loader

यह चीन वाला चक्कर क्या है?

पता नहीं, यह कोई शुभ लक्षण है या अशुभ लेकिन आजकल तोताराम अचानक गीत-संगीतमय होने लगा है। बात-बात में ठुमकता है, गुनगुनाता है। 'आज मैं ऊपर आसमाँ नीचे' जैसी हालत हो रही बन्दे की। दो दिन पहले 'ईलू-ईलू' पर फुदक रहा था तो आज- 

'प्यार में अक्सर ऐसा ही होता है।  

बात बिना बात का फ़साना बन जाता है' 

गाता हुआ प्रकट हुआ। 

हमने कहा- तुझे प्यार-मोहब्बत सूझ रहा है और उधर स्पष्ट बहुमत वाली लोकप्रिय सरकार को जवाब नहीं सूझ रहा है। मोदी जी न तो 'मन की बात' में चीन के बारे में कुछ बोले और उससे पहले सर्वदलीय मीटिंग में भी कह गए कि कोई किसी की सीमा में नहीं घुसा। चीन ने उस वक्तव्य का फ़ायदा उठा लिया और कहने लगा कि हम तो किसी की सीमा में नहीं गए। भारतीय सैनिक हमारी तरफ़ आ गए तो झड़प हो गई। 

ताज़ा ख़बरें

तोताराम ने हमारी बात उसी तरह अनसुनी कर दी जैसे कि स्पष्ट बहुमत की सरकार विपक्ष की बात नहीं सुनती। गुनगुनाता रहा- प्यार में अक्सर ऐसा ही होता है..।

हमें गुस्सा आ गया। यह क्या मज़ाक है? रोज़ हमारी चाय पीता है और ज़बरदस्ती अपने 'मन की बात' सुना देता है लेकिन हमारे मन की बात कभी नहीं सुनता। यह ठीक है कि हम मोदी जी के मन की बात सुनने के लिए बाध्य हैं क्योंकि पेंशन भोगी हैं और फिर उनके चाहने वाले। 

हमने उसका हाथ पकड़कर झिंझोड़ा- क्या तमाशा है? एक तो ग़लत गाना गाता है और वह भी ग़लत समय पर।

बोला- ग़लत क्या है? 

हमने कहा- यह गाना शाहरुख खान और रानी मुखर्जी की फ़िल्म 'चलते-चलते' का है। इसके बोल हैं- 

प्यार में कभी-कभी ऐसा भी होता है 

छोटी-सी बात का फ़साना बन जाता है। 

और इसके शुरू में पहले नायिका 'हो,हो,हो; हो हो' करती है और फिर नायक भी उसी तरह 'हो' हो' हो; हो,हो' करता है। 

बोला- बस हो गया क्लीयर। इसका मतलब इश्क में अंततः सब कुछ 'हो हो हो, ही ही ही' होना है। तभी तो मैं गा रहा हूँ- 

'प्यार में अक्सर ऐसा ही होता है।  

बात बिना बात का फ़साना बन जाता है' 

आजकल कहीं सच्चा प्यार नहीं है। लोग स्वार्थ से जुड़ते और स्वार्थ से बिछड़ते हैं। दोनों तरफ़ ही जब ठग होते हैं तो ठगी का धंधा चलता है। हम अक्सर अख़बारों में पढ़ते हैं कि कई बरसों यौन शोषण करवाकर महिला रिपोर्ट दर्ज करवाती है कि अमुक ने शादी का झाँसा देकर उसका यौन शोषण किया। दोनों ही गरजमंद, दोनों के मन में ही एक-दूसरे को ठगने का इरादा। भाई, शादी का झाँसा होता है क्या? अरे, शादी करो और उसके बाद जो तुम्हारा मन हो करो।

झूला फेलो ने कहा- ‘ड्रैगन और हाथी को आपस में मिलकर ही नृत्य करना चाहिए’। और आप नृत्य भी करने लगे, झूला भी झूलने लगे।

यह सोचकर कि एनएसजी में एंट्री मिल जाएगी, सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के लिए समर्थन मिल जाएगा और 20 ख़राब डॉलर का निवेश आ जाएगा और मिला क्या? बाबाजी का ठल्लू। एनएसजी और सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता के नाम पर जाने कौन-कौन यहाँ आकर मौज-मज़ा और धंधा कर गए। मिला कुछ नहीं फिर भी चेत नहीं हुआ। तभी तुलसी कहते हैं- ...जो गुरु मिले विरंची सम। 

ज़्यादा झूलने पर चक्कर तो आएँगे ही। 

अब जब आपको पता है कि कोई शख्स आपकी जानकारी में ही किसी को प्यार में धोखा दे चुका है तो तुम ही क्यों तीस मार खां बन रहे हो, क्या ज़्यादा चतुराई दिखा रहे हो? अब भुगतो। पहले जाना होता था जापान और जापान का नाम लेकर इश्क लड़ाने पहुँच जाते थे चीन। और वह भी एक बार नहीं 18-18 बार।

ऐसी लिव-इन रिलेशनशिप का यही हश्र होता है। अब दुर्गति भी हो रही है और कह भी नहीं पा रहे हैं। आँख सूज रही है प्रेमी के झापड़ से और बहाना बनाना पड़ा है कि ऐसे ही किचन में फिसल गई थी। 

हमने पूछा- लेकिन हमारे जो सैनिक मरे हैं उसका क्या जवाब है? क्या कारण है ? क्या वे ऐसे ही कहीं बर्फ की चट्टानों से फिसलकर गिर कर मारे गए? या दोनों तरफ़ के सैनिकों में समय बिताने के लिए अन्त्याक्षरी खेलते हुए झड़प हो गई? 

बोला- इसका जवाब न तो मोदी जी के पास है और न ही उनके शागिर्दों के पास। हाँ, अपने हरियाणा वाले और पिलानी में पढ़े हुए पूर्व थल सेनाध्यक्ष वी के सिंह जी ने इस बारे में एक अनुसंधान प्रस्तुत किया है जिसके अनुसार न तो किसी की ग़लती सिद्ध होती है और न ही हमारी कमज़ोरी। और इस जापान जाते जाते 18 बार चीन चले जाने वाली दोस्ती पर भी कोई भी आँच नहीं आती।

व्यंग्य से ख़ास

हमने पूछा- क्या ये वे ही तो नहीं हैं जिनकी जन्म तिथि का चक्कर पड़ा क्या?

बोला- हाँ, वे ही जो पहले विदेश राज्य मंत्री थे और अब सबके खाते में 15 लाख रुपए का जुमला फेंकने वाले गडकरी जी के विभाग में राज्य मंत्री हैं। इन्होंने अनुसंधान किया है कि 15 जून को चीनी तम्बू में अचानक किसी अलौकिक या जादुई कारण से या किसी के तंत्र-मन्त्र के प्रयोग से आग लग गई। इससे भारतीय सैनिक भड़क गए और झड़प हो गई। मतलब कोई बड़ी बात नहीं। 

हमने कहा- ठीक भी है। क्या चीन जानता नहीं कि हम घर में घुसकर मारते हैं। हम आँख में आँख डालकर बात करने वाले वीर लोग हैं। चीनी मंझे और दिवाली की लड़ियों का बहिष्कार कर देंगे तो भूखा मरेगा। अपने को समझता क्या है?

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
रमेश जोशी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

व्यंग्य से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें