मैंने उत्तर प्रदेश के ज़मींदारों के बारे में एक क़िस्सा सुनाया था, जिनके पास ख़ूब ज़मीन और बड़ी हवेलियाँ थीं। भूमि सीलिंग क़ानून के कारण, उनकी ज़मीन कम हो गई थी। हवेलियाँ बनी रहीं। लेकिन उनके संरक्षण और मरम्मत करने के लिए उनकी क्षमता ही नहीं है।
उस बैठक में यह कयास लगाए जा रहे थे कि वह तीसरे मोर्चे के गठन के लिए विरोधी दलों को एकजुट करने का प्रयास था जिसे बाद में यह कहकर खारिज किया गया था कि वह सिर्फ़ मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित की गई थी।