पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पीएम मोदी और सुखबीर सिंह बादल की नई दिल्ली में हुई मुलाकात के बाद बीजेपी और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दोनों दलों ने फिलहाल किसी भी चुनावी गठबंधन की संभावना से इनकार किया है।

बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पंजाब के बदलते राजनीतिक हालात और आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने पंजाब से जुड़े कई अहम मुद्दे रखे। रिपोर्ट है कि उन्होंने आप की भगवंत मान सरकार की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के कामकाज में कथित हस्तक्षेप, भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नशे की बढ़ती समस्या और भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक अव्यवस्था का मुद्दा रखा। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी मुद्दों को ध्यान से सुना। हालाँकि बैठक के बाद दोनों नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
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क्या फिर साथ आएंगे बीजेपी और अकाली दल?

दोनों नेताओं की बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर चुनावी गठबंधन करेंगे? ऐसी अटकलें इसलिए लगाई जा रही हैं क्योंकि दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच पिछले कुछ महीनों से पंजाब के विभिन्न मुद्दों पर बातचीत चलने की ख़बरें आती रही है। हालांकि दोनों पार्टियों के नेताओं का कहना है कि चुनावी गठबंधन पर कोई चर्चा नहीं हुई है। फिर भी राजनीतिक जानकार मानते हैं कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ दोनों दलों के बीच बातचीत आगे बढ़ सकती है।

दूसरी बैठक की भी चर्चा

रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक और बैठक हो सकती है। बताया जा रहा है कि बीजेपी की ओर से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व इस बैठक में हिस्सा ले सकते हैं। बैठक में एक पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भी शामिल हो सकते हैं। वहीं अकाली दल की ओर से पार्टी के शीर्ष नेताओं में से कोई एक शामिल होगा। हालाँकि इस संभावित बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पिछले कई महीनों से बीजेपी लगातार यह कहती रही है कि वह पंजाब में अपना संगठन मजबूत कर रही है और 2027 का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है। लेकिन प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

क्यों अहम माना जा रहा है संभावित गठबंधन?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी और अकाली दल फिर साथ आते हैं तो इसका चुनाव पर असर पड़ सकता है। अकाली दल का प्रभाव अभी भी पंजाब के जाट सिख वोटरों के बीच माना जाता है, जबकि बीजेपी शहरी हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों का साथ आना चुनावी समीकरण बदल सकता है। ऐसे में आम आदमी पार्टी के लिए सत्ता बरकरार रखना मुश्किल हो सकता है। उधर कांग्रेस भी अपने पूरे दमखम से चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

2020 में टूटा था दशकों पुराना साथ

बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन 1997 में औपचारिक रूप से बना था। उस समय पंजाब आतंकवाद के दौर से बाहर निकल रहा था। इस गठबंधन ने कई चुनावों में सफलता हासिल की। 1997, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी। खास बात यह रही कि 1997 में बनी अकाली दल की सरकार पहली ऐसी सरकार थी जिसने पांच साल का पूरा कार्यकाल पूरा किया।
लेकिन वर्ष 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध के बाद दोनों दलों के रिश्तों में दरार आ गई। किसान आंदोलन के दबाव के बीच शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन छोड़ दिया था। इसी दौरान केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। अकाली दल यह नहीं चाहता था कि उसका मूल वोट बैंक यानी किसान और गांवों में रहने वाले लोग उससे नाराज़ हों।

सुखबीर तब रहे थे बीजेपी पर हमलावर

किसान आंदोलन के दौरान सुखबीर सिंह बादल ने कहा था कि 'केंद्र सरकार की ओर से कहा जा रहा है किसानों के आंदोलन में आतंकवादी, अलगाववादी आ गए हैं। तो फिर सरकार उन्हें बातचीत के लिए क्यों बुला रही है।' बादल ने तब कहा था, ‘अगर सरकार की बात मान लें तो देशभक्त और न मानें तो आतंकवादी, इससे ख़राब बात और क्या हो सकती है।’ सितंबर 2021 में दिल्ली पुलिस ने सुखबीर सिंह बादल और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल समेत 15 लोगों को हिरासत में ले लिया था। तब ये लोग कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ संसद भवन तक मार्च निकाल रहे थे।
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क्या फिर बन सकता है गठबंधन?

कृषि क़ानून वापस लिए जाने के बाद दोनों दलों के बीच रिश्ते सुधारने की कोशिशें कई बार हुईं, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। फिलहाल बीजेपी और अकाली दल दोनों ही सार्वजनिक रूप से गठबंधन की संभावना से इनकार कर रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर सिंह बादल की यह मुलाकात तब हुई है जब पंजाब में चुनावी तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच बातचीत और आगे बढ़ सकती है। अंतिम फैसला हालांकि पंजाब के बदलते राजनीतिक हालात और दोनों दलों की चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।