राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अगले तीन वर्षों में ₹12,500 करोड़ के निवेश का रोडमैप घोषित किया है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों का निरीक्षण और वहां की स्थिति को सार्वजनिक करने की मुहिम तेज हुई है। विपक्षी कांग्रेस ने भी सरकारी स्कूलों की स्थिति को राजनीतिक मुद्दा बनाया है।
सरकार की ओर से यह घोषणा कल शाम की गई। पिछले एक सप्ताह से सरकारी स्कूलों में आम लोगों के जाने और वहां की स्थिति की वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर विवाद चल रहा था। इसी दौरान अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट का मामला भी सामने आया। विधानसभा में कांग्रेस ने भी सरकार से सरकारी स्कूलों की स्थिति पर जवाब मांगा। ऐसे समय में घोषित यह बड़ा निवेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं।

3,587 नए स्कूल भवन बनेंगे

सरकार के प्रस्तावित तीन वर्षीय कार्यक्रम के तहत राजस्थान में 3,587 नए स्कूल भवन बनाए जाएंगे। इन पर करीब ₹2,487.7 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 83,783 नई कक्षाओं के निर्माण पर ₹8,378.3 करोड़ खर्च करने की योजना है। यानी सरकार का बड़ा हिस्सा स्कूलों में नए भवन और अतिरिक्त कक्षाएं उपलब्ध कराने पर खर्च होगा।
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सरकार ने 22,589 स्कूलों में बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य कराने का भी प्रस्ताव रखा है। इन कामों पर करीब ₹1,129.5 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए 13,616 नए शौचालय परिसर बनाने की योजना है, जिस पर करीब ₹340.4 करोड़ खर्च होंगे।

डिजिटल शिक्षा पर भी बड़ा जोर

राज्य सरकार के प्रस्ताव में स्कूलों के डिजिटल ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत 9,000 स्मार्ट क्लासरूम, 7,000 सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) लैब और विद्यार्थियों के लिए 80,000 टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार ने डिजिटल शिक्षा के लिए दिसंबर 2026 तक ₹1,087 करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधनों और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं से जोड़ना है।

सवाल- पहले से स्वीकृत काम भी योजना में क्यों शामिल

राजस्थान सरकार के मुताबिक, ₹3,006 करोड़ से अधिक के स्कूल विकास कार्य पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं या अलग-अलग चरणों में पूरे किए जा रहे हैं। सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान 3,364 बड़े स्कूल निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इन कार्यों में 614 नए स्कूल भवन और 2,750 स्कूलों में बड़े मरम्मत कार्य शामिल हैं। इन सभी कार्यों की कुल स्वीकृत लागत करीब ₹1,219.9 करोड़ बताई गई है। सरकार ने योजना की घोषणा करते समय यह स्मार्ट चालाकी करने की कोशिश की है। पहले से स्वीकृत योजनाएं सिर्फ योजना के पैसे को भारीभरकम बनाने के लिए किया गया है।

स्कूलों की हालत पर बढ़ी राजनीतिक निगरानी

सरकार की यह घोषणा सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर बढ़े सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बीच हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, नागरिकों से सरकारी स्कूलों का दौरा कर उनकी स्थिति दर्ज करने की अपील ने इस मुद्दे को व्यापक चर्चा में ला दिया। इसके बाद कांग्रेस ने भी सरकारी स्कूलों के निरीक्षण और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया।

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर तत्काल कोई जवाब नहीं देती तो विपक्ष को स्थानीय निकाय चुनावों से पहले सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने का मौका मिल सकता था। इसी पृष्ठभूमि में ₹12,500 करोड़ की योजना को सरकार की ओर से सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ते दबाव का जवाब भी माना जा रहा है।

असली चुनौती अमल की

हालांकि सरकार ने बड़ी राशि और हजारों निर्माण कार्यों की घोषणा की है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इन योजनाओं का जमीन पर कितना और कितनी तेजी से क्रियान्वयन होता है। नए भवन, कक्षाएं, शौचालय, स्मार्ट क्लासरूम और ICT लैब तभी सरकारी स्कूलों की स्थिति बदल पाएंगे जब निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और खर्च की निगरानी भी प्रभावी तरीके से की जाए।
इस घोषणा ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को लेकर चल रही बहस को जरूर एक नया आयाम दिया है। अब सरकार के सामने चुनौती केवल ₹12,500 करोड़ का बजट घोषित करने की नहीं, बल्कि उसके परिणाम स्कूलों में दिखाई देने की है।