हुई तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.4 रही थी। दूसरी तिमाही में यह 8.5% और पहली तिमाही में 20.3% रही थी।

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बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के बाद और खासकर उनके नोटबंदी के फ़ैसलों के बाद राहुल गांधी उनपर अर्थव्यवस्था को तबाह करने का आरोप लगाते रहे हैं। राहुल दावा करते रहे हैं कि अर्थव्यवस्था से एकाएक नोटों के निकाले जाने के बाद अर्थव्यवस्था में सुस्ती आ गई। लोगों के पास खरीदने को पैसे नहीं थे और इस वजह से मांग कम हुई। कहा जाता है कि जब नोटबंदी के आघात से अर्थव्यवस्था उबर ही रही थी कि जीएसटी यानी माल एवं सेवा कर को भी सही तरीक़े से नहीं लागू किए जाने से मार पड़ी। 

इन दो झटकों से अर्थव्यवस्था उबर ही रही थी कि कोरोना महामारी का असर हुआ। इस दौरान सरकार ने अचानक से लॉकडाउन लगा दिया और इससे भी अफरा-तफरी का माहौल रहा। अब जब उन झटकों से अर्थव्यवस्था से उबर रही है तब महंगाई के बेकाबू होने की ख़बरें आ रही हैं।

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