loader

राजस्थान : 'जय श्री राम' का नारा लगाने को मजबूर किया, पीटा, दाढ़ी नोंच ली

समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ नफ़रत का माहौल और उन पर होने वाले हमलों की वारदात एक बार फिर होने लगी हैं। राजस्थान के सीकर ज़िले में गफ़्फ़ार अहमद कछवा को 'जय श्री राम' और 'मोदी जिन्दाबाद' के नारे लगाने को कहा गया और ऐसा न करने पर उन्हें बुरी तरह पीटा गया और दाढ़ी नोच ली गई। कछवा ऑटो चलाते हैं।

पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए एफ़आईआर दर्ज कर ली है और दो लोगों को इस मामले में गिरफ़्तार कर लिया है। 

राजस्थान से और खबरें
गफ़्फ़ार अहमद की आँखें सूज गईं, उनके दाँत टूट गए और चेहरे पर खरोंचें आईं। उन्होंने यह भी कहा कि हमलावरों ने उनकी घड़ी छीन ली और पैसे भी ले लिए। 

मामला क्या है?

गफ़्फ़ार अहमद कछवा के भतीजे शाहिद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'सुबह चार बजे मेरे चाचा सवारियों को छोड़ कर लौट रहे थे जब कार में सवार दो लोगों ने उनसे तंबाकू माँगी और ऑटो रोकने को कहा। चाचाजी ने ऑटो रोकी और उन्हें तंबाकू दे दिया। पर उन लोगों ने तंबाकू नहीं लिया।' ख़ुद गफ़्फ़ार अहमद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

'उनमें से एक ने मुझे मोदी जिन्दाबाद का नारा लगाने को कहा, मैंने इनकार कर दिया तो मुझे ज़ोर का थप्पड़ मारा। मैंने वहां से भागने की कोशिश की तो उन लोगों ने गाड़ी से मेरा पीछा किया और जगमलपुर के पास मुझे रोक लिया।'


गफ़्फ़ार अहमद कछवा, निवासी, सीकर, राजस्थान

गफ़्फ़ार अहमद ने कहा, 'उन लोगों ने मुझे ऑटो से उतरने को मजबूर किया, मुझे बुरी तरह पीटा और मुझसे मोदी जिन्दाबाद और जय श्री राम के नारे लगवाए।'   
लेकिन गफ़्फार अहमद का उत्पीड़न यहाँ भी नहीं रुका। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

'उन लोगों ने मेरी दाढ़ी नोंच ली, मुझे लातों से मारा और मुझे ज़ोरदार धक्का दिया, जिससे मेरे 2-3 दाँत टूट गए। उन्होंने मुझे लाठियों से पीटा, मेरी बाईं आँख सूज गई, मेरे गाल और सिर पर चोट लगी।'


गफ़्फ़ार अहमद कछवा, निवासी, सीकर, राजस्थान

पाकिस्तान भेज देंगे

गफ़्फ़ार का कहना है कि उन लोगों ने सबकुछ करने के बाद कहा कि वे शांति से तभी बैठेंगे जब उन्हें यानी गफ़्फ़ार को पाकिस्तान भेज देंगे। 

गफ़्फ़ार अहमद की शिकायत पर पुलिस ने चोट पहुँचाने (धारा 323), ग़लत तरीके से रोके रखने (धारा 341) धार्मिक भावनाओं को आहत करने (धारा 504) के तहत मामला दायर कर लिया है। 

गफ़्फ़ार अहमद कछवा को सीकर के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल किया गया है। 

पहलू ख़ान

राजस्थान की यह पहली घटना नहीं है। वहाँ तकरीबन दो साल पहले अलवर ज़िले में गाय ले जा रहे पहलू ख़ान को बुरी तरह पीटा गया, बाद में उनकी मौत हो गई। जिस पहलू ख़ान को सड़क पर पीटे जाने का वीडियो सारी दुनिया ने देखा, उस मामले में कई साल मुक़दमा चलने के बाद पिछले साल अलवर की जिला अदालत ने सभी 6 अभियुक्तों को बरी कर दिया था। इस साल मार्च में दो नाबालिग दोषियों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई गई थी। 

लुक़मान

पिछले हफ़्ते गो रक्षा के नाम पर दूसरों की जान लेने पर आमादा कथित गो रक्षकों ने राष्ट्रीय राजधानी से सटे गुरूग्राम में एक बार फिर हैवानियत का नंगा नाच दिखाया। 

कथित गो रक्षकों के एक समूह ने 8 किमी. पीछा करके एक पिक-अप ट्रक को रोक लिया। ट्रक के ड्राइवर लुकमान को खींचकर बाहर निकाला और इस शक में कि वह गो मांस सप्लाई कर रहा है, मारना शुरू कर दिया। 

हैरानी की बात यह है कि इस दौरान वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों ने गो रक्षा के नाम पर गुंडई कर रहे इन लोगों को रोकने की कोशिश नहीं की। 

अख़लाक

कथित गो रक्षकों की गुंडई का यह सिलसिला 2015 में ग्रेटर नोएडा में एक बुजुर्ग अख़लाक़ को पीट-पीटकर मार डालने से शुरू हुआ था। अखलाक़ को सिर्फ़ इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया था क्योंकि कथित गो रक्षकों को इस बात का शक था कि उसके फ्रिज में गो मांस रखा है।
पिछले साल मध्य प्रदेश में कथित गो रक्षकों ने एक महिला समेत तीन लोगों की बेरहमी से पिटाई की थी और इसका वीडियो ख़ासा वायरल हुआ था। 
पिछले साल जून में भी गुड़गाँव में ऐसी ही घटना हुई थी, जब कथित गो रक्षकों ने दो लोगों को पीटा था। गुड़गाँव, मेवात, पलवल, रेवाड़ी और फ़रीदाबाद में कथित गो रक्षकों ने समूह बनाया हुआ है।

पश्चिम बंगाल में भी पिछले साल कूचबिहार जिले में दो लोगों को चोरी की गाय को ट्रक पर चढ़ा कर ले जाने के शक में बुरी तरह पीटा गया था। 

2019 में मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में कथित गो रक्षकों द्वारा पशुओं को ख़रीद कर ला रहे 24 लोगों को बंधक बनाकर पीटा गया था। कथित गो रक्षकों ने इन लोगों से 'गो माता की जय' के नारे भी लगवाये थे। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

राजस्थान से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें