राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ लंबी बैठक के बाद शशि थरूर ने कहा कि सभी मुद्दों का समाधान हो गया है। कांग्रेस की आंतरिक राजनीति के लिहाज़ से इसका क्या मतलब है?
शशि थरूर, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी
हाल में पीएम मोदी और उनकी कुछ नीतियों की तारीफ़ करते रहने वाले कांग्रेस नेता शशि थरूर ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की तस्वीर को बड़े उत्साह के साथ साझा किया। उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर उन्होंने चर्चा की और उन्हें पता चल गया कि वे एक ही जैसे सोचते हैं। उनका यह बयान तब आया है जब हाल में पीएम मोदी व उनकी कुछ नीतियों की तारीफ़ पर थरूर को कांग्रेस में ही विरोध का सामना करना पड़ा है। सवाल तो यहाँ तक उठने लगे थे कि थरूर कब पार्टी से बाहर होंगे या बाहर किए जाएँगे?
इसी बीच, तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से करीब दो घंटे की लंबी बैठक की। बैठक के बाद थरूर ने कहा कि सभी मुद्दे सुलझ गए हैं और अब सब कुछ ठीक है। वे पार्टी के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।
कांग्रेस की बैठकों में नहीं गये थे थरूर
पिछले कुछ महीनों से थरूर और कांग्रेस के बीच तनाव की ख़बरें आ रही थीं। कई बार थरूर की पार्टी से नाराजगी दिखी। वे महत्वपूर्ण बैठकों में नहीं गए या कुछ फैसलों पर अलग राय रखी। हाल ही में कोच्चि में एक बड़ी महापंचायत हुई थी, जिसका उद्घाटन राहुल गांधी ने किया। राहुल गांधी ने भाषण में मंच पर मौजूद कई नेताओं का नाम लिया, लेकिन थरूर का नाम नहीं लिया। कई रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इससे थरूर को बुरा लगा और उन्होंने इसे कथित तौर पर अपमान माना।
रिपोर्ट है कि उन्होंने इस बारे में पार्टी के केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल को बताया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि थरूर ने पार्टी में आ रही दिक्कतों के बारे में विस्तार से बात की। पता चला है कि उन्होंने खास तौर पर कोच्चि में हाल ही में हुई बड़ी महापंचायत में हुए 'अपमान' का ज़िक्र किया, जिसका उद्घाटन पिछले हफ़्ते राहुल ने किया था।पिछले हफ्ते दिल्ली में ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी की एक अहम बैठक हुई थी, जिसमें केरल के विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाई जानी थी। थरूर उस बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे अफ़वाहें और तेज़ हो गईं कि वे पार्टी में खुद को अनचाहा महसूस कर रहे हैं।
गुरुवार को बैठक में क्या हुआ?
बैठक में राहुल गांधी और थरूर के बीच काफ़ी ज़्यादा बातचीत हुई। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने थरूर से कहा कि पार्टी को उनकी बहुत ज़रूरत है। वे केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ़ के लिए चुनाव प्रचार करें। केरल में बड़े फ़ैसले लेते समय थरूर को शामिल किया जाएगा और उन्हें सब कुछ पता रहेगा। राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी को एकजुट होकर केरल जीतना है।
के.सी. वेणुगोपाल ने इस बैठक को करवाने में मदद की। थरूर ने अपनी नाराजगी और पार्टी में आने वाली मुश्किलों के बारे में विस्तार से बताया। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राहुल गांधी ने थरूर से पुरानी बातें भूलने को कहा और कहा कि पार्टी थरूर के योगदान को महत्व देती है। बैठक के बाद थरूर ने मीडिया से कहा, 'हमने मेरे दो पार्टी लीडरों - लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष - के साथ चर्चा की। बहुत अच्छी, रचनात्मक बातचीत हुई। सब ठीक है, हम एक ही राय रखते हैं और साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं।'
जब उनसे पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर बात हुई, तो थरूर ने कहा, "नहीं, ऐसा कभी मुद्दा नहीं था। मैं किसी पद का उम्मीदवार बनने में दिलचस्पी नहीं रखता। मैं सांसद हूं और मेरे वोटरों का भरोसा मेरे पास है। यही मेरा काम है।"
केरल चुनाव में थरूर की अहमियत
केरल में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए थरूर बेहद अहम हैं। अगले कुछ महीनों में कई राज्यों में चुनाव हैं, लेकिन केरल ही एक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस को जीतने का अच्छा मौका दिखता है। तमिलनाडु में कांग्रेस कमजोर है, पश्चिम बंगाल में हाशिए पर है और असम में जीतना मुश्किल है। इसलिए पार्टी थरूर को साथ रखना चाहती है, क्योंकि वे तिरुवनंतपुरम से मजबूत सांसद हैं और पार्टी के लिए एक बड़ा चेहरा हैं।यह बैठक पार्टी में एकता का संदेश देती है। थरूर की नाराजगी दूर होने से कांग्रेस को केरल चुनाव की तैयारी में मजबूती मिलेगी।