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पूर्व सांसद संदीप दीक्षित बोले- हमें नहीं पता कांग्रेस में हमारा नेता कौन है

लोकसभा चुनाव 2019 में बुरी तरह परास्त होने के बाद कांग्रेस में हालात ख़राब होते जा रहे हैं। कांग्रेस के कुछ बाग़ी नेताओं की ओर से बीते साल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी गई थी और उसके बाद पार्टी में खासा हंगामा हुआ था। इन बाग़ी नेताओं के गुट को G-23 गुट कहा जाता है। 

ऐसे वक़्त में जब पांच राज्यों में चुनाव का बिगुल बज चुका है, G-23 गुट के नेताओं के जम्मू में शांति सम्मेलन करने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता चिंतित हैं कि कहीं पिछले साल जैसा भूचाल फिर खड़ा न हो जाए। 

दिल्ली में दो बार कांग्रेस के सांसद रहे संदीप दीक्षित पार्टी के ताज़ा हालात को लेकर क्या सोचते हैं, इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास ने सत्य हिन्दी के लिए उनसे बातचीत की। 

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संदीप दीक्षित उन नेताओं में से हैं, जिन्होंने कांग्रेस में अध्यक्ष न चुने जाने के मसले को सबसे पहले उठाया था। राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और तब से लेकर अब तक पार्टी को स्थायी अध्यक्ष नहीं मिल सका है। 

हम सामूहिक निर्णय नहीं ले सकते 

दीक्षित ने बातचीत में कहा कि अगर राहुल फिर से कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते तो वह इसका सम्मान करते हैं और ऐसे वक़्त में सीनियर नेताओं की जिम्मेदारी होनी चाहिए थी कि हम किसी नेता को कांग्रेस अध्यक्ष चुनें। लेकिन पता चला कि हम सामूहिक निर्णय नहीं ले सकते हैं और व्यक्तिगत पसंद के आने नहीं जा सकते हैं। 

कांग्रेस के ताज़ा हालात पर देखिए चर्चा- 

यह पूछे जाने पर कि राहुल अगर अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं तो ऐसे में पार्टी का भविष्य क्या है?, दीक्षित ने अपनी बात को दोहराया और कहा कि सभी की जिम्मेदारी है कि नए नेता और उनकी टीम को चुना जाए लेकिन इसमें हम फ़ेल रहे हैं। पूर्व सांसद ने कहा कि जिस भी नेता को अध्यक्ष चुना जाएगा सभी उनके नेतृत्व में काम करेंगे और यह बात कि हम नए नेतृत्व में काम नहीं कर पाएंगे, यह समस्या हमारे बड़े नेताओं की है। 

प्रो राहुल-एंटी राहुल जैसा ग्रुप नहीं

दीक्षित ने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस में प्रो राहुल-एंटी राहुल या प्रो कांग्रेस-एंटी कांग्रेस जैसा कोई ग्रुप है। ज़्यादातर बड़े नेता जानते हैं कि पार्टी इस समय मुश्किल हालत में है लेकिन ये इस बात पर संतोष करते हैं कि प्रदेशों में उनकी कुर्सियां बची रहें बाक़ी हिंदुस्तान में कांग्रेस भाड़ में जाए। सीनियर नेताओं की यह प्रवृत्ति ठीक नहीं है।” 

जम्मू में हुए शांति सम्मेलन में वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा सहित बाक़ी नेताओं के तमाम सवाल उठाने पर दीक्षित ने कहा, “कांग्रेस में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो यह नहीं जानता है कि हमारी क्या दिक़्कतें हैं। क्या हम लोगों ने जानबूझकर कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों को कमजोर नहीं किया है और इसमें सब भागीदार हैं।” 

पूर्व सांसद ने कहा, “जब 2019 में कांग्रेस संकट में थी, तब हम सिर पर कफन बांधकर क्यों नहीं निकले। G 23 के नेताओं की भी उतनी ही जिम्मेदारी है जितनी बाक़ी लोगों की। हमारे वहां ऐसे लोकतांत्रिक प्लेटफ़ॉर्म्स नहीं हैं कि हम अपनी बात को खुलकर, अच्छी भावनाओं के साथ कह सकें।”

हालांकि उन्होंने अपनी बात को साफ किया कि ताज़ा हालात में कांग्रेस कई चीजों में फंसी हुई है लेकिन अगर कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी नहीं होती तो इस तरह के बयान नहीं आते। उन्होंने कहा कि उनकी बातें कांग्रेस नेतृत्व को पसंद नहीं आएंगी। 

कई बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के बेटे संदीप ने कहा कि वह पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनके लिए पार्टी सबसे पहले है न कि कोई व्यक्ति। 

Sandeep dikshit on congress g23 leaders   - Satya Hindi

पार्टी में G 23 गुट के नेताओं के साथ बातचीत कैसे शुरू होगी, इस सवाल पर संदीप दीक्षित ने कहा, “अभी हमें यह पता नहीं है कि हमारा नेता कौन है। हमारे पास विचारधारा है लेकिन कमांडर न होने से मुश्किलें बढ़ जाती हैं। आख़िर कौन वो ग्रुप है, जो अगले 10-15 साल तक हमारा नेतृत्व होगा।” 

चिट्ठी लिखने से काम नहीं चलेगा

दीक्षित ने कहा, “हमारे पास पूर्व कैबिनेट मंत्री से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री, प्रदेश कांग्रेस कमेटियों तक बड़े पदाधिकारी हैं ये लोग मिल-बैठकर तय क्यों नहीं करते कि हम कुछ करें, आर्टिकल लिखने और चिट्ठियां लिखने से पार्टियां नहीं बनती बल्कि बायोडाटा बनता है।” 

कांग्रेस की आज जो हालत है, उसके लिए कौन जिम्मेदार है, इस सवाल के जवाब में दीक्षित ने कहा, “हम सब इसके लिए जिम्मेदार हैं और इसमें G 23 गुट के नेता भी शामिल हैं। कुछ लोग इस बात से डरते हैं कि कहीं नेतृत्व में बदलाव न हो जाए और ऐसे लोग जिनकी कांग्रेस में अभी सत्ता में भागीदारी है और वो लोग कुंडली मारकर बैठे हैं।” 

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बीते साल अगस्त में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में हुए हंगामे के बाद सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और कहा गया था कि 6 महीने के अंदर पार्टी में अध्यक्ष पद का चुनाव कराया जाएगा लेकिन 6 महीने का वक़्त बीतने के बाद भी इस दिशा में कुछ हुआ हो, ऐसा नहीं लगता। इसके अलावा G 23 गुट के ग़ुलाम नबी आज़ाद सहित बाक़ी नेता पार्टी में आतंरिक चुनाव की मांग भी कई बार कह चुके हैं। 

दीक्षित ने कहा कि कांग्रेस में ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो सिर पर पट्टा बांधकर पार्टी को मजबूत करने के लिए निकल पड़ें और हमें कांग्रेस वॉरियर्स की ज़रूरत है।
इस बीच कपिल सिब्बल कांग्रेस में प्रभावी नेतृत्व न होने की बात कहने को लेकर बाक़ी नेताओं के निशाने पर रहे। जम्मू में जुटे सारे नेता कांग्रेस में लंबा वक़्त गुजार चुके हैं और अनुभवी हैं, ऐसे हालात में पार्टी आलाकमान को इनसे बातचीत कर उनकी समस्याओं या उनकी मांगों का हल निकालना चाहिए। 
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