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कितने और भ्रष्टाचार के आरोपियों को पार्टी में शामिल करेगी बीजेपी?

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के चार सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इनमें से दो सांसद ऐसे हैं जिन्हें कभी बीजेपी ने भ्रष्ट बताया था। इन सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद यही कहा जा सकता है कि कोई भी नेता तभी तक भ्रष्टाचारी है जब तक वह विपक्षी दल में हो। बीजेपी में आते ही वह स्वच्छ छवि का हो जाता है। टीडीपी के जो चार सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं, उनमें से दो के ख़िलाफ़ सीबीआई, आयकर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जाँच चल रही है। बीजेपी ने इन सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल करके राज्यसभा में भी एनडीए को  बहुमत मिलने की दशा में क़दम बढ़ा दिए हैं। 
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बहरहाल, चारों सांसदों के पार्टी छोड़ने को टीडीपी के अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इन सांसदों में राज्यसभा सांसद सीएम रमेश, टीजी वेंटकेश, जी. मोहन राव और वाईएस चौधरी शामिल हैं।
बता दें कि ईडी ने पिछले दिनों वाईएस चौधरी से जुड़ी कंपनी के हैदराबाद-दिल्ली समेत कई स्थानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी के दौरान 315 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली गई थी। अप्रैल में भी बैंक में धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में भी चौधरी से सीबीआई ने पूछताछ की थी। सांसद सीएम रमेश के ठिकानों पर भी इनकम टैक्स के अधिकारियों ने छापेमारी की थी।
बीजेपी में शामिल हुए सांसद।
दरअसल, बीजेपी के राज्यसभा सांसद और पार्टी के प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा ने नवंबर, 2018 में राज्यसभा की एथिक्स कमेटी के चेयरमैन को पत्र लिखा था। नरसिम्हा ने टीडीपी सांसद सीएम रमेश और वाईएस चौधरी को आंध्र प्रदेश का ‘माल्या’ बताते हुए सदन के लिए अयोग्य ठहराने की माँग उठाई थी। बीजेपी सांसद ने टीडीपी के दोनों सांसदों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन अब बीजेपी ने इन दोनों ही सांसदों को बड़ी शान से पार्टी में शामिल कर लिया है।
नरसिम्हा ने कहा था कि राज्यसभा सांसद सीएम रमेश बेनामी संपत्तियों का धंधा करते हैं। उनके ख़िलाफ़ करोड़ों की टैक्स चोरी का मामला चल रहा है। दूसरे सांसद वाईएस चौधरी के ख़िलाफ़ नरसिम्हा ने लिखा था कि चौधरी ने कई पब्लिक बैंकों को चूना लगाया है। जीवीएल नरसिम्हा राव ने पत्र में कहा था कि दोनों के सांसद बने रहने से  संसद की गरिमा को बड़ा नुक़सान होगा।

बचने के लिए बीजेपी की शरण?

माना जा रहा है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद चौधरी और सीएम रमेश को उनके ख़िलाफ़ चल रही जाँच से राहत मिलने की मंशा बताई जा रही है। क्योंकि बैंक लोन और कंपनियों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में दोनों सांसदों के ख़िलाफ़ सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी आदि एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं। 
ऐसा नहीं है कि ये पहले ऐसे नेता हैं जिनके दामन पर भ्रष्टाचार के दाग हों और बीजेपी ने उन्हें पार्टी में शामिल कर लिया हो। इनमें मुकुल रॉय हों, पंडित सुखराम हों, हेमंत विश्व शर्मा हों या फिर नारायण राणे। सभी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
देश की संसद में व्हिस्की में विष्णु बसे…जैसा विवादित बयान देने वाले सपा के पूर्व सांसद नरेश अग्रवाल को भी बीजेपी ने पार्टी में शामिल कर लिया था। 

राज्यसभा में बहुमत का लक्ष्य

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की है लेकिन अब उसकी नज़र राज्यसभा में बहुमत हासिल करने पर है। ऐसा इसलिए क्योंकि बहुमत न होने के कारण वह कई महत्वाकांक्षी विधेयकों को पास नहीं करा पाएगी। इनमें तीन तलाक़ बिल, नागरिकता संशोधन बिल अहम हैं। इसलिए 
बीजेपी ने टीडीपी के 4 सांसदों को पार्टी में शामिल कर यह जता दिया है कि वह आने वाले समय में कई अन्य दलों के सांसदों को भी झटक सकती है। इसे विपक्षी दलों के लिए ख़तरे के रूप में देखा जा रहा है।
राज्यसभा यानी उच्च सदन में कुल 245 सांसद हैं और सदन में बहुमत का आंकड़ा 123 है। बीजेपी के पास सबसे ज्यादा 75 सांसद हैं। उसके सहयोगी दलों में से जेडीयू के 6, अकाली दल के 3, शिवसेना के 3, आरपीआई का एक, असम गण परिषद का एक, बीपीएफ़ और एसडीएफ़ का भी एक-एक सांसद है। एआईएडीएमके के 13 सांसद हैं, जो एनडीए के साथ हैं। इस तरह यह आंकड़ा 105 तक पहुँच जाता है। सपा के पूर्व नेता अमर सिंह और सुभाष चंद्रा जैसे निर्दलीय सदस्यों के सहारे उसके पास 107 सांसद हो सकते हैं। 
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अब बीजेपी टीआरएस (6), बीजेडी (5) और वाईएसआर कांग्रेस (2) का साथ चाहती है। वर्तमान राजनीतिक हालातों में यह संभव है कि ये तीनों दल बीजेपी को समर्थन दे दें। इससे एनडीए के सांसदों की संख्या 120 तक पहुँच जाएगी। इस सत्र के चलने तक राज्यसभा की छह सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें तीन पर बीजेपी का जीतना तय है। ऐसे में बीजेपी को राज्यसभा में भी अपने महत्वाकांक्षी बिलों को पास कराने में कोई परेशानी नहीं आएगी।

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