राज्यसभा चुनाव नजदीक आते ही फिर से 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' शुरू हो गई है। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के अपने विधायकों को कर्नाटक शिफ्ट कर दिया है। इंडिया गठबंधन झारखंड के अपने विधायकों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। इसका मक़सद है कि वोटिंग से पहले कोई क्रॉस वोटिंग न हो और पार्टी के विधायक एकजुट रहें। ऐसा इसलिए कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक हैं, लेकिन बीजेपी ने सीट जीतने की अपनी क्षमता से एक अधिक उम्मीदवार उतार दिया है। जाहिर है कि कांग्रेस को हॉर्स ट्रेडिंग का डर सता रहा है। झारखंड में भी कांग्रेस के सामने कुछ इसी तरह के हालात बन रहे हैं।

मध्य प्रदेश में क्या है स्थिति?

मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं, लेकिन प्रभावी संख्या 229 है। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 58 फर्स्ट प्रेफरेंस वोट चाहिए। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, इसलिए वह दो सीटें आसानी से जीत सकती है। बीजेपी ने दो उम्मीदवारों राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव राजनेश अग्रवाल को पहले ही मैदान में उतार दिया था। लेकिन सोमवार को आखिरी दिन भाजपा ने चौंकाने वाले अंदाज में तीसरे उम्मीदवार के रूप में मध्य प्रदेश मत्स्य कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को भी नामांकन करा दिया। यह तीसरा उम्मीदवार भाजपा की तरफ से सरप्राइज था। पार्टी ने तीन दिन तक केंद्र की लीडरशिप से बात करके यह फ़ैसला लिया।
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कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवार के रूप में पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है। कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, लेकिन एक विधायक सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण वोट नहीं डाल सकता। इसके साथ ही सागर की विधायक निर्मला सप्रे हाल के महीनों में बीजेपी नेताओं के साथ मंच साझा करती रही हैं और कांग्रेस की बैठक में नहीं आ रही हैं। इसके बावजूद कांग्रेस एक राज्यसभा सीट आसानी से जीत सकती है। लेकिन बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार उतारकर कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है।

बीजेपी को कितने वोट चाहिए

बीजेपी को तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए आठ और वोट चाहिए जिससे कि 58 विधायकों की संख्या पूरी हो सके। सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी नेता कमलेश डोडियार का बीजेपी को समर्थन मान लेने के बाद भी ये संख्या ही चाहिए। कांग्रेस को डर है कि बीजेपी इन आठ विधायकों की कमी को पूरा करने के लिए क्रॉस वोटिंग कराने की कोशिश करेगी।

कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग के डर को लेकर ही कांग्रेस पार्टी हाई कमान ने फ़ैसला किया है कि सभी कांग्रेस विधायकों को पार्टी शासित राज्य कर्नाटक में शिफ्ट कर दिया जाए।

कांग्रेस विधायक दल की देर रात लीडर ऑफ़ अपोजिशन उमंग सिंघार के घर बैठक हुई। बैठक में इस प्रस्ताव पर विधायकों से बात की गई। विधायकों को जल्द ही राज्य से बाहर भेजने पर चर्चा हुई।

झारखंड में भी क्रॉस वोटिंग का डर

झारखंड में भी कांग्रेस सहित इंडिया गठबंधन ने इसी तरह की रणनीति अपनाने की तैयारी की है। पार्टी के 16 विधायकों को तेलंगाना भेजने की योजना है। वे 18 जून को वोटिंग होने तक वहां रहेंगे। न्यूज़18 की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि विधायकों को एक रिसॉर्ट में ठहराने की व्यवस्था की जा रही है ताकि कोई आखिरी समय में तोड़-फोड़ या डिफेक्शन न हो। हालाँकि पार्टी ने अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।
झारखंड में राज्यसभा की दूसरी सीट पर मुकाबला और भी कड़ा हो गया है क्योंकि बीजेपी ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दे दिया है। इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए 28 वोट चाहिए। हर वोट बहुत कीमती है। यदि इंडिया गठबंधन के एक भी विधायक ने क्रॉस वोटिंग की तो इसके दूसरे उम्मीदवार का जीतना मुश्किल हो जाएगा। बीजेपी के निर्दलीय को समर्थन दे देने से कांग्रेस के लिए अब और भी एहतियात बरतने की नौबत आ गई है।

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स क्यों?

राज्यसभा चुनाव में विधायक ही वोटर होते हैं। कई बार पार्टियां विधायकों को होटल या रिसॉर्ट में रखकर उनकी निगरानी करती हैं ताकि विपक्षी पार्टी उन्हें तोड़ न सके या पैसे-प्रलोभन से प्रभावित न कर सके। यह तरीका पिछले कई चुनावों में देखा गया है।
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कांग्रेस का कहना है कि वह अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाया जा रहा है। बीजेपी की तरफ से अभी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख बीत चुकी है और अब सस्पेंस बना हुआ है। दोनों राज्यों में राजनीतिक गलियारों में इस शिफ्टिंग की खबर गरम चर्चा का विषय बनी हुई है।