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प्रतीकात्मक तसवीर

राजस्थान में पुजारी को ज़िंदा जलाया, मौत से पहले कहा- ज़मीन विवाद में हमला हुआ

राजस्थान के करौली में एक पुजारी को ज़िंदा जला दिया गया। ज़मीन विवाद में कुछ लोगों ने उनपर हमला किया था। मरने से पहले पुलिस को उन्होंने बयान दिया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि लोगों के एक समूह द्वारा बुधवार को मंदिर के पुजारी पर पेट्रोल डालकर जलाया गया। गंभीर रूप से झुलसे पुजारी को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान गुरुवार शाम को उनकी मौत हो गई।

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'दैनिक भास्कर' की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला करौली के सपोटरा ग्राम पंचायत बूकना का है। 'मंदिर माफी' ज़मीन का विवाद  था। 'मंदिर माफी' का मतलब है कि मंदिर ट्रस्ट की ज़मीन उस मंदिर के प्रमुख पुजारी के नाम होती है। सामान्य रूप से ऐसी ज़मीन को मंदिर के केयरटेकर पुजारी को दिया जाता है। यह उनकी आमदनी का ज़रिया होता है। लेकिन इसी ज़मीन को लेकर सपोटरा ग्राम पंचायत बूकना के मंदिर की ज़मीन को लेकर विवाद हो गया। 

रिपोर्टों में कहा गया है कि पुजारी के पास 13 बीघा ज़मीन थी जो राधा कृष्ण मंदिर ट्रस्ट के नाम से है। गाँव के मंदिर के पुजारी बाबूलाल वैष्णव अपनी ज़मीन के पास एक प्लॉट पर मकान बनाना चाहते थे। मीणा समुदाय के कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति की और उन्होंने उस ज़मीन को अपना बताया। रिपोर्ट के अनुसार इस विवाद को गाँव के बुजुर्गों के पास ले जाया गया जिन्होंने पुजारी के पक्ष में फ़ैसला दिया। 

उस ज़मीन पर पुजारी ने अपना दावा ठोका तो दूसरे पक्ष ने भी झोपड़ी बनाकर दावा किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। 

इन घटनाओं के बाद पुजारी को जब जलाया गया था तो मरने से पहले उन्होंने पुलिस को बयान दिया था। पुलिस के अनुसार, पुजारी ने कहा है कि छह लोगों ने उसके बाजरे (बाजरा) की गांठ पर पेट्रोल डाला जो विवादित जगह पर पड़ा था और बुधवार को उसमें आग लगा दी। उन्होंने दावा किया कि आरोपियों ने उन पर भी पेट्रोल डाला और उन्हें आग लगाने की कोशिश की। उस घटना के बाद गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण पीड़ित को जयपुर के एसएमएस अस्पताल ले जाया गया।

'एनडीटीवी' की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हरजी लाल यादव ने कहा है कि हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और मुख्य आरोपी कैलाश मीणा को हिरासत में लिया गया है। पुजारी ने पुलिस को दिए अपने बयान में कैलाश, शंकर, नमो मीणा सहित छह लोगों का नाम लिया था। 

बाबूलाल वैष्णव ने बयान में आरोप लगाया है कि  वह 15 बीघा मंदिर 'माफी जमीन' पर खेती करते थे और आरोपी कैलाश, शंकर व नमो मीणा ने उनके बाड़े पर जबरन कब्जा कर लिया। 

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