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पीठ पीछे षड्यंत्र किया, चाचा का संसदीय दल का नेता बनना ग़लत: चिराग

चाचा पशुपति पारस की अगुवाई में पांच सांसदों की बग़ावत के बाद मुश्किलों से घिरे एलजेपी के नेता चिराग पासवान ने बुधवार को इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेन्स की। चिराग ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में एलजेपी को लगभग 6 फ़ीसदी वोट मिले और यह एक बड़ी जीत थी। 

एलजेपी से बग़ावत करने वाले पांच सांसदों में पशुपति पारस के अलावा उनके बेटे प्रिंस राज और तीन अन्य सांसद- चंदन सिंह, वीणा देवी और महबूब अली शामिल हैं। इन सांसदों ने पशुपति पारस को एलजेपी संसदीय दल का नेता चुनने के बाद सूरजभान सिंह को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया है। 

जबकि चिराग ने इन पांचों सांसदों को पार्टी से निलंबित कर दिया है। बुधवार को पटना और दिल्ली में एलजेपी के कार्यकर्ताओं ने चिराग पासवान के समर्थन में प्रदर्शन किया है जबकि बाग़ी गुट के कार्यकर्ता भी जोर लगा रहे हैं। 

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चिराग ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने नतमस्तक होना पड़ता जो कि उनकी नीतियों के ख़िलाफ़ था, इसलिए वह अकेले चुनाव मैदान में उतरे। पशुपति पारस कह चुके हैं कि बिहार चुनाव में एलजेपी का अकेले लड़ने का फ़ैसला एकतरफ़ा था और इससे पार्टी को नुक़सान हुआ है। 
Split in LJP chirag slams pashupati paras - Satya Hindi

चिराग ने कहा कि चाचा उनसे कहते तो वे उन्हें खुशी-खुशी से संसदीय दल का नेता बना देते लेकिन उन्हें नेता चुने जाने की प्रक्रिया पार्टी के संविधान के हिसाब से ग़लत है। उन्होंने कहा कि नेता चुनने की शक्ति केंद्रीय संसदीय बोर्ड के पास है। 

जमुई से सांसद पासवान ने कहा, “मैंने अंत तक कोशिश की कि पार्टी और परिवार को एक साथ रखूं और मेरी ये भी जिम्मेदारी है कि पार्टी में अनुशासन बनाए रखूं।” चिराग ने कहा कि जब वे बिस्तर पर थे, बीमार थे और उनकी पीठ पीछे यह षड्यंत्र बुना गया जबकि उन्होंने बिहार चुनाव के बाद से ही उनसे बात करने की लगातार कोशिश की और इसके बाद होली के दिन एक पत्र भी लिखा।  

चिराग ने इस पुराने पत्र को मंगलवार को ट्विटर पर जारी किया था। इसमें लिखा है कि पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद चाचा को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए था लेकिन चाचा ने उनसे बात करना ही बंद कर दिया। 

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ओम बिड़ला को लिखा पत्र 

चिराग ने बुधवार को लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर अपील की है कि वे पशुपति पारस को एलजेपी के संसदीय दल का नेता चुनने के फ़ैसले पर पुनर्विचार करें और उनके पक्ष में नया सर्कुलर जारी करें जिसमें उनके ही लोकसभा में संसदीय दल का नेता होने की बात लिखी हो। 

उन्होंने इस पत्र में एलजेपी के संविधान के अनुच्छेद 26 का हवाला दिया है और इसमें वही बात कही गई है जिने उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कहा है। अनुच्छेद 26 के मुताबिक़, एलजेपी में केंद्रीय संसदीय बोर्ड इस बात का फ़ैसला करता है कि लोकसभा में पार्टी का नेता कौन होगा। चिराग ने लिखा है कि इस तरह पशुपति पारस का संसदीय दल का नेता चुना जाना पार्टी के संविधान के ख़िलाफ़ है। 

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